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भास्कर न्यूज | मझिआंव रेफरल अस्पताल के समीप संचालित मिट,मटन एवं मछली की दुकानों से निकलने वाले सड़े गले अवशेषों से उठती दुर्गंध के कारण आसपास के लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। दुकानदारों द्वारा फेंके जा रहे सड़े-गले मांस एवं मछली के अवशेष से क्षेत्र में तेज दुर्गंध फैल रही है, जिससे महामारी फैलने की आशंका जताई जा रही है। स्थानीय लोगों के अनुसार खुले में फेंके गए मांस के अवशेषों को कुत्ते खा रहे हैं, जिससे उनके हिंसक होने तथा लोगों एवं अन्य जानवरों को काटने का खतरा बढ़ गया है।वहीं गंदगी और दुर्गंध के कारण आसपास रहने वाले लोगों का जीवन प्रभावित हो रहा है।सबसे अधिक परेशानी रेफरल अस्पताल के आवास में रह रहे चिकित्सकों एवं स्वास्थ्य कर्मियों,बगल में संचालित मवेशी अस्पताल के कर्मचारियों,कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय की छात्राओं तथा गायत्री शक्तिपीठ में पूजा-अर्चना करने जाने वाले श्रद्धालुओं और राहगीरों को हो रही है। लोगों ने प्रशासन से अविलंब इस समस्या का समाधान कराने की मांग की है। इस संबंध में नगर पंचायत के कार्यपालक पदाधिकारी शैलेश कुमार ने बताया कि नॉन वेज दुकानदारों के लिए वर्ष 2024 में 20 कमरों का आवंटन किया गया था, ताकि सभी दुकानदार व्यवस्थित तरीके से दुकान संचालित कर सकें। बावजूद इसके कई दुकानदार सड़क किनारे एवं खुले स्थानों पर दुकान लगा रहे हैं।कार्यपालक पदाधिकारी ने बताया कि दुकानदारों को कई बार नोटिस देकर निर्धारित कमरों में शिफ्ट होने का निर्देश दिया गया है, लेकिन अब तक दुकानदारों ने आदेश का पालन नहीं किया है। उन्होंने कहा कि बुधवार को दोपहर 12 बजे तक यदि सभी नॉन वेज दुकानदार अपने-अपने आवंटित कमरों में शिफ्ट नहीं होते हैं तो प्रशासन की उपस्थिति में जेसीबी मशीन के माध्यम से सड़क किनारे लगी दुकानों को हटाने की कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन की सख्ती के बाद अब देखना होगा कि दुकानदार निर्धारित स्थान पर शिफ्ट होते हैं या फिर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की जाती हैं। | रेफरल अस्पताल के बगल सड़क पर संचालित नॉन वेज की दुकान।
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