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Jharkhand Home’s Special Construction: झारखंड के गांवों और आदिवासी इलाकों में गर्मी से बचने के लिए कूलर तो छोड़ें, कई बार पंखा भी नहीं होता. ऐसे में ये लोग अपने घर को कुछ इस तरह से बनाते हैं कि ये नेचुरली अंदर से ठंडा रहता है. इनकी ईंट से लेकर, छत और फर्श तक का मैटीरियल आम घरों से जुदा होता है.
जमशेदपुर. झारखंड के गांवों की खासियत सिर्फ उनकी संस्कृति और परंपरा ही नहीं, बल्कि वहां के घरों की अनोखी बनावट भी है. जहां शहरों में गर्मी आते ही लोग एसी और कूलर पर निर्भर हो जाते हैं, वहीं गांवों में बिना किसी मशीन के ही घर अंदर से ठंडे रहते हैं. यह सब संभव होता है वहां के पारंपरिक और वैज्ञानिक तरीके से बनाए गए घरों के कारण.
बाहरी हिस्सों पर की जाती है पेंटिंग
छोटा तालसा गांव की रहने वाली शकुंतला मुर्मू बताती हैं कि झारखंड में घर बनाने की प्रक्रिया बहुत सोच-समझकर की जाती है. सबसे पहले घर के बाहरी हिस्से को सुंदर बनाने के लिए सोहराय पेंटिंग की जाती है. यह पेंटिंग न सिर्फ घर की सुंदरता बढ़ाती है, बल्कि यह झारखंड की संस्कृति और परंपरा को भी दर्शाती है. रंग-बिरंगे प्राकृतिक रंगों से बनी ये कलाकृतियां घर को जीवंत बना देती हैं.
इस खास मिट्टी का होता है इस्तेमाल
अब अगर घर की बनावट की बात करें तो यहां सीमेंट और बालू का इस्तेमाल बहुत कम या बिल्कुल नहीं किया जाता. इसके बजाय लाल मिट्टी से ईंट तैयार की जाती है, जिसे स्थानीय भाषा में ‘एटा’ कहा जाता है. लाल मिट्टी में प्राकृतिक ठंडक बनाए रखने की क्षमता होती है, जिससे घर के अंदर का तापमान बाहर के मुकाबले 4 से 5 डिग्री तक कम रहता है.
दीवारों को मजबूत और चिकना बनाने के लिए लाल मिट्टी, गोबर और थोड़ा सा व्हाइट सीमेंट मिलाकर लेप किया जाता है. यह मिश्रण दीवारों को ठंडा रखने के साथ-साथ उन्हें टिकाऊ भी बनाता है. गोबर में एंटी-बैक्टीरियल गुण होते हैं, जिससे घर स्वच्छ और सुरक्षित भी रहता है.
फर्श और छत पर क्या होता है खास
फर्श यानी जमीन को भी इसी तरह से तैयार किया जाता है. लाल मिट्टी और गोबर का मिश्रण जमीन पर लगाया जाता है, जिससे फर्श ठंडा और चिकना हो जाता है. यह गर्मी के दिनों में नंगे पैर चलने पर भी ठंडक का एहसास देता है.
घर की छत भी बहुत खास होती है. इसे पुआल (सूखी घास) और टाइल (टाली) से बनाया जाता है. पुआल एक प्राकृतिक इंसुलेटर की तरह काम करता है, जो सूरज की तेज किरणों को सीधे अंदर आने से रोकता है. इससे घर के अंदर का तापमान संतुलित बना रहता है.
घर की डिजाइन भी होती है खास
सबसे दिलचस्प बात घर की डिजाइन है. कई घरों को त्रिकोण आकार या ढलानदार छत के साथ बनाया जाता है. यह डिजाइन न सिर्फ बारिश के पानी को आसानी से बहने में मदद करता है, बल्कि गर्म हवा को ऊपर की ओर जाने और बाहर निकलने का रास्ता भी देता है. इससे घर के अंदर ठंडक बनी रहती है.
झारखंड के गांवों के घर पारंपरिक ज्ञान और प्रकृति के साथ तालमेल का बेहतरीन उदाहरण हैं. बिना बिजली के उपकरणों के भी ये घर गर्मी में ठंडक और सुकून का अनुभव कराते हैं, जो आज के आधुनिक घरों के लिए भी एक सीख है.
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बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी से मास कम्यूनिकेशन एंड जर्नलिज़्म में मास्टर्स, गोल्ड मेडलिस्ट. पत्रकारिता का सफर दैनिक जागरण से शुरू हुआ, फिर प्रभात खबर और ABP न्यूज़ से होते हुए News18 Hindi तक पहुंचा. करियर और देश की …और पढ़ें