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हर घर नल जल योजना, भारत सरकार की एक महत्वपूर्ण योजना है। इसका मकसद साल 2024 तक हर ग्रामीण परिवार को नियमित रूप से प्रति व्यक्ति प्रति दिन 55 लीटर पानी मुहैया कराया जाना था। इस योजना की घोषणा वर्ष 2019 में की गई थी। जिसके लिए सरकार द्वारा प्रत्येक घर तक नल का कनेक्शन उपलब्ध कराए जाने की योजना है। इस योजना के अनुसार हर घर में जितना जल्दी हो सके हर घर नल योजना को पहुंचाना सरकार का हर संभव प्रयास है। हर घर नल योजना को जल जीवन मिशन का नाम दिया गया परंतु लोहरदगा जिले में यह पूरी तरह से बेकार साबित हो रही है। जिले के 66 पंचायत अंतर्गत 353 गांव में लगे सोलर आधारित पेयजल आपूर्ति सक्सेसफुल नहीं है। इसमें विभागीय लापरवाही और ठेकेदार की मिली भगत और मनमानी से अब तक सही तरीके से गांव में शुद्ध पेयजल नहीं पहुंच सका है। जिले में करोड़ों की लागत से पूरी की गई जलापूर्ति योजना का लाभ लोगों को नहीं मिल रहा है। सातों प्रखंड में अलग-अलग ठेकेदार द्वारा सोलर आधारित पेयजल आपूर्ति का सोलर जलमीनार लगाया गया। परंतु कहीं पाइप खराब, तो कहीं स्ट्रक्चर अपूर्ण, तो कहीं पाइपलाइन की कमी सहित अन्य परेशानी से अब भी गांव के लोगों को जूझना पड़ रहा है। बरसात के मौसम में भी लोगों को पेयजल के लिए जूझना पड़ रहा है। जिले में लोगों को पीने के पानी की समस्या नहीं हो, इसको लेकर करोड़ों रुपए की लागत से ग्रामीण क्षेत्रों में जलापूर्ति योजना पूरी की गई, लेकिन अधिकतर जलमीनार खराब हैं। गर्मी में लोग पेयजल संकट से जूझ रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाले लोगों को दूर दूर तक पानी को लेकर भटकना पड़ रहा है। हालांकि, राज्य सरकार ने पीने के पानी की समस्या को देखते हुए ग्रामीण क्षेत्रों में जलापूर्ति योजना की शुरुआत की, योजना को धरातल पर भी उतारा गया, लेकिन योजना का लाभ लोगों को नहीं मिल रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में लगभग 540 से अधिक सोलर बोरिंग लगाया गया। जिन एजेंसी ने बोरिंग और सोलर प्लेट लगाया, उसे पांच सालों तक देखरेख की भी जिम्मेदारी दी गई, लेकिन बोरिंग लगने के कुछ दिनों के भीतर ही ज्यादातर बोरिंग खराब हो गये हैं। स्थिति यह है कि कहीं सोलर खराब है, तो कहीं कंट्रोल पैनल और कहीं जल स्तर नीचे चले जाने की वजह से बोरिंग पानी नहीं दे रहा है। इससे आमलोग पीने के पानी की समस्या से जूझ रहे हैं। परेशान लोग संबंधित एजेंसियों के साथ साथ विभागीय अधिकारियों से शिकायत भी कर रहे हैं, लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है। कई स्थानों पर जलमीनार भी बनाये गये हैं, जो खराब है। हैंडपंप की मरम्मत को लेकर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। स्थिति यह है कि जिले के 353 गांवों में आधे से अधिक गांव में रहने वाले लोगों को शुद्ध पेयजल की सुविधा नहीं मिल रही है। कई जगहों पर सोलर पेयजलापूर्ति ठीक है पर मामूली खराबी के कारण वह बेकार साबित हो रहा है। इधर पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के कार्यपालक अभियंता अनूप हांसदा के अनुसार अधिकांश जगहों पर सोलर जलापूर्ति को ठीक कराते हुए शुरू कराए जाने की बात कही गई है। वहीं खराब पड़े जलमीनार का चयन कर ठीक कराए जाने की बात कही गई है। इधर ग्रामीण जलापूर्ति योजनाएं ठप पड़ी हुई है, स्थिति यह है कि करोड़ों रुपए खर्च करने के बाद लोगों को पीने का पानी नहीं मिल रहा है।
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