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भाग-दौड़ भरी जिंदगी, बढ़ता मोटापा, तनाव और हृदय रोगों के बढ़ते खतरे के बीच साइकिल एक ऐसी “दवा’ है, जिसका कोई साइड इफेक्ट नहीं है। विश्व बाइसाइकिल दिवस के अवसर पर विशेषज्ञ डॉक्टरों का कहना है कि यदि कोई व्यक्ति रोजाना केवल 2 किलोमीटर भी साइकिल चलाता है तो उसके शरीर के कई अंगों को सीधा लाभ मिलता है। इससे न सिर्फ शारीरिक फिटनेस बेहतर होती है, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य भी मजबूत होता है। कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. प्रशांत कुमार, फिजिशियन डॉ. संजय सिंह और ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञ डॉ. रजनीश कुमार के अनुसार साइकिलिंग सबसे सुरक्षित और प्रभावी एक्सरसाइज में से एक है। 60 की उम्र में 100 किमी पैडलिंग : साइकिल चलाकर प्रवीण ने बीपी और शुगर को दी मात उम्र सिर्फ एक नंबर है, इसे सच कर दिखाया है कांके रोड के 60 वर्षीय प्रवीण राजगढ़िया ने। रोटरी क्लब से जुड़े प्रवीण हफ्ते में तीन दिन कांके रोड से पिठोरिया के बीच 35 किलोमीटर साइकिल चलाते हैं। इस तरह हर हफ्ते वे 100 किलोमीटर से ज्यादा का सफर पैडल मारकर तय कर लेते हैं। प्रवीण बताते हैं, “साइकिल चलाने से मेरा एनर्जी लेवल बढ़ गया है। पहले मैं शुगर और बीपी की समस्या से परेशान रहता था। साइकिलिंग को जब से अपनी दिनचर्या बनाया है, दोनों बीमारियां पूरी तरह कंट्रोल में हैं। भास्कर एक्सपर्ट बता रहे शरीर के कौन-कौन से अंगों के लिए साइकिलिंग फायदेमंद…
डॉ. प्रशांत कुमार, कार्डियोलॉजिस्ट 1. हार्ट : मजबूत होता है : साइकिलिंग से हृदय की मांसपेशियां मजबूत होती हैं। ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है। हाई ब्लड प्रेशर नियंत्रित रखने में मदद मिलती है। हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा कम होता है। 2. फेफड़े : बढ़ती है सांस लेने की क्षमता : शरीर में ऑक्सीजन की आपूर्ति बढ़ती है। फेफड़ों की कार्यक्षमता मजबूत होती है। सांस फूलने की समस्या कम हो सकती है। शारीरिक सहनशक्ति बढ़ती है। 3. डायबिटीज : शुगर कंट्रोल में मददगार : इंसुलिन की कार्यक्षमता बेहतर होती है। ब्लड शुगर नियंत्रित रखने में मदद मिलती है। टाइप-2 डायबिटीज का खतरा घटता है। वजन नियंत्रित रहने से अतिरिक्त लाभ। डॉ. संजय सिंह, फिजिशियन 1. वजन कंट्रोल में : पेट की चर्बी घटती है : साइक्लिंग में शरीर अतिरिक्त कैलोरी खर्च करता है। पेट और कमर की चर्बी घटाने में मदद मिलती है। मोटापे का खतरा कम होता है। मेटाबॉलिज्म बेहतर होता है। 2. दिमाग स्वस्थ : तनाव से राहत : साइकिल रोज चलाने से एंडोर्फिन और सेरोटॉनिन हार्मोन बढ़ते हैं। तनाव और चिंता कम होती है। अवसाद का खतरा घटता है। एकाग्रता और याददाश्त बेहतर होती है। 3. इम्युनिटी : बीमारियों से लड़ने की ताकत बढ़ती है : शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। संक्रमण का खतरा कम होता है। ऊर्जा स्तर बेहतर रहता है। लंबे समय तक शरीर सक्रिय बना रहता है। डॉ. रजनीश, ऑर्थोपेडिक्स 1. पैर : बढ़ती है ताकत : जांघ और पिंडली की मांसपेशियां मजबूत होती हैं। घुटनों के आसपास की मांसपेशियों को सहारा मिलता है। शरीर का संतुलन बेहतर होता है। चलने-फिरने की क्षमता में सुधार आता है। 2. हाथ और कंधे : ऊपरी शरीर भी रहता है एक्टिव : हैंडल पकड़ने से हाथों की मांसपेशियां सक्रिय रहती हैं। कंधों की ताकत बढ़ती है। शरीर का पोस्चर बेहतर होता है। गर्दन और कंधे में जकड़न कम हो सकती है। 3. हड्डियां और जोड़ : कम दबाव में ज्यादा फायदा : जोड़ों की गतिशीलता बनी रहती है। घुटनों पर दौड़ने की तुलना में कम दबाव पड़ता है। मांसपेशियों और लिंगामेंट्स की मजबूती बढ़ती है।
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