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सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड के सुरक्षित और संरक्षित वनों की सीमा पर स्टोन क्रशर लगाने की न्यूनतम दूरी तय करने के मामले पर सुनवाई करने से इंकार कर दिया है। शीर्ष अदालत ने सभी पक्षों को हाईकोर्ट में ही अपनी बात रखने का निर्देश दिया है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने यह निर्देश दिया। इसके बाद राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने अपनी विशेष अनुमति याचिका वापस ले ली। बोर्ड झारखंड हाईकोर्ट के वन क्षेत्रों से खनन और स्टोन क्रशर लगाने की निर्धारित दूरी 250 मीटर से बढ़ाकर 500 करने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट गया था। हाईकोर्ट ने कहा था कि राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 2015 और 2017 में जारी अधिसूचनाएं, जिनमें दूरी घटाकर 250 मीटर कर दी गई थी, वह अप्रासंगिक तथ्यों पर आधारित है। अदालत ने इन अधिसूचनाओं को खारिज करते हुए पहले की 500 मीटर दूरी वाली व्यवस्था बहाल कर दी थी। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया था कि 16 जनवरी का आदेश, जिसमें संरक्षित जंगलों से एक किलोमीटर के दायरे में खनन पर रोक लगाई गई थी, सुप्रीम कोर्ट के आदेश की गलत व्याख्या पर आधारित था। इसके बाद राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड सुप्रीम कोर्ट चला गया था। लेकिन शीर्ष कोर्ट के सुनवाई से इंकार किए जाने के बाद अब सभी पक्षों को हाईकोर्ट में अपनी बात रखनी होगी।
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