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सिर्फ कुछ बीघा जमीन और लाखों की कमाई! जानिए कैसे पपीते की...


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कम जमीन में मुनाफे का फॉर्मूला!पपीते की खेती से लाखों कमा रहे किसान अशोक शर्मा

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Agriculture News: कृषि क्षेत्र में नवाचार और आधुनिक तकनीकों को अपनाकर किसान आज नई सफलता की कहानियां लिख रहे हैं. ऐसी ही एक प्रेरणादायक कहानी किसान अशोक शर्मा की है, जिन्होंने कम जमीन में पपीते की खेती कर लाखों रुपये का मुनाफा कमाया है. पारंपरिक फसलों की तुलना में पपीते की खेती ने उन्हें बेहतर उत्पादन और अधिक आय दी. उचित देखभाल, वैज्ञानिक तरीके और बाजार की मांग को ध्यान में रखते हुए उन्होंने खेती को लाभकारी व्यवसाय में बदल दिया. पपीते की फसल कम समय में तैयार हो जाती है और इसकी बाजार में सालभर मांग बनी रहती है, जिससे किसानों को नियमित आय का अवसर मिलता है. अशोक शर्मा की सफलता आसपास के किसानों के लिए भी प्रेरणा बन रही है.

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Agriculture News: राजस्थान के सीकर जिले के सिंगरावट गांव के किसान अशोक कुमार शर्मा ने साबित कर दिया है कि खेती में सही फसल चयन और आधुनिक तकनीकों का उपयोग करके आय को कई गुना बढ़ाया जा सकता है. परंपरागत फसलों पर निर्भर रहने के बजाय उन्होंने पपीते की व्यावसायिक खेती को अपनाया और आज यह खेती उनके लिए लाखों रुपये की कमाई का जरिया बन चुकी है. उनकी सफलता अब उन किसानों के लिए भी प्रेरणा बन रही जिसने पास कम जमीन है और वे अधिक वे अधिक मुनाफा कमाना चाहते हैं.

अशोक कुमार ने साल 2023 में अपनी तीन बीघा भूमि में करीब 700 पपीते के पौधे लगाए थे. वर्तमान में सभी पौधे उत्पादन दे रहे हैं और खेत से ही व्यापारी फल खरीदकर ले जाते हैं. उनकी उपज जयपुर और चोमू की मंडियों तक पहुंच रही है. पपीते की खेती से उन्हें सालाना लाखों रुपये से अधिक की आय हो रही है. इसके साथ ही वे मधुमक्खी पालन भी कर रहे हैं, जिससे अतिरिक्त आय प्राप्त होती है. अशोक कुमार पपीते और मधुमक्खी पालन करके सालाना करीब 10 लाख रुपए से अधिक की कमाई कर रहे हैं.

8 से 10 महीने में उत्पादन हो जाता है शुरू 
अशोक कुमार ने बताया कि किसानों के लिए पपीते की खेती फायदे का सौदा है. यह कम समय में उत्पादन देना शुरू कर देती है. उन्होंने बताया कि पौध रोपण के 8 से 10 महीने बाद फल मिलना शुरू हो जाता है. यदि सिंचाई, पोषण और पौधों की देखभाल सही तरीके से की जाए तो एक बार लगाया गया बाग लंबे समय तक नियमित उत्पादन देता रहता है. यही कारण है कि कई किसान अब गेहूं, सरसों और बाजरा जैसी पारंपरिक फसलों के साथ बागवानी फसलों की ओर भी रुख कर रहे हैं.

ऐसे करें खेती की शुरुआत 
उन्होंने बताया कि पपीते की खेती शुरू करने से पहले किसानों को अच्छी जल निकासी वाली भूमि का चयन करना चाहिए. इसके अलावा पौधों को लगाते समय बीच में उचित दूरी रखे. इसके अलावा ड्रिप सिंचाई प्रणाली को अपनाने से खर्च कम होता है. वहीं, जैविक खाद का उपयोग करना उत्पादन बढ़ाने में मदद करता है. साथ ही खेत में मधुमक्खी पालन को शामिल करने से परागण बेहतर होता है, जिससे फल की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों में सुधार देखा जाता है. यही मॉडल अशोक कुमार के खेत में भी सफल साबित हुआ है.

संयुक्त मॉडल किसानों के लिए लाभ का सौदा 
उन्नत अशोक कुमार का मानना है कि यदि किसान बाजार की मांग को समझते हुए फसल का चयन करें और नई तकनीकों को अपनाएं, तो कम जमीन से भी अच्छी आय अर्जित की जा सकती है. पपीते की खेती और मधुमक्खी पालन का यह संयुक्त मॉडल आज क्षेत्र के किसानों के लिए आय बढ़ाने का एक सफल उदाहरण बनकर सामने आया है.

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Jagriti Dubey

Hi, I am Jagriti Dubey, a media professional with 6 years of experience in social media and content creation. I started my career with an internship at Gbn 24 news channel in 2019 and have worked with many repu…और पढ़ें



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