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झारखंड में आठ महीने से बंद जमीन की मापी और सीमांकन का काम जल्द शुरू होने की उम्मीद है। राजस्व, निबंधन एवं भूमि सुधार विभाग ने हाईकोर्ट के निर्देशों के आधार पर नई मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) का ड्राफ्ट तैयार कर लिया है। विभागीय मंत्री दीपक बिरुआ ने भी इसे मंजूरी दे दी है। अब इसे कैबिनेट की स्वीकृति के लिए भेजने की तैयारी है। मंजूरी मिलते ही नए नियम पूरे राज्य में लागू होंगे। इससे पूर्वी सिंहभूम के उन 10 हजार से अधिक परिवारों को राहत मिलने की उम्मीद है, जिनकी जमीन की मापी के लिए आवेदन लंबित हैं या निरस्त कर दिए गए हैं। नए नियमों में मापी की जिम्मेदारी सीओ, अंचल कार्यालय के प्रधान सहायक और अमीन को दी गई है। अंचल निरीक्षक और राजस्व उपनिरीक्षक को इस प्रक्रिया से अलग रखा गया है। विभागीय मंत्री की सहमति मिल चुकी है एसओपी का प्रारूप तैयार हो चुका है। विभागीय मंत्री ने भी सहमति दे दी है। इसे कैबिनेट में भेजने की तैयारी अंतिम चरण में है। मंजूरी मिलते ही राज्य में जमीन की मापी और सीमांकन का काम शुरू हो जाएगा। कैबिनेट की मंजूरी मिलते ही पूरे राज्य में लागू होंगे नए नियम हाईकोर्ट के आदेशों से बंद हुई थी मापी सीमांकन को लेकर कोर्ट के अलग-अलग फैसलों के बाद राज्य में जमीन मापी की प्रक्रिया रुक गई थी। बेंच ने स्पष्ट किया था कि सरकारी आदेश केवल मापी शुल्क तय करता है, इससे सीओ को निजी जमीन के सीमांकन का असीमित अधिकार नहीं मिलता। आगे कहा गया कि सीओ सेवा प्रदाता हैं, मालिकाना हक के विवाद का फैसला करने वाले प्राधिकारी नहीं। डिवीजन बेंच ने राज्य सरकार को वैधानिक एसओपी बनाने का निर्देश दिया। वहीं मामले में अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल जमीन की सीमा पहचानने का संदेह हो तो राजस्व अधिकारी मापी कर सकते हैं, लेकिन मालिकाना हक का विवाद सिविल कोर्ट ही तय करेगा। 6 हजार आवेदन निरस्त, 4 हजार अटके हाईकोर्ट के आदेशों के बाद जिले के सभी 12 अंचलों में करीब 6 हजार ऑनलाइन आवेदन निरस्त कर दिए गए थे। इसके बाद झारभूमि पोर्टल पर मापी की ऑनलाइन सेवा भी बंद हो गई। पिछले 6-7 महीनों में करीब 3,500 से 4,000 नए मामले भी आवेदन नहीं हो पाने के कारण अटक गए। कुछ अंचलों में मैनुअल आवेदन से मापी की कोशिश हुई, लेकिन दूसरे पक्ष के विरोध के कारण प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी। मापी शुरू होने से जमीन की खरीद-बिक्री, दाखिल-खारिज और पारिवारिक बंटवारे से जुड़े मामलों के निपटारे में भी मदद मिलने की उम्मीद है। ऐसे होगी जमीन की मापी
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