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Seed Ball Technique: पर्यावरण संरक्षण और खेती को आसान बनाने की दिशा में किसानों द्वारा अपनाई जा रही सीड बॉल (Seed Ball) तकनीक इन दिनों तेजी से लोकप्रिय हो रही है. पलामू जिले के किसान ओमकार नाथ वर्षों से नर्सरी तैयार कर पौधों का वितरण करते हैं. उनका मानना है कि पारंपरिक तरीके से पौधे तैयार करने में अधिक समय, मेहनत और खर्च लगता है. ऐसे में सीड बॉल तकनीक एक सरल, कम खर्चीला और प्रभावी विकल्प बनकर उभरी है.
किसान ओमकार नाथ ने बताया कि सीड बॉल तैयार करने के लिए मुख्य रूप से मिट्टी, वर्मी कम्पोस्ट और गोबर खाद का उपयोग किया जाता है. सामान्यतः तीन भाग गोबर खाद या कम्पोस्ट और एक भाग मिट्टी को अच्छी तरह मिलाकर उसमें जरूरत के अनुसार पानी डाला जाता है.
इसके बाद मिश्रण को छोटे-छोटे गोल आकार में तैयार किया जाता है. इन गोलों के बीच में जिस पौधे का उत्पादन करना हो, उसका बीज डाल दिया जाता है. तैयार सीड बॉल को कुछ समय तक सुखाने के बाद खेत, बगीचे या खाली जमीन पर रख दिया जाता है.
बारिश या नमी मिलने पर बीज अंकुरित होने लगता है और पौधा विकसित होने लगता है. यह तकनीक बीज को सुरक्षित रखते हुए पौधे के शुरुआती विकास के लिए जरूरी पोषक तत्व भी उपलब्ध कराती है, जिससे अंकुरण की संभावना बढ़ जाती है.
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ओमकार नाथ ने कहा कि सीड बॉल बीज के लिए एक सुरक्षा कवच की तरह काम करती है. इससे बीज पक्षियों या अन्य जीवों से काफी हद तक सुरक्षित रहता है. साथ ही गोबर खाद और वर्मी कम्पोस्ट में मौजूद पोषक तत्व पौधे को शुरुआती अवस्था में पर्याप्त पोषण देते हैं. इसी वजह से पौधों की बढ़वार बेहतर होती है.
उन्होंने कहा कि फलों के बीजों को फेंकने के बजाय सीड बॉल बनाकर उपयोग किया जाए, तो बड़े स्तर पर हरियाली बढ़ाई जा सकती है. सड़क किनारे, बंजर जमीन, पहाड़ी क्षेत्रों और खाली जगहों पर इन्हें आसानी से फैलाया जा सकता है.
कम लागत, आसान तरीका और बेहतर परिणामों के कारण यह तकनीक किसानों के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण से जुड़े लोगों के बीच भी तेजी से लोकप्रिय हो रही है.