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हजारीबाग का ‘मैंगो विलेज’ जिसने बदल दी सैकड़ों परिवारों की किस्मत, व्यापारी...


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आरा गांव के बागानों में दूधिया मालदा, दसहरी, लंगड़ा, सुकुल और मिट्ठू समेत कई किस्म के आम उगाए जाते हैं. किसानों के अनुसार, पेड़ों में मंजर आते ही थोक व्यापारी बागानों का सौदा करने पहुंच जाते हैं. यहां के आमों की मांग झारखंड के अलावा बिहार के पटना, गया, नवादा और बिहार शरीफ तक रहती है. स्वाद और मिठास के कारण खरीदार सीधे गांव पहुंचकर आम की खरीदारी करते हैं.

 हजारीबाग का 'मैंगो विलेज' जिसने बदल दी सैकड़ों लोगों की किस्मत, जानें खासियतZoom

इस गांव में खेतों से ज्यादा हैं आम के पेड़

हजारीबाग: झारखंड के हजारीबाग जिले का एक गांव इन दिनों अपने आम के बागानों की वजह से खास पहचान बना रहा है. ईचाक प्रखंड की डाढ़ा पंचायत स्थित आरा गांव की पहचान उसकी हरियाली या खेतों से नहीं, बल्कि यहां फैले विशाल आम के बागानों से है. गांव में 2000 से अधिक आम के पेड़ और दर्जनों बागान हैं, जो न केवल इसकी पहचान बने हुए हैं, बल्कि सैकड़ों परिवारों की आजीविका का भी प्रमुख आधार हैं. आम का मौसम शुरू होते ही पूरा गांव आम की खुशबू से महक उठता है और किसानों के चेहरों पर खुशी दिखाई देने लगती है.

चारों ओर फैले आम के बागानों से घिरा आरा गांव वर्षों से आम उत्पादन के लिए जाना जाता है. स्थानीय किसानों के अनुसार, गांव का लगभग हर परिवार किसी न किसी रूप में आम की खेती और बागवानी से जुड़ा हुआ है. पिछले करीब 30 वर्षों से यहां बड़े पैमाने पर आम की खेती की जा रही है. पूरे साल किसान जिस फसल का इंतजार करते हैं, वह आम का मौसम आते ही तैयार हो जाती है और कई परिवारों की आय का सबसे बड़ा स्रोत बनती है.

आरा गांव के बागानों में कई प्रसिद्ध और स्वादिष्ट किस्मों के आम पाए जाते हैं. इनमें दूधिया मालदा, सीपीया, दसहरी, सुकुल, लंगड़ा और मिट्ठू जैसी प्रजातियां प्रमुख हैं. किसानों का कहना है कि पेड़ों में मंजर आते ही थोक व्यापारी बागानों का सौदा करने के लिए पहुंचने लगते हैं. यहां पैदा होने वाले आम की मांग केवल झारखंड तक सीमित नहीं है, बल्कि बिहार के पटना, गया, नवादा और बिहार शरीफ जैसे शहरों तक रहती है. स्वाद और मिठास के कारण यहां के आम खरीदारों की पहली पसंद बन चुके हैं.

किसानों के मुताबिक, आरा गांव में आम की खेती सिर्फ एक व्यवसाय नहीं, बल्कि पीढ़ियों से चली आ रही परंपरा है. गांव के कई युवा किसान बताते हैं कि उनकी तीसरी पीढ़ी भी इसी काम से जुड़ी हुई है. आम के बागान पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं. इसके साथ ही ये ग्रामीणों को रोजगार और आय का स्थायी साधन उपलब्ध करा रहे हैं.

किसानों का मानना है कि आम की खेती के कारण गांव से पलायन में भी काफी कमी आई है. आसपास के गांवों के किसान यहां आकर बागवानी की तकनीक सीखते हैं और नई किस्मों के बारे में जानकारी प्राप्त करते हैं. उत्पादन बढ़ाने के लिए किसान हर साल नए पौधे भी लगा रहे हैं.

आज आरा गांव हजारीबाग जिले में आम की पहचान के रूप में उभर चुका है. गर्मी के दिनों में बच्चों की चहल-पहल और पके आमों की खुशबू पूरे गांव को खास बना देती है. यह गांव न केवल स्वादिष्ट आमों के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि इस बात का भी उदाहरण है कि बागवानी और खेती के जरिए ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाया जा सकता है.

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Amita kishor

न्यूज़18इंडिया में कार्यरत हैं. आजतक से रिपोर्टर के तौर पर करियर की शुरुआत फिर सहारा समय, ज़ी मीडिया, न्यूज नेशन और टाइम्स इंटरनेट होते हुए नेटवर्क 18 से जुड़ी. टीवी और डिजिटल न्यूज़ दोनों विधाओं में काम करने क…और पढ़ें



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