पलामू: आज के दौर में पलामू की अदालत में महिलाओं की मौजूदगी सामान्य बात है, लेकिन एक समय ऐसा भी था, जब कोर्ट परिसर पूरी तरह पुरुषों का क्षेत्र माना जाता था. महिलाओं का न्यायालय तक पहुंचना भी मुश्किल था और वकालत करना तो लगभग असंभव समझा जाता था. ऐसे दौर में वर्ष 1991 में मेदिनीनगर की अधिवक्ता वीणा मिश्रा ने इस सोच को चुनौती दी और पलामू की पहली महिला वकील बनकर इतिहास रच दिया. आज उनका नाम न केवल जिले की वरिष्ठ अधिवक्ताओं में शामिल है. बल्कि वह हजारों महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत भी हैं.
रांची यूनिवर्सिटी से की हैं पढ़ाई
वीणा मिश्रा ने लोकल 18 को बताया कि उन्होंने वर्ष 1986 में रांची विश्वविद्यालय से एलएलबी की पढ़ाई पूरी की. उनके नाना जाने-माने क्रिमिनल वकील थे, जिनसे उन्हें न्याय के प्रति लगाव मिला. वहीं, उनके पति डॉ. वी.एन. मिश्रा, जो पेशे से फिजीशियन हैं, जिनके सहयोग से वह आगे बढ़ी. इसी सहयोग और अपने दृढ़ संकल्प के दम पर उन्होंने वर्ष 1991 में डाल्टनगंज सिविल कोर्ट से वकालत की शुरुआत की.
उन्होंने कहा कि उस समय अदालतों में महिला अधिवक्ता और चपरासी नहीं थीं. अधिकांश महिलाएं अपनी समस्याएं खुलकर नहीं बता पाती थीं, क्योंकि उनके सामने केवल पुरुष वकील होते थे. उन्हें महसूस हुआ कि महिलाओं को न्याय दिलाने के लिए महिलाओं का न्याय व्यवस्था में आना बेहद जरूरी है. इसी सोच ने उन्हें वकालत के क्षेत्र में आने की प्रेरणा दी. हालांकि उनके पास प्रोफेसर और शिक्षक बनने के भी अवसर थे. इसके बावजूद उन्होंने वकील बनने का दृढ़ संकल्प लिया.
जानें पहली बार कोर्ट रूम में क्या हुआ
उन्होंने कहा कि अपने शुरुआती दिनों का एक दिलचस्प किस्सा देखने को मिला कि जब वह पहली बार अपने सीनियर के कहने पर कोर्ट में जमानत (बेल) की पैरवी करने पहुंचीं तो एक महिला मुवक्किल ने साफ कह दिया, “हम मेहरारू से काम कराने नहीं आए हैं, हम मरद से काम कराने आए हैं.” सीनियर ने काफी समझाया, तब जाकर उन्हें मौका मिला. जब उन्होंने प्रभावी ढंग से बहस कर जमानत दिला दी तो पूरे कोर्ट परिसर में चर्चा शुरू हो गई कि “एक मोहतरमा ने बेल करा दी.” उस दिन की सफलता ने न केवल उनकी पहचान बनाई, बल्कि महिलाओं के लिए न्यायालय के दरवाजे भी नए विश्वास के साथ खोल दिए.
35 सालों से कर रही हैं प्रैक्टिस
करीब 35 वर्षों के अपने कानूनी सफर में वीणा मिश्रा ने अनगिनत मुकदमों की पैरवी की है. वह वर्ष 1999 से अतिरिक्त लोक अभियोजक (Additional Public Prosecutor) के रूप में सेवाएं दे रही हैं. वर्ष 2005 में उपभोक्ता फोरम की सदस्य बनीं और डाल्टनगंज, गढ़वा तथा लातेहार में भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं. वे जिले की पहली महिला मीडिएटर हैं और बार एसोसिएशन में लगातार उपाध्यक्ष जैसे अहम पदों पर भी रहीं. इसके अलावा लोक अदालत, जेल अदालत, विधिक जागरूकता अभियान और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) के माध्यम से महिलाओं के अधिकार, दहेज विरोध और कानूनी साक्षरता के क्षेत्र में भी लगातार सक्रिय हैं.
वीणा मिश्रा का परिवार भी शिक्षा और सेवा की मिसाल हैं. उनकी दो बेटियां हैं, जिनमें एक बी.एड. कॉलेज में प्रोफेसर है, जबकि दूसरी वकालत के पेशे से जुड़ी हुई हैं. संघर्ष, आत्मविश्वास और समाज सेवा से भरी वीणा मिश्रा की कहानी यह साबित करती है कि यदि हौसले बुलंद हों तो कोई भी दीवार ज्यादा देर तक रास्ता नहीं रोक सकती. पलामू की पहली महिला वकील के रूप में उन्होंने केवल इतिहास नहीं बनाया, बल्कि आने वाली पीढ़ियों की बेटियों के लिए न्याय और समान अवसर की नई राह भी तैयार की.