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हार्ट अटैक या सड़क हादसा? गोल्डन ऑवर में CPR बन सकता है...


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Jamshedpur CPR Training: जमशेदपुर में इंस्टीट्यूट ऑफ सेफ्टी प्रोफेशनल ने छात्रों व आम लोगों को CPR का प्रशिक्षण दिया. अर्जित सरकार ने बताया कि आपात स्थिति में CPR जान बचाने में मदद कर सकता है. आइये जानते हैं इसके बारे में.

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जमशेदपुर: आज के समय में हार्ट अटैक और दिल से जुड़ी बीमारियों के मामले लगातार बढ़ रहे हैं. वहीं, सड़क दुर्घटनाओं में भी कई बार लोग गंभीर रूप से घायल होकर अचानक बेहोश हो जाते हैं. ऐसे समय में अस्पताल पहुंचने से पहले का समय, जिसे गोल्डन ऑवर कहा जाता है. सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है. यदि इस दौरान सही समय पर प्राथमिक उपचार मिल जाए तो कई लोगों की जान बचाई जा सकती है. इसी प्राथमिक उपचार का सबसे अहम हिस्सा है CPR (कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन) है.

जमशेदपुर के साकची स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ सेफ्टी प्रोफेशनल में सेफ्टी, फर्स्ट एड एंड डिजास्टर मैनेजमेंट के चीफ कोऑर्डिनेटर अर्जित सरकार ने छात्रों के साथ-साथ आसपास के आम लोगों को भी CPR देने का प्रशिक्षण दिया. उन्होंने बताया कि आज के समय में हर व्यक्ति को CPR की बुनियादी जानकारी होनी चाहिए. क्योंकि किसी भी आपात स्थिति में अस्पताल पहुंचने से पहले यही तकनीक किसी की जान बचाने में मदद कर सकती है.

सरकार ने बताया कि यदि कोई व्यक्ति अचानक बेहोश हो जाए. सांस नहीं ले रहा हो या उसकी धड़कन महसूस नहीं हो रही हो तो सबसे पहले यह सुनिश्चित करें कि आसपास का स्थान सुरक्षित है. इसके बाद व्यक्ति को आवाज देकर और कंधा हिलाकर देखें कि वह कोई प्रतिक्रिया दे रहा है या नहीं. यदि वह कोई जवाब नहीं देता और उसकी सांस सामान्य नहीं चल रही है तो तुरंत एम्बुलेंस को सूचना दें और आसपास मौजूद लोगों से भी मदद मांगें.

इसके बाद व्यक्ति को किसी सख्त और समतल जगह पर सीधा लिटाएं. दोनों हाथों को एक-दूसरे के ऊपर रखकर छाती के बीचों-बीच रखें और पूरे शरीर के वजन का उपयोग करते हुए तेजी से 30 बार छाती को दबाएं (Chest Compressions). दबाव की गति लगभग 100 से 120 बार प्रति मिनट होनी चाहिए. इसके बाद यदि आपको प्रशिक्षण प्राप्त है, तो व्यक्ति की ठुड्डी को हल्का ऊपर उठाकर उसकी नाक बंद करें और 2 बार मुंह से सांस (Rescue Breaths) दें. इसके बाद फिर से 30 बार छाती दबाएं. इस 30:2 प्रक्रिया को लगातार दोहराते रहें, जब तक एम्बुलेंस नहीं पहुंच जाती या व्यक्ति में सांस और हरकत वापस नहीं आने लगती है.

वहीं, विशेषज्ञों का कहना है कि CPR कोई डॉक्टरों तक सीमित तकनीक नहीं है. सही प्रशिक्षण के बाद कोई भी आम नागरिक इसे सीख सकता है. हालांकि, यदि किसी को रेस्क्यू ब्रीथ देना नहीं आता, तो वह केवल लगातार छाती पर दबाव देकर भी मदद कर सकता है. ऐसे प्रयास कई बार मरीज की जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.

वहीं, अर्जित सरकार का कहना है कि स्कूल, कॉलेज, कार्यालय और सार्वजनिक स्थानों पर CPR की नियमित ट्रेनिंग होनी चाहिए, ताकि आपातकालीन स्थिति में लोग घबराने के बजाय सही कदम उठा सकें. उनका मानना है कि यदि समाज का हर व्यक्ति CPR सीख ले, तो सड़क दुर्घटनाओं और अचानक आने वाले हार्ट अटैक के दौरान बड़ी संख्या में लोगों की जान बचाई जा सकती है.

About the Author

Brijendra Pratap Singh

बृजेंद्र प्रताप सिंह डिजिटल-टीवी मीडिया में (2021) लगभग 5 सालों से सक्रिय हैं. मेट्रो न्यूज 24 टीवी चैनल मुंबई, ईटीवी भारत, दैनिक भास्कर के अनुभव के साथ 14 मई 2024 से  Hindi.News18.com<…

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