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100 साल पहले आए बाढ़ के स्तर पर मंदाकिनी का बनेगा फ्लड...


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चित्रकूट जिला प्रशासन अब मंदाकिनी नदी के बाढ़ क्षेत्र यानी फ्लड प्लेन जोन का निर्धारण और सीमांकन 100 साल पहले आई बाढ़ के रिकॉर्ड के आधार पर करने जा रहा है. शासन स्तर से इसके लिए संबंधित विभागों को निर्देश जारी किए गए हैं,इस पहल का उद्देश्य नदी किनारे बसे शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों को भविष्य में संभावित बाढ़ के खतरे से सुरक्षित करना है.

चित्रकूटः धर्मनगरी चित्रकूट भगवान श्रीराम की तपोस्थली के रूप में देशभर में प्रसिद्ध है. मान्यता है कि प्रभु श्रीराम ने अपने वनवास काल के साढ़े ग्यारह वर्ष यहीं बिताए थे,इसी पवित्र भूमि से जुड़ी मां मंदाकिनी नदी आस्था का प्रमुख केंद्र मानी जाती है, जहां आज भी हजारों श्रद्धालु स्नान और पूजा-अर्चना करने पहुंचते हैं, लेकिन पिछले कई वर्षों से बरसात के मौसम में आने वाली बाढ़ ने नदी किनारे रहने वाले लोगों और व्यापारियों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. हर साल बाढ़ के कारण दुकानों, घरों को नुकसान उठाना पड़ता है अब इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए जिला प्रशासन ने बड़ी तैयारी शुरू कर दी है.

100 साल पहले आई बाढ़ के आधार पर होगा सीमांकन

बता दे कि चित्रकूट जिला प्रशासन अब मंदाकिनी नदी के बाढ़ क्षेत्र यानी फ्लड प्लेन जोन का निर्धारण और सीमांकन 100 साल पहले आई बाढ़ के रिकॉर्ड के आधार पर करने जा रहा है. शासन स्तर से इसके लिए संबंधित विभागों को निर्देश जारी किए गए हैं,इस पहल का उद्देश्य नदी किनारे बसे शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों को भविष्य में संभावित बाढ़ के खतरे से सुरक्षित करना है.अधिकारियों का मानना है कि फ्लड प्लेन जोन तय होने से अवैध निर्माण पर रोक लगेगी और लोगों को समय रहते सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की योजना भी बेहतर तरीके से बनाई जा सकेगी.

बाढ़ के दौरान 131.500 मीटर पहुंचता है जलस्तर

जानकारी के लिए बता दे कि मां मंदाकिनी नदी का उद्गम सती अनुसूया आश्रम से हुआ है.करीब 106 किलोमीटर लंबी यह नदी आगे चलकर उत्तर प्रदेश के कनकोटा गांव के पास यमुना नदी में मिल जाती है, सामान्य दिनों में नदी का जलस्तर लगभग 123.500 मीटर लगभग रहता है, जबकि बरसात और बाढ़ के दौरान यह बढ़कर 131.500 मीटर तक पहुंच जाता है. जलस्तर बढ़ने के साथ ही नदी का स्वरूप भी बदल जाता है, जिससे घाटों और आसपास के इलाकों में कटान और नुकसान की स्थिति बन जाती है.हर वर्ष आने वाली बाढ़ से स्थानीय लोगों को आर्थिक नुकसान झेलना पड़ता है.कई बार नदी किनारे दुकानें पूरी तरह से पानी से भर जाती हैं. इसे देखते हुए सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग ने पिछले 100 वर्षों में आई बाढ़ के आंकड़ों का अध्ययन शुरू कर दिया है.

एनजीटी के नियमों का होगा पालन

इस संबंध में चित्रकूट डीएम पुलकित गर्ग ने लोकल 18 जानकारी में बताया कि एनजीटी के निर्देशों के क्रम में सिंचाई विभाग द्वारा मंदाकिनी नदी का सीमांकन किया जा रहा है. इसके तहत यह चिह्नित किया जाएगा कि नदी के आसपास कौन-कौन से क्षेत्र बाढ़ की चपेट में आते हैं और वहां कितना नुकसान होता है,उन्होंने बताया कि चार विभागों को संयुक्त रूप से रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं. रिपोर्ट आने के बाद मंदाकिनी नदी का फ्लड प्लेन जोन घोषित किया जाएगा.सिंचाई विभाग नदी के पुराने बहाव, जलस्तर और प्रभावित क्षेत्रों का सर्वे कर रहा है ताकि आगे वाले दिनों के लिए ठोस रणनीति तैयार की जा सके.

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Rajneesh Kumar Yadav

मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें



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