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12350 KMPH की तूफानी रफ्तार, 1500 KM तक तबाही ही तबाही, ब्रह्मोस...


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12350 KMPH की तूफानी रफ्तार, ब्रह्मोस से कहीं ज्‍यादा घातक है यह ब्रह्मास्‍त्र

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Agni-5 vs Brahmos vs LR-AShM Missile: मिसाइल टेक्‍नोलॉजी के मामले में भारत टॉप के देशों में शुमार होता है. ब्रह्मोस से लेकर अग्नि सीरीज की मिसाइलें इसका ज्‍वलंत उदाहरण हैं. अब भारत के रक्षा वैज्ञानिकों ने मिसाइल तकनीक की दिशा में एक और बड़ी सफलता हासिल की है. डीआरडीओ ने मध्‍यम दूरी तक हाइपरसोनिक रफ्तार से मार करने में सक्षम एंटी-शिप मिसाइल के फेज-2 का सफल परीक्षण किया है. इससे इंडियन नेवी सामर‍िक तौर पर और ज्‍यादा ताकतवर होगी. समंदर में दुश्‍मनों को नेस्‍तनाबूद करने में यह मिसाइल अहम भूमिका निभाएगी.

12350 KMPH की तूफानी रफ्तार, ब्रह्मोस से कहीं ज्‍यादा घातक है यह ब्रह्मास्‍त्रZoom

DRDO ने लॉन्‍ग रेंज एंटी-शिप हाइपरसोनिक मिसाइल (LR-AShM) के दूसरे चरण का सफल परीक्षण किया है. (फाइल फोटो/Reuters)

Agni-5 vs Brahmos vs LR-AShM Missile: रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने लॉन्‍ग रेंज हाइपरसोनिक एंटी-शिप मिसाइल (LR-AShM) के दूसरे चरण का सफल परीक्षण किया है. एक्‍सपर्ट मानते हैं कि इस मिसाइल के इंडियन नेवी में शामिल होने से इंडियन नेवी की ताकत में कई गुना तक का ईजाफा होगा. समंदर में राष्‍ट्रीय हितों का रक्षा करना पहले क मुकाबले और बेहतर होगा. भारत ने LR-AShM का परीक्षण ऐसे समय में किया है, जब मैरीटाइम सिक्‍योरिटी को लेकर गंभीर चुनौतियां मुंह बाए खड़ी हैं. ईरान जंग ने समुद्री सुरक्षा के मुद्दे को और भी गंभीर बना दिया है. दूसरी तरफ, हिन्‍द महासागर में चीन की बढ़ती गतिविधियों ने पहले से ही भारत की चिंताएं बढ़ा रखी हैं. ऐसे में भारत के लिए मैरीटाइम सिक्‍योरिटी को मजबूत करना काफी जरूरी हो गया. LR-AShM का सफल ट्रायल इस लिहाज से काफी अहम है. इससे समंदर में भारत की सामरिक ताकत काफी बढ़ेगी. भारत के भंडार में कई ऐसी मिसाइलें हैं, जो मारक क्षमता के मामले में काफी खतरनाक हैं. अग्नि-5 और ब्रह्मोस क्रूज मिसाइलें उसी कैटेगरी में आते हैं. अब सवाल उठता है कि LR-AShM ब्रह्मोस और अग्नि-5 के मुकाबले में कहां ठहरती हैं. इन तीनों मिसाइलों में कौन सबसे ज्‍यादा खतरनाक है.

भारत ने रक्षा क्षमताओं में एक बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए लंबी दूरी की एंटी-शिप हाइपरसोनिक मिसाइल सिस्‍टम का सफल परीक्षण किया है. DRDO द्वारा ओडिशा तट के पास स्थित एक रक्षा केंद्र से इस मिसाइल के फेज-II का परीक्षण किया गया, जो देश की अगली पीढ़ी की स्ट्राइक क्षमता की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है. परीक्षण के दौरान मिसाइल ने लगभग 1500 किलोमीटर दूर स्थित लक्ष्य को सटीकता से भेदते हुए अपनी क्षमता साबित की. यह मिसाइल टू-फेज हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल टेक्‍नोलॉजी पर आधारित है, जो इसे अत्यधिक गति और उच्च मारक क्षमता प्रदान करती है. ट्रायल में सभी मानकों का पालन किया गया. यह मिसाइल खास तौर पर Indian Navy की तटीय सुरक्षा जरूरतों को ध्यान में रखते हुए विकसित की गई है और यह स्थिर व गतिशील समुद्री लक्ष्यों यानी मूविंग टार्गेट को निशाना बनाने में सक्षम है. स्वदेशी एवियोनिक्स और अत्याधुनिक सेंसर सिस्टम इसकी सटीकता और विश्वसनीयता को और बढ़ाते हैं. मिसाइल प्रारंभिक चरण में मैक-10 (12350 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार) तक की गति हासिल करती है और बाद में नियंत्रित ग्लाइड मोड में मैक 5 (6200 KMPH) की औसत गति से उड़ान भरती है. यह उपलब्धि भारत को हाइपरसोनिक तकनीक वाले चुनिंदा देशों की श्रेणी में और मजबूती से स्थापित करती है. साथ ही हिंद-प्रशांत क्षेत्र में उसकी सामरिक स्थिति और समुद्री सुरक्षा को भी सुदृढ़ करती है.

LR-AShM फ्यूचर वॉर के लिहाज से काफी अहम है. (फाइल फोटो/Reuters)

LR-AShM: 12350 KMPH की स्‍पीड, 1500 KM रेंज

भारत ने लंबी दूरी की हाइपरसोनिक एंटी-शिप मिसाइल (LR-AShM) के फेज-II परीक्षण में बड़ी सफलता हासिल की है, जो देश की समुद्री सुरक्षा क्षमता को नई ऊंचाई देता है. इस मिसाइल की सबसे बड़ी खासियत इसकी हाइपरसोनिक स्पीड है, जो शुरुआती चरण में मैक-10 तक पहुंचती है और बाद में नियंत्रित ग्लाइड फेज में मैक-5 की रफ्तार बनाए रखती है. यह गति और इसकी लो-एल्टीट्यूड मैन्युवरिंग क्षमता इसे दुश्मन के रडार से बचने में बेहद सक्षम बनाती है. LR-AShM दो स्टेज सॉलिड रॉकेट मोटर पर आधारित है, जिसमें पहला चरण बूस्ट देता है और दूसरा इसे हाइपरसोनिक गति तक पहुंचाता है. मिसाइल लगभग 1500 किलोमीटर दूर लक्ष्य को सटीकता से भेदने में सक्षम है. इसमें अत्याधुनिक टर्मिनल गाइडेंस सिस्टम और स्वदेशी सेंसर लगे हैं, जो चलते और स्थिर दोनों प्रकार के समुद्री लक्ष्यों पर सटीक हमला सुनिश्चित करते हैं. यह मिसाइल विभिन्न प्रकार के पेलोड ले जाने में सक्षम है, जिससे इसकी ऑपरेशनल फ्लेक्सिबिलिटी बढ़ती है. LR-AShM भारत के पारंपरिक मिसाइल शस्त्रागार में एक अहम कड़ी जोड़ती है और नौसेना को एक शक्तिशाली, गैर-परमाणु स्ट्राइक विकल्प प्रदान करती है.

अग्नि-5 एक इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल है. रेंज और रफ्तार के मामले में यह LR-AShM से ज्‍यादा खतरनाक है. (फाइल फोटो/Reuters)

अग्नि-5: मिसाइलों का बादशाह

भारत की सामरिक क्षमता को और मजबूत करते हुए अग्नि-5 मिसाइल देश की रक्षा रणनीति का अहम स्तंभ बनकर उभरी है. यह परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) है, जिसकी मारक क्षमता 5,000 से 5,500 किलोमीटर से अधिक है. रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) द्वारा विकसित इस मिसाइल में अत्याधुनिक MIRV (मल्टीपल इंडिपेंडेंटली टार्गेटेबल री-एंट्री व्हीकल) तकनीक का उपयोग किया गया है, जिससे यह एक साथ कई लक्ष्यों पर वार कर सकती है. अग्नि-5 तीन चरणों वाले ठोस ईंधन इंजन से लैस है और इसे कैनिस्टराइज्ड प्लेटफॉर्म पर विकसित किया गया है, जिससे सड़क या रेल के जरिए इसकी त्वरित तैनाती और लॉन्च संभव हो पाता है। यह मिसाइल करीब मैक-24 (लगभग 30000 KMPH) की हाइपरसोनिक गति से उड़ान भरने में सक्षम है, जिससे इसे रोक पाना बेहद मुश्किल हो जाता है. अगस्त 2025 में स्ट्रैटेजिक फोर्सेज कमांड द्वारा इसके सफल परीक्षण ने इसकी विश्वसनीयता को और पुख्ता किया है. भविष्य में इसके 7,500 किलोमीटर तक की रेंज वाले उन्नत संस्करण पर भी काम जारी है.

ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल के दो वर्जन हैं, जिसमें एक नेवी के लिए भी है. नौसेना के लिए डिजाइन ब्रह्मोस मिसाइल रेंज और रफ्तार के मामले में LR-AShM से कहीं पीछे है. (फाइल फोटो/Reuters)

ब्रह्मोस मिसाइल: 6200 KMPH रफ्तार, 290 किलोमीटर रेंज

भारतीय नौसेना की मारक क्षमता को नई ऊंचाई देने वाली ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल लगातार अपनी ताकत साबित कर रही है. करीब 2.8 मैक (6200 KMPH) की रफ्तार से कम ऊंचाई पर उड़ान भरने वाली यह मिसाइल 2005 से नौसेना के अग्रिम युद्धपोतों पर तैनात है और लंबी दूरी तक सटीक हमले करने में सक्षम है. ब्रह्मोस मिसाइल को विध्वंसक और फ्रिगेट जैसे युद्धपोतों पर वर्टिकल और इनक्लाइंड लॉन्च सिस्टम के जरिए तैनात किया गया है. यह मिसाइल 290 किलोमीटर तक के लक्ष्य को भेद सकती है और 200 किलोग्राम का पारंपरिक वॉरहेड ले जाने में सक्षम है. इसकी खासियत यह है कि नौसेना एक साथ कई मिसाइलों का ‘साल्वो लॉन्च’ कर दुश्मन के रक्षा तंत्र को भेद सकती है. इसके अलावा ब्रह्मोस का सबमरीन वेरिएंट भी विकसित किया गया है, जिससे पानी के भीतर से हमला करने की क्षमता बढ़ी है. भविष्य में ब्रह्मोस-NG जैसे हल्के और अधिक उन्नत संस्करण से इसकी मारक क्षमता और बढ़ने की उम्मीद है. ब्रह्मोस-NG को खासतौर पर एयरफोर्स के लिए डेवलप किया जा रहा है.

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Manish Kumar

बिहार, उत्‍तर प्रदेश और दिल्‍ली से प्रारंभिक के साथ उच्‍च शिक्षा हासिल की. झांसी से ग्रैजुएशन करने के बाद दिल्‍ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में PG डिप्‍लोमा किया. Hindustan Times ग्रुप से प्रोफेशनल कॅरियर की शु…और पढ़ें



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