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टेंडर मंजूरी और मैनपावर की कमी से योजनाओं की रफ्तार थमी महिला बाल विकास एवं समाज कल्याण विभाग में केंद्र प्रायोजित योजनाओं के करोड़ों रुपए होल्ड पर पड़े हैं। नतीजा, 31 मई तक ₹22,970 करोड़ के योजना बजट से एक रुपया भी खर्च नहीं हुआ। आमतौर पर योजनाएं पैसे की कमी से अटकती हैं, लेकिन यहां पैसा मिलने के बाद भी योजनाएं फाइलों से बाहर नहीं निकल सकीं। आंगनबाड़ी सेविका-सहायिकाओं को नवंबर से मानदेय नहीं मिला है, बच्चों का पोषाहार पिछले चार महीने से बंद है। 15वें वित्त आयोग से मिले पैसे भी आंगनबाड़ी केंद्रों के कायाकल्प के बजाय फाइलों में अटके हैं। हालात ऐसे हैं कि करोड़ों रुपए उपलब्ध होने के बावजूद कल्याणकारी योजनाओं का लाभ जमीनी स्तर तक नहीं पहुंच पा रहा। सबसे ज्यादा असर महिलाओं, बच्चों और आंगनबाड़ी व्यवस्था पर पड़ा है। सक्षम आंगनबाड़ी : 16,675 केंद्रों के लिए 166.75 करोड़ रुपए मिले, काम अब तक शुरू नहीं हुआ
राज्य के 16,675 आंगनबाड़ी केंद्रों को ‘सक्षम आंगनबाड़ी’ के रूप में विकसित करने के लिए 166.75 करोड़ रुपए मिले हैं। हर केंद्र पर 1-1 लाख रुपए खर्च होने हैं। एलईडी टीवी, वाटर प्यूरीफायर, खेल सामग्री समेत चार घटकों पर काम होना है, लेकिन राशि टेंडर प्रक्रिया में अटकी है। कब तक सुधरेगी स्थिति : लक्ष्य जुलाई के अंत तक टेंडर पूरी कर अगस्त से सामग्री की आपूर्ति शुरू करने का है। मिशन शक्ति -मिशन वात्सल्य : महिला और बाल सुरक्षा योजनाओं की रफ्तार थमी
महिला सुरक्षा के लिए मिशन शक्ति (संबल और सामर्थ्य) व बच्चों की सुरक्षा के लिए मिशन वात्सल्य की राशि भी खर्च नहीं हो सकी है। इस कारण वन स्टॉप सेंटर, महिला हेल्पलाइन और बाल देखरेख संस्थाओं की स्थिति खराब हो गई है। केंद्रों के संचालन पर इसका असर पड़ा है।
कब तक सुधरेगी स्थिति : विभाग के अनुसार मामला जनरल बॉडी की बैठक में रखा जाएगा। मंजूरी मिलने के बाद आगे की प्रक्रिया शुरू होगी। पोषण 2.0 : 0-6 साल तक के बच्चों व गर्भवती का चार महीने से रुका पोषाहार
0 से 6 वर्ष के बच्चों, गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं के लिए संचालित पोषण 2.0 योजना भी पिछले चार महीने से रुकी है। एजेंसी को कार्यावधि बढ़ाने की सहमति मिल चुकी है, लेकिन कैबिनेट की मंजूरी बाकी है। योजना में केंद्र और राज्य की हिस्सेदारी 60:40 है।
कब तक सुधरेगी स्थिति : विभाग को उम्मीद है कि जुलाई के अंतिम हफ्ते तक कैबिनेट की मंजूरी मिल जाएगी और अगस्त से योजना फिर शुरू होगी। मानदेय का संकट : 38,432 सेविका-सहायिकाओं का नवंबर से मानदेय रूका
राज्य की 38,432 आंगनबाड़ी सेविकाएं और इतनी ही सहायिकाएं पिछले नौ महीने से मानदेय का इंतजार कर रही हैं। सेविकाओं को 4,500 और सहायिकाओं को 2,250 रु. प्रतिमाह मिलता है। मानदेय नहीं मिलने से पहले उधार पर पोषाहार की व्यवस्था हुई, पर अब वह भी बंद हो गई है।
कब तक सुधरेगी स्थिति : विभाग का कहना है कि केंद्र से राशि मिल चुकी है। जुलाई के अंत तक मानदेय भुगतान का लक्ष्य है। अगस्त से सारी योजनाएं पटरी पर आ जाएंगी: सचिव
विभागीय सचिव उमाशंकर सिंह ने कहा कि एसएनए स्पर्श प्रणाली लागू होने के कारण भुगतान प्रक्रिया में तकनीकी कठिनाइयां आई हैं। अब सभी आंगनबाड़ी केंद्रों को इससे जोड़ा जा रहा है। हर बिल टैग कर ट्रेजरी भेजा जाएगा। उनका दावा है कि सक्षम आंगनबाड़ी और पोषण कार्यक्रम समेत सभी योजनाएं अगस्त से फिर पटरी पर आ जाएंगी।
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