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Indian Gaur spotted in Valmiki Tiger Reserve: पश्चिमी चंपारण स्थित वाल्मीकि टाइगर रिज़र्व में पर्यटकों की आंखें उस समय खुली रह गई जब एक विशाल काय जानवरों का झुंड सामने से गुजरा. इस जानवर का वजन 1500 केजी तक होता है. साथ ही ऊंचाई 7 फीट तक. इससे बाघ भी भय खाते हैं. यह है गौर(इंडियन बाइसन). जो मुख्य रूप से घने जंगलों में निवास करती है.
पश्चिम चम्पारण. घने जंगल में वन्य जीवों के दीदार के लिए वाल्मीकि टाइगर रिज़र्व एक आदर्श पर्यटन स्थल के रूप में पर्यटकों को अपनी तरफ आकर्षित कर रहा है.भीषण गर्मी के बावजूद भी यहां हर दिन सैकड़ों की संख्या में पर्यटक जंगल सफारी और कुदरत की खूबसूरती के दीदार को पहुंच रहे हैं. मजे की बात यह है कि सफारी के दौरान पर्यटकों को बेहद करीब से वन्य जीवों को देखने का मौका मिल रहा है, जो उनके इस टूर को बेहद खास बनाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं. हाल ही में VTR के वाल्मीकिनगर रेंज में सफारी के लिए आरा और मुजफ्फरपुर से पहुंचे पर्यटकों ने गौर का दीदार किया है, जिसे इंडियन बाइसन के नाम से भी जाना जाता है.
1500 किलो तक वजनी
पर्यटकों के साथ मौजूद नेचर गाइड राजीव आर्या बताते हैं कि गौर गाय की ही एक प्रजाति है, जो मुख्य रूप से घने जंगलों में निवास करती है. इनकी बनावट शानदार और शरीर अत्यधिक मस्क्युलर होता है. आकार में 7 फीट तक ऊंचे और 1000 से 1500 किलो तक वजनी ये जीव पर्यटकों का ध्यान अपनी तरह बेहद जल्द आकार्षित करते हैं.सफारी के दौरान इन्हें देखना अपने आप में एक अतुलनीय अनुभव होता है.
शक्तिशाली और मस्क्यूलर
अक्सर 5 से 10 की झुंड में निवास करने वाले ये जीव इतने शक्तिशाली होते हैं कि सामना होने पर मिनी पिक अप वैन तक को आसानी से उठाकर पटक सकते हैं. इनके पैर घुटने तक सफेद होते हैं, जो देखने पर किसी मोज़े की तरह मालूम पड़ते हैं. यही कारण है कि इस जीव को ‘सफेदा’ नाम से भी जाना जाता है. गौर से संबंधित सबसे आश्चर्यजनक बात यह है कि सुरक्षा के दृष्टिकोण से जंगल का राजा टाइगर भी इनसे दूरी बनाकर रखता है.
VTR के इन रेंजों में खूब देखे जाते हैं
बकौल राजीव, वाल्मीकि टाइगर रिज़र्व के वाल्मीकिनगर, गनौली, गोवर्धना और मांगुराहा रेंज में इन जीवों को खूब देखा जाता है. खासकर बरसात के समय या उसके आस पास ये पर्यटकों को झुंड में चरते हुए नज़र आ ही जाते हैं. आरा और मुजफ्फरपुर से VTR पहुंचे पर्यटक भी उनमें से एक हैं.
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