Last Updated:
Solar Irrigation System: झारखंड के पलामू (चैनपुर) में 17 महिला किसानों ने आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश की है. सरकार से मिले 90% अनुदान की मदद से महिलाओं ने सोलर लिफ्ट सिंचाई प्रणाली को अपनाया. जिससे 20 एकड़ बंजर जैसी भूमि पर पानी की समस्या का स्थायी समाधान हो गया है. डीजल और बिजली के खर्च से मुक्ति मिलने के कारण खेती की लागत में भारी कमी आई है. जिससे अब इन महिलाओं के लिए हाई-वैल्यू (नकदी) फसलों की खेती करने और अपनी आय बढ़ाने का नया रास्ता खुल गया है.
पलामू: सरकार किसानों को आत्मनिर्भर बनाने और खेती को आधुनिक तकनीक से जोड़ने के लिए लगातार नई योजनाएं चला रही है. इसी कड़ी में पलामू जिले के चैनपुर प्रखंड में महिलाओं ने सामुदायिक प्रबंधित सौर्य लिफ्ट सिंचाई प्रणाली अपनाकर खेती में नई मिसाल पेश की है. यहां 17 महिलाओं ने मिलकर सोलर पंप आधारित सिंचाई व्यवस्था शुरू की है. जिससे अब 20 एकड़ तक की जमीन पर सालभर सिंचाई संभव हो सकेगी. इस पहल से दोहरा लाभ मिलेगा. खेती की लागत घटने के साथ हाई वैल्यू क्रॉप यानी अधिक लाभ देने वाली फसलों की खेती का रास्ता भी खोल रही है.
लागत 6 लाख पर खर्च मात्र 60 हजार
यह योजना नित्या परिवर्तन जल उपभोक्ता समूह के माध्यम से सीएम एसएलआई योजना के तहत लागू की गई है. इसके अंतर्गत किसानों को 90 प्रतिशत अनुदान पर सोलर पंप की सुविधा दी जा रही है. इस परियोजना की कुल लागत करीब 6 लाख रुपए है. जिसमें किसानों को केवल 10 प्रतिशत राशि यानी लगभग 60 हजार रुपए खर्च करने पड़े हैं. जेएसएलपीएस और स्वयंसेवी संस्था टीआरआई के सहयोग से ग्राम संगठन के माध्यम से यह सुविधा किसानों तक पहुंचाई गई है.
न बिजली कटने की समस्या, न डीजल खर्च का बोझ
महिला किसान रीता देवी बताती हैं कि वह पिछले 10 वर्षों से खेती कर रही हैं. पहले डीजल पंप से सिंचाई करनी पड़ती थी. जिससे खर्च अधिक होता था. वहीं बिजली पंप से सिंचाई के दौरान बिजली कटने की समस्या बनी रहती थी. लेकिन अब खेत में सोलर पंप लगने से सिंचाई बेहद आसान हो गई है. उन्होंने बताया कि गेहूं, सरसों और सब्जियों की खेती में अब पानी की समस्या काफी हद तक खत्म हो गई है. 17 महिलाओं ने मिलकर इस योजना का लाभ लिया है. इससे खेती में अच्छा फायदा मिलने लगा है.
20 एकड़ तक की भूमि सिंचाई हुई आसान
महुगांवा की रहने वाली शकुंतला देवी कहती हैं कि सब्जी खेती में सबसे बड़ी समस्या पटवन की होती थी. लेकिन अब सोलर आधारित सिंचाई प्रणाली से खेती आसान हो गई है. शिवपुर डैम में लगाए गए 5 एचपी मोटर के जरिए पानी को करीब 1500 फीट दूर तक पाइपलाइन से खेतों तक पहुंचाया जा रहा है. इससे 20 एकड़ तक की भूमि की सिंचाई आसानी से हो सकेगी. सबसे बड़ी बात यह है कि इसमें बिजली बिल का कोई खर्च नहीं आता और मोटर चलाने में भी परेशानी नहीं होती.
भविष्य की खेती का मजबूत विकल्प
उन्होंने कहा कि सौर ऊर्जा आधारित सिंचाई प्रणाली किसानों के लिए भविष्य की खेती का मजबूत विकल्प बन सकती है. इससे खेती की लागत कम होगी, पानी की उपलब्धता बढ़ेगी और किसान पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर हाई वैल्यू क्रॉप की ओर कदम बढ़ा सकेंगे.
About the Author
मैंने अपने 12 वर्षों के करियर में इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम किया है। मेरा सफर स्टार न्यूज से शुरू हुआ और दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर डिजिटल और लोकल 18 तक पहुंचा। रिपोर्टिंग से ले…और पढ़ें