बोकारो: झारखंड के बोकारो जिले के बोकारो थर्मल थाना क्षेत्र स्थित गोविंदपुर बस्ती में करीब 20 साल बाद एक परिवार की खुशियां लौट आईं. वर्षों पहले रोजगार की तलाश में घर से निकले परशुराम महतो अचानक लापता हो गए थे. जहां परिवार ने लंबे समय तक उनका इंतजार किया, लेकिन कोई खबर नहीं मिली. आखिरकार जब उनके सकुशल होने की जानकारी मिली और वह घर वापस लौटे तो पूरे गांव में खुशी और भावुकता का माहौल बन गया.
पति को सामने देखकर छलक पड़े पत्नी के आंसू
करीब 2 दशक बाद जब परशुराम महतो अपने घर पहुंचे तो पत्नी उन्हें सामने देखकर भावुक हो गईं. आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े. परिवार के लिए यह पल किसी सपने के सच होने जैसा था. वर्षों से जिस शख्स के लौटने का इंतजार था, वह अचानक सामने था।.पति-पत्नी के मिलन को देखकर वहां मौजूद ग्रामीण भी भावुक हो गए.
ढोल-नगाड़ों के साथ हुआ जोरदार स्वागत
परशुराम के गांव पहुंचते ही ग्रामीणों ने गाजे-बाजे और ढोल-नगाड़ों के साथ उनका जोरदार स्वागत किया. जहां बड़ी संख्या में लोग उन्हें देखने और परिवार की खुशियों में शामिल होने पहुंचे. इस दौरान पूरे गांव में उत्सव जैसा माहौल नजर आया. जहां ग्रामीणों ने इस मिलन को यादगार बनाने के लिए पति-पत्नी को दोबारा शादी के बंधन में भी बांधा.
महिलाओं की मौजूदगी में फिर भरी गई मांग
ग्रामीण महिलाओं की मौजूदगी में परशुराम महतो ने अपनी पत्नी की मांग में दोबारा सिंदूर भरा. इस भावुक पल ने वहां मौजूद लोगों की आंखें नम कर दीं. वर्षों के इंतजार के बाद पति-पत्नी का यह मिलन ग्रामीणों के लिए भी बेहद खास बन गया.
राजस्थान के आश्रम में रह रहे थे परशुराम
ग्रामीणों के मुताबिक, परशुराम महतो पिछले करीब एक साल से राजस्थान के भरतपुर जिले स्थित एक आश्रम में रह रहे थे. बोकारो थर्मल थाना प्रभारी के माध्यम से जब उनके परिवार को उनके बारे में जानकारी मिली तो परिजन राजस्थान पहुंचे. इसके बाद उन्हें सकुशल वापस बोकारो लाया गया.
पुलिस की सूचना से परिवार को मिला बिछड़ा सदस्य
करीब 20 साल बाद परशुराम की वापसी ने उस घर में फिर से खुशियां भर दीं, जहां वर्षों से सिर्फ इंतजार और चिंता थी. परिजनों और ग्रामीणों ने बोकारो थर्मल थाना प्रभारी और पुलिस प्रशासन का आभार जताया. पुलिस की सूचना और सहयोग से परिवार को उनका बिछड़ा हुआ सदस्य वापस मिल सका.
करी दो दशक बाद हुआ यह मिलन किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं था, जिस शख्स के लौटने की उम्मीद धीरे-धीरे धुंधली पड़ गई थी, उसकी वापसी ने पूरे गांव को भावुक कर दिया. परशुराम की घर वापसी अब गोविंदपुर बस्ती के लिए एक ऐसी कहानी बन गई है, जिसे लोग लंबे समय तक याद रखेंगे.