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Palamu Ajab Gajab: पलामू के सुमति वर्मन अपनी अनोखी कला ‘सिर से नारियल फोड़ने’ के लिए चर्चा का केंद्र बने हुए हैं. सुमति अब तक अपने सिर से करीब 100 नारियल फोड़ चुके हैं। यह कोई साधारण करतब नहीं है, बल्कि इसके पीछे पांच महीने की कड़ी मेहनत और मार्शल आर्ट्स का गहन प्रशिक्षण है. उनका कहना है कि यह प्रदर्शन पूरी तरह से तकनीक और एकाग्रता का खेल है. हालांकि यह देखने में बेहद जोखिम भरा लगता है, लेकिन सुमति ने इसे अपनी मार्शल आर्ट्स की ट्रेनिंग और विशेष अभ्यास के दम पर सिद्ध किया है.
पलामू: पलामू में प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है. यहां के लोग शिक्षा, खेल, कला और साहसिक प्रदर्शन जैसे विभिन्न क्षेत्रों में अपनी अलग पहचान बना रहे हैं. ऐसी ही एक अनोखी प्रतिभा के धनी हैं पलामू जिले के निवासी सुमति वर्मन, जिनका हैरतअंगेज कारनामा लोगों को आश्चर्यचकित कर देता है. सुमति अपने सिर से नारियल फोड़ लेते हैं. यह सुनने में भले ही अविश्वसनीय लगे, लेकिन उन्होंने वर्षों की मेहनत और कठिन अभ्यास के दम पर इस कला में महारत हासिल की है.
मजेदार प्रतियोगिता से शुरू हुई ये अनोखी यात्रा
सुमति वर्मन ने लोकल18 को बताया कि इस अनोखी यात्रा की शुरुआत एक मजेदार प्रतियोगिता से हुई थी. उस समय वे मार्शल आर्ट की ट्रेनिंग ले रहे थे. दोस्तों के बीच एक शर्त लगी थी कि जो व्यक्ति नारियल को सिर, दांत या किसी अलग तरीके से फोड़ देगा, उसे पैसे नहीं देने होंगे, जबकि असफल होने वाले को पूरी राशि चुकानी पड़ेगी. इसी चुनौती को स्वीकार करते हुए उन्होंने पहली बार नारियल फोड़ने का प्रयास किया. शुरुआत में यह केवल पैसे बचाने का एक तरीका था, लेकिन धीरे-धीरे यह उनकी विशेष पहचान बन गई.
अबतक फोड़ चुके हैं 100 नारियल
उन्होंने बताया कि तब से लेकर अब तक वे करीब 100 नारियल सिर से फोड़ चुके हैं. हालांकि बीच में कुछ समय का अंतराल भी आया, लेकिन अभ्यास और आत्मविश्वास ने उन्हें इस कला से जोड़े रखा. सुमति के अनुसार मार्शल आर्ट केवल हाथ-पैर चलाने की कला नहीं है, बल्कि यह शरीर के हर हिस्से को मजबूत और नियंत्रित बनाने की एक विधा है. लगातार प्रशिक्षण के कारण शरीर की सहनशक्ति और मानसिक मजबूती दोनों विकसित होती हैं.
पांच महीने का किया विशेष अभ्यास
आगे कहा कि नारियल सामान्य वस्तु नहीं है. इसकी कठोरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि एक नारियल की मजबूती कई ईंटों के बराबर मानी जाती है. ऐसे में इसे सिर से फोड़ना आसान काम नहीं है. इसके लिए उन्होंने लगभग चार से पांच महीने तक विशेष अभ्यास किया था. इसके बाद ही उन्होंने वास्तविक प्रदर्शन शुरू किया.
इस तरह का प्रदर्शन जोखिम भरा
हालांकि वे यह भी स्वीकार करते हैं कि इस तरह का प्रदर्शन जोखिम भरा होता है. बिना उचित प्रशिक्षण के इसे करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए. उनका मानना है कि किसी भी कठिन कार्य को सही तकनीक, अनुशासन और लगातार अभ्यास के बल पर संभव बनाया जा सकता है. आज सुमति वर्मन का यह अनोखा कारनामा लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है. उनकी मेहनत तथा समर्पण की मिसाल पेश कर रहा है.
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मैंने अपने 12 वर्षों के करियर में इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम किया है। मेरा सफर स्टार न्यूज से शुरू हुआ और दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर डिजिटल और लोकल 18 तक पहुंचा। रिपोर्टिंग से ले…और पढ़ें