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ममता बनर्जी के बाद अब उद्धव ठाकरे की बारी…’ऑपरेशन टाइगर’ के नाम...


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Maharashtra Politics: 8 जून 2026 को देश की राजधानी दिल्‍ली में इंडिया गठबंधन के घटक दलों की अहम बैठक हुई. पश्मि बंगाल विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी की करारी हार का साया इस मीटिंग में साफतौर पर दिखा. टीएमसी में टूट से जूझ रहीं ममता बनर्जी ने पहली बार खुले तौर पर कांग्रेस के लीडरशिप को स्‍वीकार किया. बंगाल में चल रहा राजनीतिक घमासान अभी थमा भी नहीं कि महाराष्‍ट्र में ‘ऑपरेशन टाइगर’ की गूंज सुनाई देने लगी है. अपने सांसदों को पार्टी में जोड़कर रखने के लिए उद्धव ठाकरे मातोश्री में आज अहम बैठक करने जा रहे हैं.

ममता के बाद अब उद्धव की बारी...'ऑपरेशन टाइगर' के नाम से छूट रही कंपकंपीZoom

महाराष्‍ट्र में ‘ऑपरेशन टाइगर’ की चर्चा ने जोर पकड़ रखी है. उद्धव ठाकरे ने किसी भी तरह की टूट से अपनी पार्टी को बचाने के लिए सभी 9 सांसदों की मातोश्री में बैठक बुलाई है. (फाइल फोटो/Reuters)

Maharashtra Politics: महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर सियासी हलचल तेज हो गई है. पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस के नेताओं को लेकर लगातार चल रही अटकलों के बीच अब शिवसेना (यूबीटी) भी संभावित टूट चर्चाओं के केंद्र में आ गई है. ‘ऑपरेशन टाइगर’ नाम से चर्चित राजनीतिक कवायद की अटकलों के बीच शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने अपने सभी 9 सांसदों को रविवार को मातोश्री में तलब किया है. इस बैठक को महज एक नियमित संगठनात्मक समीक्षा नहीं, बल्कि पार्टी के भीतर बढ़ती बेचैनी और संभावित राजनीतिक संकट से जोड़कर देखा जा रहा है.

सूत्रों के अनुसार, शिवसेना (यूबीटी) के 7 सांसदों के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के संपर्क में होने की चर्चाओं ने पार्टी नेतृत्व की चिंता बढ़ा दी है. यही वजह है कि उद्धव ठाकरे ने सभी सांसदों को मातोश्री पहुंचने का निर्देश दिया है. जो सांसद किसी कारणवश मौजूद नहीं हो पाएंगे, उन्हें वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बैठक में शामिल किया जाएगा. दरअसल, महाराष्ट्र में 2022 में शिवसेना के विभाजन और एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में हुए बड़े राजनीतिक घटनाक्रम के बाद से उद्धव ठाकरे लगातार संगठन को एकजुट रखने की चुनौती का सामना कर रहे हैं. ऐसे में यदि सांसदों के स्तर पर भी किसी प्रकार की असंतुष्टि या संपर्क की खबरें सामने आती हैं तो उसका राजनीतिक महत्व काफी बढ़ जाता है.

मातोश्री में बैठक डर का नतीजा?

हालांकि, पार्टी नेतृत्व इन अटकलों को सार्वजनिक तौर पर खारिज कर रहा है. शिवसेना (यूबीटी) के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत ने कहा कि सांसदों की बैठक पार्टी की नियमित प्रक्रिया का हिस्सा है. उनके मुताबिक जिस तरह समय-समय पर विधायकों की बैठकें होती हैं, उसी तरह सांसदों के साथ भी संगठनात्मक चर्चा की जाती है. राउत ने दावा किया कि पिछले दो वर्षों से ऑपरेशन टाइगर की बातें की जा रही हैं, लेकिन ऐसा कोई अभियान अब तक अस्तित्व में नहीं आया. इसके बावजूद राजनीतिक गलियारों में सवाल उठ रहे हैं कि यदि सब कुछ सामान्य है तो फिर अचानक सभी सांसदों की बैठक बुलाने की आवश्यकता क्यों पड़ी. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बैठक केवल उपस्थिति दर्ज कराने का कार्यक्रम नहीं, बल्कि सांसदों की निष्ठा और संगठनात्मक प्रतिबद्धता को परखने का अवसर भी हो सकती है.

एकनाथ शिंदे की पार्टी ने किसी भी तरह का ऑपरेशन चलाने की बात से इनकार किया है. हालांकि, पार्टी नेता का कहना है कि उद्धव गुट के कई नेता उनके संपर्क में हैं.

शिवसेना के कई सांसद शिंदे के संपर्क में!

दूसरी ओर, शिंदे गुट भी इन चर्चाओं को पूरी तरह नकार नहीं रहा है. शिंदे गुट के वरिष्ठ नेता और कैबिनेट मंत्री संजय शिरसाट ने कहा है कि उनकी ओर से कोई ऑपरेशन टाइगर नहीं चलाया जा रहा, लेकिन शिवसेना (यूबीटी) के कई नेता और सांसद विकास कार्यों तथा अन्य मुद्दों को लेकर उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के संपर्क में हैं. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि भविष्य में किसी नेता या सांसद के पार्टी में आने का सवाल उठता है तो अंतिम फैसला पार्टी प्रमुख एकनाथ शिंदे ही करेंगे.

उद्धव ठाकरे के नेतृत्‍व की परीक्षा

उधर, शिवसेना (यूबीटी) के प्रवक्ता आनंद दुबे ने भाजपा और महायुति सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि ऑपरेशन टाइगर की बातें 2024 से सुनाई जा रही हैं. उन्होंने सवाल उठाया कि पूर्ण बहुमत वाली सरकार को विपक्षी दलों को तोड़ने की जरूरत क्यों पड़ रही है. महाराष्ट्र की राजनीति में पिछले कुछ वर्षों के घटनाक्रम को देखते हुए किसी भी तरह की राजनीतिक अटकल को पूरी तरह नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. यही वजह है कि मातोश्री में होने वाली यह बैठक सिर्फ एक संगठनात्मक कार्यक्रम नहीं, बल्कि उद्धव ठाकरे के नेतृत्व की पकड़ और सांसदों की एकजुटता की परीक्षा के रूप में भी देखी जा रही है. आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि ऑपरेशन टाइगर केवल राजनीतिक अफवाह है या फिर महाराष्ट्र की राजनीति में किसी नए समीकरण की प्रस्तावना.

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Manish Kumar

बिहार, उत्‍तर प्रदेश और दिल्‍ली से प्रारंभिक के साथ उच्‍च शिक्षा हासिल की. झांसी से ग्रैजुएशन करने के बाद दिल्‍ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में PG डिप्‍लोमा किया. Hindustan Times ग्रुप से प्रोफेशनल कॅरियर की शु…और पढ़ें



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