बेंगलुरु. केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए रविवार को आरोप लगाया कि वह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केंद्र सरकार को घेरने की कोशिश में भारत एवं उसके लोगों की उपलब्धियों को ‘कमतर’ आंकते हैं. सीतारमण ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी कोविड-19 वैश्विक महामारी और पश्चिम एशिया में संघर्ष जैसे बड़े संकटों के दौरान भी भारत की उपलब्धियों को ‘नजरअंदाज’ करते हैं. उन्होंने कहा कि देश के सामने ऐसा कोई संकट नहीं है, जैसा राहुल गांधी पेश कर रहे हैं.
उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के शासन के 12 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में यहां आयोजित ‘विकसित भारत संकल्प समावेश’ में पार्टी पदाधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा, ‘लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष जब भी बोलते हैं, तो हर चीज की केवल आलोचना करते हैं और भारत के लोगों की उपलब्धियों को कमतर आंकते हैं. उन्हें लगता है कि ऐसा करके वह प्रधानमंत्री मोदी या केंद्र सरकार को कमतर दिखा रहे हैं.’
सीतारमण ने कहा कि राहुल गांधी लगातार कहते रहते हैं कि अगले कुछ सप्ताह में सब कुछ ढह जाएगा. उन्होंने कहा कि नेता प्रतिपक्ष बार-बार कहते हैं कि कोई बड़ा संकट आने वाला है, लेकिन भारत के सामने ऐसा कोई संकट नहीं है. उन्होंने कहा, ‘इसके विपरीत, तिमाही दर तिमाही और साल दर साल भारत सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था बना हुआ है.’ केंद्रीय मंत्री सीतारमण ने कहा कि भारत के सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था होने की बात सरकार नहीं कह रही, बल्कि सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के आंकड़े और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) भी यही कहते हैं.
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि कांग्रेस नेता के बार-बार केवल आलोचना करने से आम नागरिकों के बीच देश की आर्थिक स्थिति को लेकर गलत धारणा बन सकती है. उन्होंने कहा, ‘इसके बावजूद नेता प्रतिपक्ष और उनकी पार्टी भारत को कमतर दिखाने में लगे हैं. वे लोगों को यह विश्वास दिलाने की कोशिश करते हैं कि भारत संकट में है. पश्चिम एशिया में संकट और होर्मुज जलडमरूमध्य में बाधाओं के बावजूद भारत आगे बढ़ रहा है.’ सीतारमण ने ईंधन आपूर्ति और वैश्विक व्यापार पर भू-राजनीतिक तनाव के असर को समझाते हुए कहा कि चुनौतियां केवल कच्चे तेल और एलपीजी की कीमतों में उतार-चढ़ाव तक सीमित नहीं हैं.
उन्होंने कहा, ‘इन चुनौतियों का असर केवल कच्चे तेल और एलपीजी की कीमतों पर ही नहीं, बल्कि वैश्विक जहाजरानी पर भी पड़ता है. जहाजरानी कंपनियां संघर्ष वाले क्षेत्रों से पोत भेजने में हिचकिचाती हैं. पोतों पर हमले का खतरा होने के कारण बीमा प्रीमियम बढ़ जाता है. पोत खाली हो या कच्चा तेल लेकर जा रहा हो, बीमा लागत काफी बढ़ जाती है और देश तक आपूर्ति पहुंचाने के लिए इन लागतों का भुगतान आखिरकार करना पड़ता है.’ उन्होंने कहा कि इन वैश्विक चुनौतियों के बावजूद प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने आपूर्ति में कोई बाधा नहीं आने दी.
सीतारमण ने कहा, ‘दुर्भाग्य से, नेता प्रतिपक्ष को इनमें से कोई बात मायने रखती नहीं दिखती.’ उन्होंने भाजपा कार्यकर्ताओं से सरकार की उपलब्धियों का संदेश लोगों तक पहुंचाने का आह्वान करते हुए कहा कि ‘विकसित भारत संकल्प समावेश’ एक बड़े राष्ट्रीय आंदोलन का हिस्सा है. उन्होंने कहा, “भारत ने 1947 में अपनी आजादी के लिए संघर्ष किया. वह एक बड़ा आंदोलन था-स्वतंत्रता आंदोलन. आर्थिक स्वतंत्रता, आत्मसम्मान, आत्मनिर्भरता और सच्चे स्वराज को हासिल करने के लिए हमें विकसित भारत की दिशा में काम करना होगा इसलिए यह ‘संकल्प समावेश’ उस आंदोलन के प्रति प्रतिबद्धता है. हम सभी को इसमें भाग लेना होगा.”
सीतारमण ने कहा कि मोदी के नेतृत्व में भाजपा की 12 वर्ष की यात्रा विकास और कल्याण की यात्रा रही है. उन्होंने बहुआयामी गरीबी में कमी, नल जल कनेक्शन के विस्तार, स्वच्छता कवरेज, मुफ्त एलपीजी कनेक्शन और खाद्य सुरक्षा कार्यक्रमों का उल्लेख किया. उन्होंने कहा, “25 करोड़ भारतीय बहुआयामी गरीबी से बाहर आए हैं. अत्यधिक गरीबी 2013-14 में 29.17 प्रतिशत से घटकर लगभग 11.28 प्रतिशत रह गई है. ग्रामीण स्वच्छता कार्यक्रमों के तहत 12 करोड़ घरेलू शौचालय बनाए गए हैं और लगभग सभी तक यह सुविधा पहुंचाई गई.”
सीतारमण ने शासन व्यवस्था में बदलावों का उल्लेख करते हुए जन धन खातों, आधार और मोबाइल कनेक्टिविटी पर आधारित डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि भारत में अब 58 करोड़ जन धन खाते, 144 करोड़ आधार पहचान और 125 करोड़ मोबाइल कनेक्शन हैं और ‘यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस’ (यूपीआई) डिजिटल लेनदेन का वैश्विक मॉडल बन गया है. सीतारमण ने इन आरोपों को खारिज किया कि केंद्र ने कर्नाटक की अनदेखी की है. उन्होंने कर हस्तांतरण, अनुदान और अवसंरचना निवेश का हवाला दिया.
कर्नाटक से राज्यसभा सदस्य सीतारमण ने कहा, “कर्नाटक सरकार अक्सर दावा करती है कि केंद्र राज्य को उसका उचित हिस्सा नहीं दे रहा है. आइए तथ्यों को देखें. 2014 से 2026 के बीच कर्नाटक को कर हस्तांतरण के रूप में लगभग चार लाख करोड़ रुपये मिले जो 2014 से पहले की तुलनात्मक अवधि में मिले 82,000 करोड़ रुपये से पांच गुना अधिक है.” उन्होंने कहा कि 2014 से 2026 के बीच कर्नाटक को सहायता अनुदान के रूप में लगभग 2.71 लाख करोड़ रुपये मिले और राज्य को केंद्र की 50 साल की ब्याज-मुक्त ऋण योजना के तहत 18,000 करोड़ रुपये से अधिक की राशि भी मिली है.
सीतारमण ने 2047 के लक्ष्य का उल्लेख करते हुए कहा कि विकसित भारत के निर्माण की जिम्मेदारी केवल सरकार पर नहीं छोड़ी जा सकती. उन्होंने कहा, “2047 आने में हमारे पास केवल 21 वर्ष बचे हैं. ऐसा लग सकता है कि इसमें समय है लेकिन ऐसा नहीं है. भारत को अधिक नवोन्मेष की जरूरत है. कर्नाटक भारत की नवोन्मेष राजधानी है. इसने एयरोस्पेस विकास, रक्षा विनिर्माण और जैव प्रौद्योगिकी में नेतृत्व किया है इसलिए जिम्मेदारी केवल सरकार पर नहीं छोड़ी जा सकती.” उन्होंने कहा, “हम सभी को स्वयं को प्रतिबद्ध करना होगा, ताकि ‘सबका साथ, सबका विकास’ भारत को 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य तक पहुंचाने में मदद करे.”