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शिक्षा को जिंदगी और आर्थिक स्थिति में बदलाव का सबसे बड़ा माध्यम है। लेकिन राजधानी रांची के मोरहाबादी की रहने वाली दो बहनों की कहानी अलग है। रांची यूनिवर्सिटी से उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाली शोभा कश्यप और आरती कश्यप शहीद चौक स्थित फुटपाथ पर सब्जियां और फल बेचकर परिवार का गुजारा कर रही हैं। मोरहाबादी में अपना घर होने के बावजूद परिवार के पास आमदनी का कोई स्थायी साधन नहीं है। पिता यूनिवर्सिटी में कर्मचारी थे, लेकिन उनके निधन के बाद परिवार आर्थिक संकट में घिर गया। मां के निधन के बाद दोनों बहनों ने घर की जिम्मेदारी संभाली और सम्मान के साथ जीवनयापन के लिए संघर्ष का रास्ता चुना। भाई की नौकरी, वेतन रुका परिवार के भाई को अनुकंपा के आधार पर तत्कालीन रांची कॉलेज, वर्तमान डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय में नौकरी मिली। परिजनों के अनुसार, पारिवारिक परिस्थितियों के कारण नियमित उपस्थिति प्रभावित हुई, जिससे वेतन रुक जाने की स्थिति बनी। इसका असर पूरे परिवार की आर्थिक स्थिति पर पड़ा है। अब बड़ा सवाल यह है कि उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बाद भी दो बहनों को जीविका के लिए फुटपाथ का सहारा लेना पड़ रहा है। शिक्षा और रोजगार के बीच की दूरी कम करना आज की सबसे बड़ी जरूरत है। नियमित आय नहीं होना बड़ी चुनौती : मोरहाबादी स्थित घर में रहने वाली दोनों बहनों के सामने सबसे बड़ी चुनौती नियमित आय की है। सब्जी और फल बेचने से होने वाली कमाई सीमित है। कई बार बिक्री अच्छी होती है तो कई बार पूरा दिन इंतजार में गुजर जाता है। ऐसे में ट्यूशन की आय भी घर चलाने का सहारा बनती है। बताती है कि भगवान पर भरोसा है, एक दिन किस्मत बदलेगी। पिता के निधन के बाद आर्थिक मुश्किलें बढ़ी पिता अशोक कुमार कश्यप रांची यूनिवर्सिटी में स्टॉफ थे। वर्ष 2007 में उनके निधन के बाद परिवार पर आर्थिक संकट गहराया। इसके बाद मां भी बीमार रहने लगी। मां का निधन लेकिन वर्ष 2017 में हुआ। इसके बाद परिवार की कमर तोड़ दी। इसके बाद दोनों बहनें ही घर संभाल रही हैं। आज वे सब्जियां और फल बेचने के साथ-साथ ट्यूशन भी पढ़ाती हैं। दोनों बहनों का कहना है कि उन्होंने बीएड प्रवेश परीक्षा पास की थी। लेकिन आर्थिक अभाव के कारण नामांकन नहीं करा सकीं।
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