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झारखंड मंत्रालय परिसर से सोमवार को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने नशे के विरुद्ध राज्यव्यापी जागरूकता अभियान का शुभारंभ किया। इस दौरान राज्य सरकार ने झारखंड को नशामुक्त बनाने के अपने संकल्प को दोहराया। वहीं, अंतरराष्ट्रीय और अंतरराज्यीय ड्रग्स नेटवर्क पर निर्णायक प्रहार करने के लिए पुलिस मुख्यालय ने एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (एएनटीएफ) का व्यापक पुनर्गठन किया है। अब यह फोर्स पूरे राज्य में स्वतंत्र रूप से कार्रवाई करने, सीधे केस दर्ज करने और तस्करों को गिरफ्तार कर जेल भेजने में सक्षम होगी। पुलिस मुख्यालय ने एएनटीएफ को पहले की तुलना में कहीं अधिक अधिकार और संसाधन दिए हैं। -शेष पेज 9 पर एक हफ्ते में जारी होगा टोल-फ्री नंबर, मुखबिरों को इनाम एडीजी (सीआईडी) मनोज कौशिक ने कहा कि मादक पदार्थों की तस्करी और अवैध कारोबार पर रोक लगाने के लिए पुलिस जल्द ही एक टोल-फ्री नंबर जारी करेगी। अगले एक सप्ताह के भीतर इसे सार्वजनिक कर दिया जाएगा। इस नंबर पर कोई भी व्यक्ति नशे के कारोबार, अफीम की खेती या तस्करों से जुड़ी सूचना दे सकेगा। सूचना देने वाले व्यक्ति की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी। सूचनादाता को एक विशेष कोड दिया जाएगा, जिसके आधार पर जब्त मादक पदार्थों की मात्रा और कीमत के अनुसार उसे इनाम की राशि उपलब्ध कराई जाएगी। गांजा से लेकर ब्राउन शुगर तक बड़ी बरामदगी पिछले तीन वर्षों के दौरान पुलिस ने बड़ी मात्रा में गांजा, अफीम, ब्राउन शुगर, हेरोइन और डोडा जब्त किया है। वर्ष 2024 में गांजा, अफीम और ब्राउन शुगर की सबसे अधिक बरामदगी दर्ज की गई। झारखंड जगुआर का असॉल्ट ग्रुप भी शामिल एएनटीएफ को केवल कानूनी अधिकार ही नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर कार्रवाई की ताकत भी दी गई है। नक्सल विरोधी अभियानों में अहम भूमिका निभाने वाले झारखंड जगुआर (एसटीएफ) का एक पूरा असॉल्ट ग्रुप इसमें शामिल किया गया है। इस ग्रुप में 40 चयनित और आधुनिक हथियारों से लैस पुलिसकर्मी रहेंगे। रांची, चतरा, खूंटी, लातेहार और पलामू समेत कई जिलों में अफीम की खेती और तस्करी बड़े पैमाने पर होती है। राज्य में नशे के कारोबार के खिलाफ लगातार अभियान चलाए जा रहे हैं। वर्ष 2023 से मार्च 2026 तक कुल 2,325 मामले दर्ज किए गए और 3,149 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। इस अवधि में करीब 412 करोड़ रु. मूल्य के मादक पदार्थ जब्त हुए।
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