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घर के आंगन और छत पर गमलों में ताजी सब्जियां उगाई जा सकती हैं. कृषि विशेषज्ञ डॉ. दिलीप पांडे के अनुसार, मिट्टी में खाद मिलाकर टमाटर, बैंगन और लौकी जैसी फसलें आसानी से तैयार होती हैं. पौधों को तेज धूप और गर्म हवाओं से बचाना जरूरी है. 50 दिनों में फल आने लगते हैं.
पलामूः बदलते दौर में जहां लोग शहरों में अपना आशियाना बना रहे हैं. वहीं लोग अपने घरों में ही ताजी और रसायनमुक्त सब्जियां उगाने की ओर तेजी से आकर्षित हो रहे हैं. जहां सीमित जगह होने के बावजूद गमलों में सब्जियों की खेती करके परिवार की जरूरत पूरी की जा सकती है. जिसकी खेती उचित देखभाल और संतुलित पोषण का ध्यान रखा जाए तो गमले में भी अच्छी गुणवत्ता वाली सब्जियां आसानी से उगाई जा सकती हैं.
कृषि विशेषज्ञ डॉ. दिलीप पांडे ने लोकल18 को बताया कि गमलों में टमाटर, बैंगन, मिर्च, भिंडी, लौकी, नेनुआ, करेला और अन्य लत्तर वर्गीय सब्जियों की खेती सफलतापूर्वक की जा सकती है. जिसके लिए इस गर्मी के मौसम में पूर्व और उत्तर दिशा की दीवारों के पास गमले रखना अधिक उपयुक्त माना जाता है. इन स्थानों पर सीधी धूप अपेक्षाकृत कम पड़ती है और गर्म हवाओं का प्रभाव भी कम रहता है, जिससे पौधों की बढ़वार बेहतर होती है. जबकि दक्षिण और पश्चिम दिशा की दीवारों के पास गमले रखने से बचना चाहिए, क्योंकि इन दिशाओं में तेज धूप और गर्म हवा का असर अधिक होता है, जिससे पौधों को नुकसान पहुंच सकता है.
खेती से पहले मिट्टी तैयार करना जरूरी
उन्होंने कहा कि गमले में खेती शुरू करने से पहले मिट्टी को अच्छी तरह तैयार करना जरूरी है. मिट्टी भरते समय एक मुट्ठी डीएपी, थोड़ी मात्रा में यूरिया और पोटाश मिलाने के साथ तीन से चार मुट्ठी वर्मी कम्पोस्ट डालना लाभदायक होता है. ताकि पौधों को आवश्यक पोषक तत्व मिलते हैं और उनकी बढ़वार तेजी से हो सके. बीज की बुआई के बाद गमले में नियमित सिंचाई और उचित देखरेख करने पर पौधे स्वस्थ रहते हैं तथा उत्पादन भी अच्छा मिलता है.
उन्होंने यह भी कहा कि भीषण गर्मी के मौसम में पौधों को तेज धूप से बचाने के लिए नेट शेड का उपयोग किया जा सकता है. इससे पौधों को अनुकूल वातावरण मिलता है और उनकी वृद्धि प्रभावित नहीं होती. गमले में उगाई गई अधिकांश सब्जियों में 40 से 50 दिनों के भीतर फूल और फल आने शुरू हो जाते हैं. यही कारण है कि कम जगह में भी लोग आसानी से ताजी सब्जियों का उत्पादन कर सकते हैं.
उन्होंने बताया कि यदि पौधों में किसी प्रकार का रोग या कीट दिखाई दे तो शुरुआती अवस्था में उसे हाथों से हटाया जा सकता है. समय पर निगरानी रखने से रासायनिक दवाओं की आवश्यकता भी कम पड़ती है. इस तरह थोड़ी सी मेहनत और सही तकनीक अपनाकर घर की छत, आंगन या बालकनी में गमले के माध्यम से पौष्टिक एवं ताजी सब्जियों का उत्पादन किया जा सकता है.
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मीडिया में 6 साल का अनुभव है. करियर की शुरुआत ETV Bharat (बिहार) से बतौर कंटेंट एडिटर की थी, जहां 3 साल तक काम किया. पिछले 3 सालों से Network 18 के साथ हूं. यहां बिहार और झारखंड से जुड़ी खबरें पब्लिश करता हूं.