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कोडरमा के केशरिया कलाकंद को मिला जीआई टैग:व्यापारियों में खुशी, रावलपिंडी से...




कोडरमा के केशरिया कलाकंद को अब जीआई टैग मिल गया है। इस अंतरराष्ट्रीय पहचान से स्थानीय कलाकंद कारोबारियों और लोगों में उत्साह का माहौल है। यह टैग उत्पाद को वैश्विक स्तर पर बढ़ावा देने में मदद करेगा। झारखंड के कुल 11 उत्पादों को जीआई टैग मिला है। इनमें कोडरमा का केशरिया कलाकंद के अलावा गोड्डा का भगैया सिल्क, सरायकेला खरसावां का कुचाई सिल्क, मुंडा ज्वेलरी और खूंटी क्षेत्र का बांस शिल्प प्रमुख हैं। इनके अतिरिक्त डोकरा क्राफ्ट, दुमका के चंदर बदोनी पपेट्स, तसर सिल्क और साड़ी, जादूपटुआ पेंटिंग, पंची साड़ी और झारखंड बेनाम हैंडीक्राफ्ट को भी यह टैग प्रदान किया गया है। नाबार्ड ने भी इस जीआई टैग की पुष्टि की है। टैग झारखंड के उत्पादों को प्रदान किया गया
इस प्रक्रिया के तहत चेन्नई से एक टीम ने झारखंड का दौरा किया और रांची में एक प्रेजेंटेशन लिया गया था। कई महीनों तक चले प्रारंभिक मूल्यांकन के दौरान कोई आपत्ति दर्ज नहीं होने के बाद यह टैग झारखंड के उत्पादों को प्रदान किया गया। जीआई जनरल कॉपी में प्रकाशित रिपोर्ट पर किसी अन्य दावे को स्वीकार नहीं किया गया। इस मान्यता से इन उत्पादों की सदियों पुरानी कला और आदिवासी विरासत को नई पहचान मिलेगी। यह न केवल इनकी पारंपरिक विधियों को पुनर्जीवित करेगा, बल्कि स्थानीय कारीगरों के लिए आय का एक महत्वपूर्ण स्रोत भी बनेगा। अंग्रेजों के शासनकाल से ही क्षेत्र की पहचान रहा है
कोडरमा के कलाकंद का इतिहास आजादी से पहले का है। यह अंग्रेजों के शासनकाल से ही क्षेत्र की पहचान रहा है। कोडरमा जिले के सबसे पुराने कलाकंद व्यापारी संदीप खेतान ने बताया कि देश के विभाजन के बाद पाकिस्तान के रावलपिंडी से आए भाटिया परिवार ने कोडरमा में इसकी शुरुआत की थी। भाटिया परिवार द्वारा ही इस मिठाई को पहली बार बनाया गया था, जिसे भाटिया स्वीट्स नामक दुकान में बेचा जाने लगा। हालांकि उनके द्वारा सफेद कलाकंद बनाया जाता था। समय बदला और कोडरमा के झुमरीतिलैया में आदर्श जलपान नामक एक अन्य होटल खुला, जिसे तीन पार्टनर्स मिलकर संचालित करते थे। 1975 में पहली बार बना केशरिया कलाकंद
संदीप खेतान बताते हैं कि सन 1975 में आदर्श जलपान के एक कारीगर ने कुछ प्रयोग करते हुए पहली बार केशरिया कलाकंद बनाया था। इसके बाद से इसकी मांग बढ़ने लगी और सन 1977 में आदर्श जलपान बंद होकर आनंद बिहार मिठाई दुकान खुली और तब से लेकर आज तक यह होटल संचालित है और यहां के केशरिया कलाकंद की मांग हर दिन बढ़ती ही जा रही है। केसरिया कलाकंद और सादा कलाकंद की झुमरी तिलैया शहर में कई दुकानें है। कलाकंद मिठाई से न सिर्फ भारत के ही लोग वाकिफ हैं, बल्कि विदेशों में झुमरी तिलैया का कलाकंद अपनी पहचान बनाए रखा है। अंग्रेजों के शासनकाल से झुमरी तिलैया शहर का यह कलाकंद और इसकी मिठास ब्रिटिश अधिकारीयो की पहली पसंद थी। संदीप खेतान बताते हैं कि आज भी जिनके रिश्तेदार विदेशों में रहते हैं, वे यहां से कलाकंद जरूर ले जाते हैं। संदीप खेतान की मानें तो यहाँ की आबो हवा कलाकंद के स्वाद को अनोखा बनता है। जी आई टैग मिलने से हर्ष, विश्व पटल पर मिली पहचान कलाकंद कारोबारी संदीप खेतान ने बताया कि कलाकंद को जी आई टैग मिलना बहुत बढ़ी उपलब्धि है। अब कोडरमा की पहचान यहां के केशरिया कलाकंद से होगी। जिस प्रांत या देश के लोग अब तक केशरिया कलाकंद से अनभिज्ञ थे, अब सबों तक इसकी विशेषता और इसके स्वाद की जानकारी पहुंचेगी। जीआइ (भौगोलिक संकेत) टैग एक विशेष चह्नि है, जो किसी उत्पाद को मिलता है। यह टैग किसी विशिष्ट भौगोलिक उत्पत्ति के लिए होता है और उसके कारण उत्पाद में अद्वितीय गुण या प्रतिष्ठा होती है। यह एक तरह का बौद्धिक संपदा अधिकार है, जो कृषि, प्राकृतिक या निर्मित वस्तुओं के लिए दिया जाता है। जीआइ टैग उत्पादकों को कानूनी सुरक्षा देता है और किसी भी व्यक्ति को उस उत्पाद के नाम का गलत इस्तेमाल करने से रोकता है।



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