रांची. झारखंड की राजनीति में आज का दिन बेहद सरगर्मियों भरा है. राज्य की दो राज्यसभा सीटों के लिए झारखंड विधानसभा में मतदान है शाम 4 बजे तक चलेगा. इसके तुरंत बाद मतों की गिनती यानी मतगणना की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी. राज्यसभा की दो सीटों के लिए मैदान में तीन दिग्गज प्रत्याशी आमने-सामने हैं ऐसे में मुकाबला बेहद दिलचस्प हो गया है. विधानसभा परिसर में सियासी शह-मात का खेल तेज है और सभी राजनीतिक दलों की निगाहें एक-एक वोट पर टिकी हुई हैं. वहीं, क्रॉस वोटिंग के डर और विधायकों की संभावित खरीद-फरोख्त को रोकने के लिए दोनों ही खेमों ने अपने विधायकों को कड़े पहरे में होटलों के कमरों में बंद कर रखा है, जिससे राजधानी रांची का सियासी पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया है.
त्रिकोणीय मुकाबले में फंसे तीन दिग्गज चेहरे
झारखंड की दो राज्यसभा सीटों के लिए मैदान में तीन उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमा रहे हैं. सत्ताधारी महागठबंधन (INDIA ब्लॉक) की तरफ से झामुमो (JMM) के बैद्यनाथ राम और कांग्रेस के प्रणव झा मैदान में हैं. वहीं दूसरी तरफ, निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में परिमल नथवाणी ने दावेदारी पेश की है, जिन्हें भारतीय जनता पार्टी (BJP) नीत एनडीए (NDA) गठबंधन का समर्थन मिलने की चर्चा है. सीट दो और प्रत्याशी तीन होने के कारण यह पूरी लड़ाई अब नंबर गेम और अंतरात्मा की आवाज (क्रॉस वोटिंग) पर आकर टिक गई है.
पहली सीट पर झामुमो सेफ, दूसरी पर ‘महामुकाबला’
विधानसभा के मौजूदा गणित के हिसाब से झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के प्रत्याशी बैद्यनाथ राम की जीत लगभग तय मानी जा रही है. सत्ता पक्ष के पास पहले उम्मीदवार को आसानी से जिताने के लिए पर्याप्त आंकड़े मौजूद हैं. असली और दिलचस्प लड़ाई दूसरी सीट के लिए फंसी हुई है, जहां कांग्रेस के प्रणव झा और परिमल नथवाणी के बीच कांटे की टक्कर देखी जा रही है. इस दूसरी सीट को हथियाने के लिए दोनों ही खेमे जोड़-तोड़ के गणित में जुटे हुए हैं.
किसका पलड़ा भारी? सीटों का सियासी गणित
झारखंड विधानसभा के मौजूदा संख्या बल के हिसाब से कांग्रेस के प्रणव झा और निर्दलीय परिमल नथवाणी के बीच कांटे की टक्कर है. झारखंड विधानसभा की मौजूदा स्थिति को देखें तो एक राज्यसभा सीट को जीतने के लिए न्यूनतम 27 प्रथम वरीयता के वोटों का जादुई आंकड़ा चाहिए. सदन के कुल संख्या बल के हिसाब से सत्ताधारी महागठबंधन के पास कुल 48 विधायकों का समर्थन है, जिसमें जेएमएम के 29, कांग्रेस के 17, राजद का 1 और भाकपा माले का 1 विधायक शामिल हैं. इसको देखते हुए जेएमएम के प्रत्याशी बैद्यनाथ राम 27 वोट पाकर पहली सीट पर बेहद मजबूत और सुरक्षित स्थिति में हैं.
असली पेच तो यहां फंस गया है…
असली पेच दूसरी सीट के लिए फंस गया है, जहां पहली सीट के बाद महागठबंधन के पास सिर्फ 21 सरप्लस (अतिरिक्त) वोट बचते हैं, जो कांग्रेस के प्रणव झा को जीत दिलाने के लिए जादुई आंकड़े (27) से 6 वोट कम हैं. वहीं दूसरी तरफ, मुख्य विपक्षी दल भाजपा (BJP) नीत एनडीए खेमे के पास कुल 32 विधायक हैं (भाजपा 29, आजसू 3). एनडीए अगर अपने सभी 32 वोट निर्दलीय प्रत्याशी परिमल नथवाणी के पक्ष में ट्रांसफर कर देता है, तो नथवाणी के पास सीधे 32 वोट हो जाएंगे, जो जीत के आंकड़े (27) से 5 अधिक हैं. इस सीधे गणित से परिमल नथवाणी का पलड़ा दूसरी सीट पर भारी दिखाई दे रहा है, बशर्ते सत्ता पक्ष के 21 वोटों के अलावा कांग्रेस विपक्षी खेमे के विधायकों में बड़ी सेंधमारी न कर दे.
क्रॉस वोटिंग का डर और होटलों में बाड़ेबंदी
इस चुनाव में विधायकों के टूटने और क्रॉस वोटिंग का खतरा इतना ज्यादा है कि चुनाव से ठीक पहले सभी प्रमुख दलों ने अपने विधायकों की किलाबंदी कर दी थी. झामुमो, कांग्रेस और भाजपा ने अपने-अपने विधायकों को रांची के अलग-अलग होटलों और सुरक्षित स्थानों पर ठहराया ताकि कोई बाहरी सेंधमारी न हो सके. मतदान से पहले मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की मौजूदगी में महागठबंधन के विधायकों का मॉक पोल भी कराया गया, जिसमें जेएमएम और कांग्रेस के रणनीतिकारों ने वोटों के समीकरण को परखा.
फाइव स्टार होटल बने अभेद्य किले
बता दें कि वोटिंग से दो दिन पहले ही जेएमएम-कांग्रेस महागठबंधन और बीजेपी ने अपने-अपने विधायकों के लिए रांची के आलीशान होटलों को बुक कर लिया था. इन होटलों को छावनी में तब्दील कर दिया गया, जहां किसी भी बाहरी व्यक्ति या मीडिया की एंट्री पूरी तरह बैन रही. विधायकों को अपने सगे-संबंधियों तक से मिलने की इजाजत नहीं दी गई. राजनीतिक दलों का साफ मानना है कि चुनाव के आखिरी पलों में विरोधी खेमा किसी भी तरह की सेंधमारी कर सकता है, इसलिए मतदान केंद्र (विधानसभा) तक पहुंचने से पहले विधायकों को एक ही छत के नीचे रखना सबसे सुरक्षित रणनीति है.
मोबाइल पर पहरा, मॉक पोल से परखी वफादारी
बता दें कि विधायकों की बाड़ेबंदी का मतलब केवल होटल में रुकना नहीं, बल्कि उन पर चौबीसों घंटे निगरानी रखना था. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने खुद महागठबंधन के विधायकों के साथ देर रात तक रणनीति बनाई और यह सुनिश्चित किया कि पहली और दूसरी प्राथमिकता के वोटों का गणित बिल्कुल न बिगड़े. इस बाड़ेबंदी के दौरान होटलों के भीतर बकायदा ‘मॉक पोल’ (फर्जी मतदान) का आयोजन किया गया. पार्टी के बड़े नेताओं ने हर एक विधायक के हाथ से बैलेट पेपर भरवाया ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वोटिंग के समय कोई तकनीकी गलती न हो.
शाम तक साफ होगी तस्वीर
झारखंड विधानसभा के कमरा नंबर 101 में मतदान की प्रक्रिया शाम 4 बजे जैसे ही वोटिंग समाप्त होगी, मतपेटियों को सील कर स्क्रूटनी की जाएगी. इसके बाद निर्वाचन आयोग की देखरेख में वोटों की गिनती शुरू होगी. कयास लगाए जा रहे हैं कि रात 8 से 9 बजे के बीच अंतिम परिणाम घोषित कर दिए जाएंगे. देखना दिलचस्प होगा कि इस सियासी शतरंज की बिसात पर कौन बाजी मारता है और दिल्ली के गलियारों तक का सफर तय करता है.