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कृषि एक्सपर्ट अवनीश पटेल ने लोकल 18 से कहा कि धान की खेती में सबसे अहम भूमिका नर्सरी की होती है. यदि नर्सरी स्वस्थ और मजबूत होगी, तो मुख्य खेत में फसल का विकास भी बेहतर होगा. वहीं नर्सरी में मौजूद रोग और कीट सीधे खेत तक पहुंच गए, तो पूरी फसल प्रभावित हो सकती है.
मध्य प्रदेश के सीधी जिले में बड़े पैमाने पर धान की खेती की जाती है. यहां किसान धान की कई उन्नत किस्मों की खेती करते हैं, जिनमें बासमती चावल की मांग सबसे अधिक रहती है. मानसून की दस्तक के साथ जिले में धान रोपाई का सीजन शुरू हो चुका है. ऐसे में किसान नर्सरी तैयार करने में जुट गए हैं, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि मुख्य खेत में रोपाई से पहले पौध की सही देखभाल बेहद जरूरी है.
कृषि एक्सपर्ट अवनीश पटेल ने लोकल 18 से कहा कि धान की खेती में सबसे अहम भूमिका नर्सरी की होती है. यदि नर्सरी स्वस्थ और मजबूत होगी, तो मुख्य खेत में फसल का विकास भी बेहतर होगा. वहीं नर्सरी में मौजूद रोग और कीट सीधे खेत तक पहुंच गए, तो पूरी फसल प्रभावित हो सकती है.
नर्सरी में छिपे कीट कर सकते हैं फसल बर्बाद
सीधी जिले के कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी डॉ. शैलेंद्र गौतम के अनुसार, धान की नर्सरी से कई हानिकारक कीट जैसे तना छेदक, सुंडी, पत्ती लपेटक और निमैटोड मुख्य खेत में पहुंच जाते हैं. ये कीट जड़ों के सहारे पौधों में फैलते हैं और बाद में उत्पादन पर गंभीर असर डालते हैं. कमजोर या रोगग्रस्त पौध लगाने से पैदावार कम हो जाती है और किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है.अवनीश पटेल के मुताबिक, किसानों को नर्सरी से केवल स्वस्थ और मजबूत पौधों का ही चयन करना चाहिए. पौध उखाड़ने से पहले नर्सरी वाले खेत में पर्याप्त पानी भर देना चाहिए. इससे मिट्टी मुलायम हो जाती है और पौध उखाड़ते समय जड़ें सुरक्षित रहती हैं. यदि सूखी मिट्टी से पौध निकाली जाएगी, तो जड़ें टूट सकती हैं, जिससे रोपाई के बाद पौधे सूखने लगते हैं.
अधिक दिनों तक नर्सरी में रह जाती
इसके अलावा कई बार पौध समय से अधिक दिनों तक नर्सरी में रह जाती है. उसकी लंबाई डेढ़ फुट तक पहुंच जाती है. ऐसी स्थिति में पौध के ऊपरी हिस्से पर छोटे-छोटे कीट जमा होने लगते हैं. इससे बचने के लिए कृषि विशेषज्ञ एक आसान उपाय बताते हैं. किसानों को सलाह दी गई है कि रोपाई से पहले बड़ी हो चुकी पौध का ऊपर का लगभग एक तिहाई हिस्सा काट दें. इससे पत्तियों पर मौजूद कीट मुख्य खेत में नहीं पहुंच पाते और फसल सुरक्षित रहती है. यदि किसान इन छोटी लेकिन जरूरी सावधानियों का पालन करें, तो लागत कम होगी और धान की बंपर पैदावार हासिल की जा सकती है.