मिट्टी, कागज और रंगों से आकार लेकर सरायकेला के छऊ मुखौटे ने दुनिया के मंचों तक अपनी पहचान बनाई है। इसी गौरवशाली परंपरा को दशकों से अपने हुनर और साधना से जीवित रखने वाले प्रसिद्ध छऊ मुखौटा शिल्पकार एवं गुरु सुशांत कुमार महापात्र को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने प्रतिष्ठित संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया। नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित अलंकरण समारोह में राष्ट्रपति के हाथों मिला यह सम्मान केवल एक कलाकार की उपलब्धि नहीं, बल्कि सरायकेला की समृद्ध छऊ परंपरा और पीढ़ियों से इस कला को संजोने वाले कलाकारों के लिए गौरव का क्षण है। वर्ष 20240-25 के लिए आयोजित समारोह में देशभर के 115 कलाकारों को फेलोशिप और राष्ट्रीय पुरस्कार प्रदान किए गए। इनमें गुरु सुशांत महापात्र का चयन सरायकेला की पारंपरिक मुखौटा कला की राष्ट्रीय पहचान को और मजबूत करता है। उनके सम्मानित होने की खबर से जिले के कलाकारों और कला प्रेमियों में खुशी है। गुरु सुशांत महापात्र की कला की पहुंच देश के शीर्ष नेतृत्व तक भी रही है। 2019 में उनके द्वारा तैयार भगवान श्रीकृष्ण का विशेष मुखौटा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेंट किया गया था। सरायकेला शैली के छऊ में मुखौटे केवल सजावटी वस्तु नहीं, बल्कि नृत्य की भाव-भंगिमा और पात्रों की पहचान को जीवंत करने वाला महत्वपूर्ण माध्यम है। एक मुखौटा, जिसने सरायकेला की पहचान को दुनिया तक पहुंचाया सम्मान ग्रहण करने के बाद गुरु सुशांत महापात्र ने इसे अपने गुरुओं और पूर्वजों को समर्पित किया। उन्होंने कहा कि छऊ मुखौटा, कला का संरक्षण और संवर्धन उनके जीवन का सबसे बड़ा उद्देश्य है। उनके लिए यह पुरस्कार व्यक्तिगत उपलब्धि से कहीं बढ़कर है। यह उस परंपरा का सम्मान है, जिसे कलाकारों की कई पीढ़ियों ने अपनी मेहनत, साधना और हुनर से जीवित रखा है। उनका मानना है कि राष्ट्रीय सम्मान से नई पीढ़ी इस कला से जुड़ेगी और सरायकेला का छऊ मुखौटा आने वाले समय में और व्यापक पहचान बनाएगा।
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