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झारखंड हाईकोर्ट में गुरुवार को गुमला से वर्ष 2018 से लापता हुई 6 वर्ष की बच्ची के मामले की सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान बच्ची का अब तक पता नहीं चलने और हाईकोर्ट के आदेश में संशोधन को लेकर सरकार की ओर से दाखिल हस्तक्षेप याचिका पर अदालत ने कड़ी नाराजगी
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- हाईकोर्ट में मामले की अगली सुनवाई 9 जुलाई को होगी
- 6 वर्षीया बच्ची लापता मामले में हाईकोर्ट ने जताई नाराजगी, मुख्य व गृह सचिव समेत डीजीपी तलब
इसके बाद सभी अधिकारी आनन-फानन में अदालत पहुंचे। सुनवाई के दौरान अदालत ने अधिकारियों से पूछा कि पूर्व आदेश में वर्ष 2018 से 2023 के बीच गुमला में पदस्थापित सभी एसपी की जांच पर संदेह जताते हुए उनकी कार्यशैली की जांच के निर्देश दिए गए थे, फिर उस आदेश को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती देने की आवश्यकता क्यों पड़ी? इस पर मुख्य सचिव की ओर से अदालत को बताया गया कि राज्य सरकार द्वारा दायर विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) वापस ले ली गई है। मुख्य सचिव की ओर से कहा गया कि इस तरह की जांच से अधिकारियों का मनोबल प्रभावित होता है।
यह सुनने के बाद अदालत ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि पुलिस अधिकारियों का दायित्व संवेदनशीलता और निष्पक्षता के साथ काम करना है। किसी मामले की जांच में गंभीरता नहीं बरती जाएगी और पीड़ितों को न्याय नहीं मिलेगा तो अदालत मूकदर्शक नहीं बनी रहेगी। अदालत ने कहा कि न्याय की गुहार लगाने वाले व्यक्ति को न्याय मिले और न्यायिक प्रक्रिया का पालन कराना उस आदेश का उद्देश्य है।
अदालत ने अपने पूर्व आदेश को बरकरार रखते हुए वर्ष 2018 से 2023 के बीच गुमला में पदस्थापित सभी एसपी की कार्यशैली और मामले की जांच के तौर- तरीके की जांच कराने का निर्देश दिया। इस दौरान राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि मामले की मुख्य आरोपी के नार्को टेस्ट की अनुमति निचली कोर्ट से मिल गई है। गुजरात में उसका नार्को टेस्ट होगा। अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई 9 जुलाई को निर्धारित की है।
राज्यकर्मियों के समान पेंशन पर बोला नगर निगम- हमारे पास पैसा ही नहीं
हाईकोर्ट में गुरुवार को नगर निगम कर्मियों को बकाये एरियर का भुगतान करने को लेकर दाखिल अवमानना याचिका पर सुनवाई हुई। जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने सुनवाई करते हुए निगम से पूछा कि सेवानिवृत कर्मियों के मामले में कोर्ट के आदेश का अनुपालन अब तक क्यों नहीं किया गया। इस पर निगम की ओर से बताया गया कि पैसे की कमी की वजह से अब तक आदेश का अनुपालन नहीं किया गया। इस पर अदालत ने नाराजगी जताते हुए कहा कि निगम की ओर से पूर्व में दाखिल किए शपथ पत्र में पेंशन और एरियर का भुगतान करने का जिक्र है, अब पैसे नहीं होने की बात कही जा रही है। दोनों में किस शपथपत्र को सही माना जाए।
सिटी एंकर