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Jamshedpur News: जमशेदपुर के चंदन पढ़ाई में खास नहीं थे और इसीलिए स्कूल के दिनों में पीछे की सीट पर बैठते थे और बैक बेंचर्स कहलाते थे. आगे जाकर चंदन ने अपने व्यवसाय को यही नाम दिया और ‘बैक बेंचर्स’ नाम से फूड कार्ट शुरू किया है. आज इस काम में वे अच्छी सफलता पा रहे हैं और पढ़ाई में खास न कर पाने वालों को प्रेरणा दे रहे हैं.
जमशेदपुर. जमशेदपुर के युवा चंदन की कहानी उन युवाओं के लिए प्रेरणा है, जिन्हें कभी उनकी पढ़ाई या कक्षा में प्रदर्शन के आधार पर कम आंका गया. बचपन से ही चंदन का पढ़ाई में ज्यादा मन नहीं लगता था. वह अक्सर दोस्तों के साथ क्लास की आखिरी बेंच पर बैठकर मस्ती किया करते थे. इसी वजह से स्कूल में उन्हें और उनके दोस्तों को ‘बैक बेंचर्स’ कहा जाता था.
आगे चलकर कुछ नहीं कर पाओगे
चंदन बताते हैं कि स्कूल के दिनों में कई बार शिक्षकों ने भी उन्हें यह कह दिया था कि ‘तुम लोग जिंदगी में कुछ नहीं कर पाओगे.’ उस समय ये बातें उन्हें जरूर बुरी लगती थीं, लेकिन उन्होंने इसे अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया. 12वीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने नौकरी की तलाश करने के बजाय खुद कुछ करने का फैसला किया.
बैक बेंचर्स नाम का स्टॉल
चंदन ने जमशेदपुर के जुबली पार्क के समीप ‘बैक बेंचर्स’ नाम से अपना चाइनीज फूड कार्ट शुरू किया. उन्होंने अपने स्कूल के दिनों की पहचान को ही अपने कारोबार की पहचान बना दिया. उनके कार्ट पर रोल, चाउमीन, मैगी, मोमोज के साथ-साथ मॉकटेल और कोल्ड कॉफी जैसे कई फूड आइटम लोगों को पसंद आ रहे हैं.
धीरे-धीरे बढ़े ग्राहक
चंदन का कहना है कि जब उन्होंने कारोबार शुरू करने का फैसला किया, तब कई लोगों ने उनका मजाक उड़ाया. कुछ लोगों को लगा कि पढ़ाई में पीछे रहने वाला यह लड़का आखिर क्या कर पाएगा. लेकिन चंदन ने किसी की बातों की परवाह नहीं की और मेहनत करते रहे. धीरे-धीरे उनके फूड कार्ट पर ग्राहकों की संख्या बढ़ने लगी और ‘बैक बेंचर्स’ नाम लोगों के बीच पहचान बनाने लगा.
केवल नंबरों से नहीं मिलती सफलता
चंदन कहते हैं कि ‘लोग मेरा मजाक उड़ाते थे, लेकिन मैंने तय कर लिया था कि एक दिन मैं सबको गलत साबित करके दिखाऊंगा.’ आज उनका यही जज्बा उनकी सबसे बड़ी ताकत है. उनका मानना है कि जिंदगी में सफलता सिर्फ अच्छे नंबर लाने से नहीं मिलती, बल्कि मेहनत, हुनर और अपने ऊपर भरोसा रखने से भी हासिल की जा सकती है.
स्कूल का नाम ही बन पहचान
चंदन की कहानी बताती है कि स्कूल में बैक बेंचर होना जिंदगी में पीछे रह जाने की निशानी नहीं है. अगर इंसान अपने हुनर को पहचानकर मेहनत करे और असफलताओं से सीखता रहे, तो वह अपनी अलग पहचान बना सकता है. कभी क्लास की आखिरी बेंच पर बैठने वाला चंदन आज उसी नाम ‘बैक बेंचर्स’ को अपने कारोबार की पहचान बनाकर आगे बढ़ रहा है.
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Raina Shukla is an experienced journalist and content professional with nearly two decades of experience in print and digital media. She holds a Master’s degree in Mass Communication and Journalism from Bundelk…
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