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पलामू टाइगर रिजर्व जो कि झारखंड का इकलौता टाइगर रिजर्व है. यहां जंगली जानवरों और स्थानीय लोगों को वाइल्ड लाइफ से जोड़ने के लिए कई कार्य जारी है. इसी पहल को लेकर नई दिल्ली में आयोजित एक प्रतिष्ठित समारोह में पालामू टाइगर रिजर्व की अभिनव पहल “हुनर से रोजगार” को SKOCH Final Award से सम्मानित किया गया.
पलामू टाइगर रिजर्व जो कि झारखंड का इकलौता टाइगर रिजर्व है. यहां जंगली जानवरों और स्थानीय लोगों को वाइल्ड लाइफ से जोड़ने के लिए कई कार्य जारी है. इसी पहल को लेकर नई दिल्ली में आयोजित एक प्रतिष्ठित समारोह में पालामू टाइगर रिजर्व की अभिनव पहल “हुनर से रोजगार” को SKOCH Final Award से सम्मानित किया गया. यह सम्मान समुदाय आधारित विकास और रोजगार सृजन के क्षेत्र में किए गए उत्कृष्ट कार्यों के लिए प्रदान किया गया. इस उपलब्धि से न केवल पलामू बल्कि पूरे झारखंड का गौरव बढ़ा है.
पलामू टाइगर रिजर्व अंतर्गत जन भागीदारी के बैनर तले एक कार्यक्रम आदिवासी, वनाश्रित और ग्रामीण समुदायों के युवाओं एवं महिलाओं को रोजगारोन्मुखी कौशल प्रशिक्षण प्रदान करने के उद्देश्य से शुरू किया गया है. इसके तहत विभिन्न क्षेत्रों में प्रशिक्षण देकर लाभार्थियों को रोजगार और स्वरोजगार से जोड़ा जाता है. जिससे रोजगार दिया जाता है.
बता दें कि हुनर से रोजगार को लेकर नई दिल्ली स्थित पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री, अगस्त क्रांति मार्ग में आयोजित समारोह में देशभर की कई नवाचार और जनहितकारी परियोजनाओं को सम्मानित किया गया. इनमें पलामू टाइगर रिजर्व की इस पहल ने अपनी अलग पहचान बनाई और निर्णायकों की विशेष सराहना प्राप्त की.
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इस कार्यक्रम में पुरस्कार समारोह में पालामू टाइगर रिजर्व की ओर से उप निदेशक (उत्तर) प्रजेश कांता जेना सहित विभाग के अन्य वनकर्मी उपस्थित रहे. उन्होंने इस सम्मान को स्थानीय समुदायों, वनकर्मियों और प्रशिक्षण प्राप्त युवाओं के संयुक्त प्रयासों का परिणाम बताया जो कि पलामू टाइगर रिजर्व की अनोखी पहल है.
डिप्टी डायरेक्टर प्रजेश कांत जैना ने बताया कि योजना के माध्यम से बड़ी संख्या में महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास किया गया है. प्रशिक्षण प्राप्त महिलाओं ने छोटे-छोटे उद्यम शुरू कर अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत की है. इससे परिवारों की आय बढ़ी है और महिलाओं का सामाजिक आत्मविश्वास भी मजबूत हुआ है.
इस योजना के तहत स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध होने से बाहर राज्यों में मजदूरी के लिए होने वाले पलायन में कमी आई है. महिलाएं आजीविका से जुड़कर आत्मनिर्भर बन रही है. वहीं युवाओं को अपने गांव और क्षेत्र में ही सम्मानजनक रोजगार मिलने लगा है, जिससे सामाजिक और आर्थिक स्थिति में सकारात्मक बदलाव देखने को मिला है.
आगे कहा कि ये सम्मान समुदाय आधारित संरक्षण, महिला सशक्तिकरण और आजीविका संवर्धन के क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों की राष्ट्रीय पहचान है. यह मॉडल वन संरक्षण और स्थानीय विकास को एक साथ आगे बढ़ाने का सफल उदाहरण बनकर उभरा है.