भारतन्यूज़ – टॉप हेडर
News Menu Bar

‘कट्टरता और नफरत अपने पास रखो’, अंदरूनी मसले पर अनाप-शनाप बोल रहे...


भारत और पाकिस्तान के बीच एक बार फिर राजनयिक तल्खी बढ़ गई है. पाकिस्तानी राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी द्वारा भारत के आंतरिक मामलों और धार्मिक स्थलों को लेकर दिए गए बयान पर भारत सरकार ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है. विदेश मंत्रालय (MEA) ने पाकिस्तानी राष्ट्रपति की टिप्पणियों को सिरे से खारिज करते हुए उन्हें पूरी तरह से अनुचित, हास्यास्पद और दुर्भावना से प्रेरित करार दिया है. भारतीय विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने शनिवार को स्पष्ट शब्दों में कहा कि पाकिस्तान को भारत के आंतरिक मामलों में दखल देने या टिप्पणी करने का कोई कानूनी या नैतिक अधिकार नहीं है.

वाराणसी की मस्जिद का जिक्र कर जरदारी ने दिया था बयान
दरअसल, यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब पाकिस्तानी राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने भारत में ऐतिहासिक मुस्लिम धार्मिक स्थलों को कथित रूप से ढहाए जाने और उन्हें लेकर दी जा रही धमकियों का मुद्दा उठाया. अपने बयान में जरदारी ने विशेष रूप से वाराणसी की मस्जिद गंज शहीदा का जिक्र किया जिसे उन्होंने लगभग 1,000 वर्ष पुरानी मस्जिद बताया. जरदारी ने भारत सरकार से ऐसी कार्रवाइयों को तुरंत रोकने का आग्रह करते हुए दावा किया था कि ये कदम भारत में सामाजिक विघटन और स्थायी अराजकता की स्थिति पैदा कर सकते हैं. इसके साथ ही उन्होंने अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा की अपील भी की थी.

पहले अपना काला इतिहास देखे पाकिस्तान
पाकिस्तानी राष्ट्रपति के इस राजनीतिक दांव पर भारत ने बिना देर किए बेहद सख्त और तीखा जवाब दिया. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने नई दिल्ली में मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए कहा कि पाकिस्तान का अपना मानवाधिकार रिकॉर्ड बेहद दयनीय और अंधकारमय रहा है, जो खुद वैश्विक स्तर पर हमेशा आलोचना का विषय बना रहता है. भारत ने आरोप लगाया कि पाकिस्तान में विभिन्न धर्मों के अल्पसंख्यकों (हिंदू, सिख, ईसाई आदि) को व्यवस्थित रूप से निशाना बनाने और उनका उत्पीड़न करने का एक लंबा और बदनाम इतिहास रहा है.

कट्टरता और नफरत की राजनीति का हिस्सा
भारतीय विदेश मंत्रालय ने साफ कहा कि ऐसी जमीनी हकीकत के बीच पाकिस्तानी राष्ट्रपति जरदारी का यह बयान केवल एक जानबूझकर किया गया राजनीतिक हमला है. भारत के अनुसार, यह पूरी तरह से पाकिस्तान की राष्ट्रीय नीतियों का हिस्सा है जो कट्टरता, पूर्वाग्रह और नफरत पर आधारित हैं. भारत ने पाकिस्तान को नसीहत दी है कि वह दूसरों के मामलों में झांकने के बजाय पहले अपने देश के भीतर अल्पसंख्यकों की बदहाल स्थिति और मानवाधिकारों के रिकॉर्ड को सुधारने पर ध्यान दे.

पाकिस्‍तान को भारत के जवाब से जुड़ी 5 मुख्य बातें

• MEA द्वारा बयान खारिज: भारत ने पाकिस्तानी राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी के बयान को पूरी तरह अनुचित, हास्यास्पद और बेतुका बताते हुए सिरे से खारिज कर दिया.

• आंतरिक मामलों में दखल: विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने स्पष्ट किया कि भारत के आंतरिक मामलों पर टिप्पणी करने का पाकिस्तान को कोई अधिकार (Locus Standi) नहीं है.

• वाराणसी की मस्जिद का मुद्दा: पाकिस्तानी राष्ट्रपति ने वाराणसी की करीब 1,000 साल पुरानी ‘मस्जिद गंज शहीदा’ का जिक्र कर भारत में अराजकता फैलने की बात कही थी.

• पाकिस्तान के मानवाधिकारों पर सवाल: भारत ने पलटवार करते हुए पाकिस्तान के खुद के बेहद खराब मानवाधिकार रिकॉर्ड और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर होने वाली उसकी किरकिरी को याद दिलाया.

• अल्पसंख्यकों के उत्पीड़न का आरोप: भारत ने कहा कि पाकिस्तान का इतिहास अपने ही देश में विभिन्न धर्मों के अल्पसंख्यकों को व्यवस्थित रूप से प्रताड़ित और निशाना बनाने का रहा है.

सवाल-जवाब

भारतीय विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तानी राष्ट्रपति की टिप्पणियों पर क्या आधिकारिक प्रतिक्रिया दी?

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने पाकिस्तानी राष्ट्रपति के बयानों को पूरी तरह खारिज करते हुए इन्हें ‘अनुचित’, ‘हास्यास्पद’ और ‘राजनीतिक हमला’ करार दिया. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को भारत के आंतरिक मामलों में बोलने का कोई अधिकार नहीं है.

पाकिस्तानी राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने भारत के किस ऐतिहासिक स्थल का विशेष रूप से उल्लेख किया था?

आसिफ अली जरदारी ने अपने बयान में विशेष रूप से वाराणसी की ‘मस्जिद गंज शहीदा’ का उल्लेख किया था, जिसे उन्होंने लगभग 1,000 साल पुरानी मस्जिद बताया और उसके ढहाए जाने की आशंका पर चिंता जताई थी.

भारत ने पाकिस्तान को उसके किस रिकॉर्ड की याद दिलाते हुए घेरा?

भारत ने पाकिस्तान को उसके खुद के बेहद खराब और दयनीय मानवाधिकार रिकॉर्ड की याद दिलाई. भारत ने कहा कि पाकिस्तान में विभिन्न धर्मों के अल्पसंख्यकों को व्यवस्थित रूप से निशाना बनाने और उनका उत्पीड़न करने का एक लंबा और बदनाम इतिहास रहा है.

भारत के अनुसार, पाकिस्तान के राष्ट्रपति का यह बयान किस नीति से प्रेरित है?

भारत के अनुसार, राष्ट्रपति जरदारी का यह बयान किसी वास्तविक चिंता से नहीं बल्कि पाकिस्तान की राष्ट्रीय नीतियों में शामिल कट्टरता, पूर्वाग्रह और भारत के प्रति नफरत फैलाने की राजनीति से प्रेरित है.



Source link

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top