शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) में मचे सियासी घमासान के बीच पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे अब पूरी तरह एक्शन मोड में नजर आ रहे हैं. छह सांसदों की संभावित बगावत और ‘ऑपरेशन टाइगर’ की चर्चाओं के बीच उद्धव ठाकरे ने मैदान में उतरकर सीधे कार्यकर्ताओं और संगठन को संभालने का फैसला किया है.
खबर है कि उद्धव ठाकरे 27, 28 और 29 जून को उन लोकसभा क्षेत्रों का दौरा करेंगे, जहां से बागी सांसद आते हैं. उनके कार्यक्रम में यवतमाल, परभणी, हिंगोली, धाराशिव और शिरडी शामिल हैं. माना जा रहा है कि यह दौरा पार्टी में संभावित टूट को रोकने और कार्यकर्ताओं का मनोबल बनाए रखने की रणनीति का हिस्सा है.
दिल्ली में बागियों की तैयारी, महाराष्ट्र में उद्धव का जवाब
एक तरफ उद्धव ठाकरे संगठन को एकजुट रखने की कवायद में जुट गए हैं, वहीं दूसरी तरफ बागी सांसद दिल्ली में अपनी ताकत दिखाने की तैयारी कर रहे हैं. सूत्रों के अनुसार, बागी सांसद आज प्रेस कॉन्फ्रेंस कर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को सौंपे गए पत्र, मुलाकात की तस्वीरें और वीडियो सार्वजनिक कर सकते हैं.
बताया जा रहा है कि सांसद अपने अलग होने के फैसले के पीछे की वजह भी जनता के सामने रखेंगे. उनका दावा है कि पार्टी नेतृत्व मूल विचारधारा से भटक गया है और इसी कारण उन्होंने अलग रास्ता चुना है.
एक बागी सांसद ने बढ़ाया सस्पेंस
ऑपरेशन टाइगर क्या है?
महाराष्ट्र की राजनीति में इन दिनों ‘ऑपरेशन टाइगर’ सबसे ज्यादा चर्चित शब्द बन गया है. माना जा रहा है कि एकनाथ शिंदे खेमे की रणनीति के तहत शिवसेना (यूबीटी) के सांसदों को अपने साथ लाने की कोशिश की जा रही है.
लोकसभा में शिवसेना (यूबीटी) के कुल नौ सांसद हैं, जिनमें से छह सांसदों के बागी रुख अपनाने की खबरें हैं. यदि ये सांसद आधिकारिक रूप से अलग होने का ऐलान करते हैं तो यह उद्धव ठाकरे के लिए 2022 की बगावत के बाद दूसरा बड़ा राजनीतिक झटका साबित हो सकता है.
बागियों पर कार्रवाई की तैयारी
उधर शिवसेना (यूबीटी) नेतृत्व भी बागी सांसदों के खिलाफ सख्त रुख अपनाने के संकेत दे चुका है. संसदीय दल की बैठक में अनुपस्थित रहने पर सांसदों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है. पार्टी की कोशिश है कि इन सांसदों के खिलाफ दल-बदल कानून के तहत कार्रवाई की जाए.
हालांकि बागी सांसद बेहद सावधानी से कदम बढ़ा रहे हैं. अब तक उन्होंने सार्वजनिक मंच पर एकनाथ शिंदे के साथ आने से परहेज किया है, ताकि उन पर स्वेच्छा से पार्टी छोड़ने का आरोप न लगे.
बागियों के गढ़ में उद्धव का शक्ति प्रदर्शन
सूत्रों के मुताबिक, उद्धव ठाकरे अपने दौरे के दौरान जिला प्रमुखों, स्थानीय पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के साथ अलग-अलग बैठकें करेंगे. उनका मकसद यह जानना है कि संगठन में असंतोष कितना गहरा है और आगे किसी नई टूट को कैसे रोका जाए.
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह दौरा सिर्फ डैमेज कंट्रोल नहीं बल्कि संगठन को यह संदेश देने की कोशिश भी है कि पार्टी नेतृत्व अभी भी सक्रिय है और मुकाबला करने के लिए तैयार है.
उद्धव ठाकरे के दौरे और बागी सांसदों की समानांतर राजनीतिक गतिविधियों ने एक नया सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या आने वाले दिनों में दोनों पक्ष खुलकर आमने-सामने आएंगे? फिलहाल महाराष्ट्र की राजनीति की नजरें दिल्ली में होने वाली बागी सांसदों की प्रेस कॉन्फ्रेंस और उद्धव ठाकरे के प्रस्तावित दौरे पर टिकी हैं. इन दोनों घटनाक्रमों से यह साफ हो सकता है कि शिवसेना (UBT) का अगला राजनीतिक अध्याय किस दिशा में जाने वाला है.