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स्वास्थ्य विभाग में दवा खरीद में बड़ी गड़बड़ी सामने आई है। विभाग ने रांची जिले में कम दरों वाले ई-टेंडर को दरकिनार कर जेम पोर्टल से 18 गुना तक ज्यादा कीमत में दवा की खरीदारी की। टेंडर में महज 84 पैसे में मिलने वाली ओफ्लॉक्सासिन टैबलेट 15.86 रुपए में तो ओनडानसेट्रॉन 4 एमजी टैबलेट 16 पैसे की जगह 2.90 रुपए में खरीदी। इससे सरकारी खजाने को लाखों रुपए की चपत लगी। भास्कर की पड़ताल में पता चला कि मल्टीविटामिन कैप्सूल, एम्लोडिपिन, ग्लाइमेपिराइड और अन्य दवाओं के लिए भी कई गुना ज्यादा भुगतान किया गया। सितंबर 2025 में हुए टेंडर में जिस दवा की दर 18 रुपए दी गई थी, जेम पोर्टल से उसी कंपनी को उस दवा का ऑर्डर दिया गया। जब टेंडर से सस्ते दर पर दवा उपलब्ध थी तो फिर महंगे दर पर इसकी खरीदारी की जरूरत क्यों पड़ी, इस सवाल पर रांची के जिला प्रोग्राम मैनेजर (डीपीएम) प्रवीन कुमार सिंह ने सरकारी नियमों का हवाला दिया। उन्होंने कहा-सरकार का नियम है कि खरीद प्रक्रिया जेम पोर्टल के माध्यम से की जाए। फिर ई-टेंडर में जिन कंपनियों ने कम रेट दिए थे, वे लगातार सप्लाई करने में असमर्थता जता रहे थे। कई बार कंपनियों को नोटिस भी दिया गया, लेकिन सप्लाई नहीं हुई। इसलिए मरीजों के हित को देखते हुए जेम पोर्टल से दवा की खरीद करनी पड़ी। कफ सिरप, नॉरफ्लॉक्स टीजेड में सबसे ज्यादा भुगतान पड़ताल में पता चला कि डेक्सट्रोमेथॉर्फन कफ सिरप की टेंडर दर 9.80 रुपए थी, जबकि खरीद 81 रुपए प्रति बोतल के हिसाब से हुई। केवल इस एक दवा में ही 10.64 लाख रुपए से अधिक का अतिरिक्त भुगतान किया गया। इसी तरह नॉरफ्लॉक्स टीजेड की खरीद में 12.77 लाख रुपए अतिरिक्त खर्च किए गए। पैरासिटामोल सिरप में 10.71 लाख रुपए और क्लोट्रिमाजोल क्रीम में 8.20 लाख रुपए से अधिक का अतिरिक्त भुगतान किया गया है। किस परिस्थिति में जेम पोर्टल से खरीद हुई, जानकारी नहीं: एमडी दवा खरीद पर ई-टेंडर प्रक्रिया अपनाने की छूट दी गई है, पर ई-टेंडर से रेट कॉन्ट्रैक्ट होने के बाद किस परिस्थिति में जेम पोर्टल से खरीद हुई, इसकी जानकारी नहीं है। जब तक पूरे मामले की जानकारी नही रहेगी, तब तक कुछ टिप्पणी नही कर सकूंगा। – शशिप्रकाश झा, एमडी, एनएचएम
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