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मुरादाबाद के कृषि वैज्ञानिक डॉक्टर दीपक मेहंदीरत्ता ने बताया कि मक्का की खेती जून जुलाई के मौसम में हमारे पश्चिम में उत्तर प्रदेश के क्षेत्र में की जा सकती है. पहली अच्छी बारिश के बाद बुवाई करने के बाद किसान साथियों को अच्छा लाभ मिलता है. इसके लिए 8 से 10 किलो बीज प्रति एकड़ के लिए ठीक माना जाता है. इसके अलावा बेबी कॉर्न बोते हैं तो 16 से 20 किलो बीज प्रति हेक्टेयर की आवश्यकता होती है. इसके अलावा स्वीट कार्न के लिए 6 से 8 किलो बीज प्रति हेक्टेयर की आवश्यकता होती है.
मुरादाबादः मुरादाबाद के किसान यदि मक्का की खेती करके अच्छा मुनाफा कमाना चाहते हैं तो वह जून-जुलाई में मक्का की खेती कर सकते हैं. यह समय मक्का की खेती के लिए उपयुक्त माना जाता है. इसके साथ ही मक्का की खेती करने से किसानों की आय में भी वृद्धि हो सकती है. क्योंकि मक्का की खेती करने पर सरकार द्वारा सब्सिडी भी दी जा रही है. इसलिए मुरादाबाद के किसान इस खेती को करके अच्छा मुनाफा भी कमा सकते हैं और सब्सिडी का लाभ भी ले सकते हैं. जिससे किसानों की आय में काफी वृद्धि हो सकती है.
अलग-अलग बीज की होती है आवश्यकता
मुरादाबाद के कृषि वैज्ञानिक डॉक्टर दीपक मेहंदीरत्ता ने बताया कि मक्का की खेती जून जुलाई के मौसम में हमारे पश्चिम में उत्तर प्रदेश के क्षेत्र में की जा सकती है. पहली अच्छी बारिश के बाद बुवाई करने के बाद किसान साथियों को अच्छा लाभ मिलता है. इसके लिए 8 से 10 किलो बीज प्रति एकड़ के लिए ठीक माना जाता है. इसके अलावा बेबी कॉर्न बोते हैं तो 16 से 20 किलो बीज प्रति हेक्टेयर की आवश्यकता होती है. इसके अलावा स्वीट कार्न के लिए 6 से 8 किलो बीज प्रति हेक्टेयर की आवश्यकता होती है. अलग-अलग वैरायटी के लिए अलग-अलग बीज और अलग-अलग माध्यम के लिए अलग-अलग बीज की आवश्यकता होती है. अगर हम हाइब्रिड मक्का लेते हैं तो उसके लिए हमें लाइन से लाइन की दूरी 60 से 70 सेमी रखनी होती है. इसके अलावा पौधे से पौधे की दूरी 20 से 25 सेंटीमीटर रखनी होती है.
ऐसे करें बुवाई
उन्होंने बताया कि बीज की बुवाई हम चार से पांच सेंटीमीटर गहराई पर करेंगे. इसके अलावा इस पेड़ नाली बनाकर बोते हैं तो यह और ज्यादा अच्छी रहती है. इसके साथ ही इसमें हमें 25 से 30 कुंटल तक की उपज मिल जाती है. इसके लिए हमको 30 से 50000 तक का फायदा आसानी से हो सकता है. बाकी मौसम और बीज के ऊपर डिपेंड करता है. इसके साथ ही किसान साथी अगर वैज्ञानिक विधि से और सही प्रकार से इसकी खेती करेंगे तो निश्चित ही उन्हें अच्छा मुनाफा होगा और उनकी आय में भी वृद्धि होगी. इसके साथ ही अगर सब्सिडी की बात की जाए तो अलग-अलग वैरायटी पर अलग-अलग सब्सिडी दी जाती है. ज्यादातर लागत का 50% सब्सिडी के रूप में किसानों को मिल जाता है.
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मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें