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रामगढ़ स्थित सीसीएल की सिरका परियोजना में एक बड़ा हादसा टल गया, जब खुली खदान में अचानक भारी मात्रा में पानी भर गया। घटना तब हुई जब खनन कार्य सामान्य रूप से चल रहा था। अचानक दो से तीन मीटर से अधिक पानी तेजी से खदान में घुसने लगा, जिससे अफरा-तफरी की स्थिति बन गई। हालांकि सतर्कता दिखाते हुए प्रबंधन ने तुरंत कार्रवाई की और खदान में मौजूद मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। इस त्वरित कदम के कारण किसी भी प्रकार की जनहानि नहीं हुई। मजदूरों और मशीनों को सुरक्षित निकाला गया स्थिति की गंभीरता को देखते हुए खदान में कार्यरत लगभग एक दर्जन मजदूरों को तुरंत बाहर निकाला गया। इसके साथ ही उत्पादन कार्य में लगी चार डंपर और एक पोकलेन मशीन को भी सुरक्षित स्थान पर पहुंचा दिया गया। पानी का बहाव इतना तेज था कि थोड़ी भी देरी होने पर बड़ा हादसा हो सकता था। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कुछ ही मिनटों में पानी का स्तर तेजी से बढ़ गया, जिससे खदान का बड़ा हिस्सा जलमग्न हो गया। प्रबंधन की त्वरित प्रतिक्रिया से संभावित खतरे को टाल लिया गया। पुरानी भूमिगत खदान की गैलरी बनी वजह प्राथमिक जांच में सामने आया है कि जिस क्षेत्र में वर्तमान में ओपन कास्ट खनन किया जा रहा है, वहां पहले चानक भूमिगत खदान संचालित होती थी। खनन के दौरान बंद पड़ी इस भूमिगत खदान की एक पुरानी गैलरी क्षतिग्रस्त हो गई। जिसके कारण उसमें वर्षों से जमा पानी अचानक रास्ता बनाकर खुली खदान में प्रवेश कर गया। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की पुरानी संरचनाएं खनन के दौरान जोखिम पैदा कर सकती हैं, जिनका समय-समय पर आकलन जरूरी है। उत्पादन ठप, आर्थिक नुकसान की आशंका इस घटना के बाद सिरका परियोजना में कोयला उत्पादन पूरी तरह ठप हो गया है। यहां प्रतिदिन करीब 2,500 मीट्रिक टन कोयला और 5,000 क्यूबिक मीटर ओवरबर्डन का उत्पादन होता है। उत्पादन रुकने से कंपनी को आर्थिक नुकसान होने की आशंका जताई जा रही है और तय लक्ष्य भी प्रभावित हो सकता है। सूचना मिलते ही परियोजना प्रबंधन ने मौके का निरीक्षण कर पानी निकालने के लिए पंपिंग की व्यवस्था शुरू कर दी है। हालांकि, खदान में जमा पानी की मात्रा अधिक होने के कारण सामान्य स्थिति बहाल होने में समय लग सकता है। अधिकारियों का कहना है कि पूरी तरह जल निकासी होने के बाद ही खनन कार्य दोबारा शुरू किया जाएगा।
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