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धालभूमगढ़| धालभूमगढ़ प्रखंड के घोड़ाधुआ स्थित ऐतिहासिक एवं प्राचीन भैरव मंदिर में सोमवार को गुमनाम से पूजा का आयोजन हुआ। मंदिर मे पूजा-अर्चना करने के लिए सुबह से ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। मान्यता है कि इस मंदिर में राजाओं के शासनकाल (राज-अमल) से ही पूजा-अर्चना की परंपरा चली आ रही है। आज भी क्षेत्र के लोगों में इस मंदिर के प्रति गहरी आस्था है। सोमवार को मंदिर के मुख्य पुजारी नितेश पाणिग्राही ने पूरी विधि-विधान और मंत्रोच्चारण के साथ बाबा भैरव की विशेष पूजा संपन्न कराई, जिसके बाद भक्तों के बीच प्रसाद का वितरण किया गया। शाम को झुंपार देखने उमड़े हजारों लोग : शाम को मंदिर परिसर मे कई श्रद्धालुओं का झुंपार (धार्मिक नृत्य/आस्था का आवेश) आया। झुंपार के आते ही मंदिर कमेटी और वहां मौजूद लोगों द्वारा परंपरा के अनुसार श्रद्धालुओं को गमछा पहनाया गया और उनके सिर पर शीतल जल डाला गया। इस अलौकिक और पारंपरिक दृश्य को देखने के लिए आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से हजारों की संख्या में महिला, पुरुष और बच्चों की भीड़ जुट गई।
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