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X New Rule : सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स यानी ट्विटर ने मेटा से सबक लेते हुए कंटेंट हटाने की प्रक्रिया को और पारदर्शी बनाने का फैसला किया है. कंपनी के मालिक एलन मस्क ने कहा है वह किसी कंटेंट हटाने के सरकारी आदेश उसके आधार के बारे में अब यूजर्स को भी साफ-साफ बताएंगे, ताकि ऐसे मामलों में जवाबदेही तय की जा सके.
एलन मस्क ने एक्स पर नया सेंसरशिप नियम लागू किया है.
नई दिल्ली. फेसबुक और इंस्टाग्राम की पैरेंट कंपनी मेटा पर सरकार के एक्शन को देखते हुए अरबपति कारोबारी एलन मस्क ने पहले ही सबक ले लिया है. मस्क ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (ट्विटर) पर किसी कंटेंट को हटाने को लेकर सरकार के आदेश आने से पहले ही बड़ा फैसला कर लिया है. मस्क ने कहा है कि एक्स की नई व्यवस्था के तहत यूजर्स को किसी कंटेंट पर सरकार की तरफ से लगाई गई पाबंदियों के बारे में ज्यादा क्लीयर तौर पर पता चल सकेगा. एक्स अब यह दिखाएगा कि कब अधिकारी पोस्ट हटाने या अकाउंट पर रोक लगाने की मांग कर रहे हैं.
इस बदलाव का मतलब है कि जब कोई सरकारी संस्था सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स से किसी खास कंटेंट के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए कहेगी तो यूजर्स को इसकी जानकारी दी जा सकेगी. प्लेटफॉर्म का इरादा उस सरकारी विभाग या एजेंसी की पहचान करना है जिसने अनुरोध किया है. साथ ही उस कानूनी वजह या स्पष्टीकरण को भी बताना है जिसके आधार पर पाबंदी लगाने की मांग की गई है. इस कदम से प्लेटफॉर्म पर किसी कंटेंट को हटाने की पहचान जल्दी और क्लीयर तरीके से की जा सकेगी.
क्यों उठाना पड़ा ऐसा कदम
एक्स ने इस पहल को सरकारी सेंशरशिप उजागर करने के तरीके के तौर पर पेश किया है. कंपनी की यह पहल ऐसे समय में शुरू की गई है जब एक्स दुनियाभर के देशों में रेगुलेटर्स की ओर से कंटेंट हटाने की मांगों का सामना कर रहा है. रिपोर्ट के मुताबिक, यह प्लेटफॉर्म हर साल ऐसे हजारों आदेशों पर कार्रवाई करता है और कंटेंट को हटाता है. यह घटनाक्रम सरकारी नियमों को लेकर एक्स के नजरिये और फ़्री-स्पीच के समर्थक के तौर पर मस्क की सार्वजनिक छवि के बीच के तनाव को भी दिखाता है. सोशल मीडिया कंपनियों को अलग-अलग इलाकों में अलग-अलग कानूनी नियमों के तहत काम करना पड़ता है. यूरोपियन यूनियन, भारत और तुर्की जैसे इलाकों में एक्स को डिजिटल नियमों के कड़े पालन की जरूरतों का सामना करना पड़ रहा है.
इस बर क्या है खास
अभी तक सरकार के आदेश के बाद कंपनी की ओर से उठाए गए कदमों के बारे में यूजर्स को पता नहीं चलता था. नए सिस्टम के तहत ऐसे कंटेंट पर कम मॉडरेशन के तरीके अपनाए जा सकते हैं या उन पर कुछ खास इलाकों तक सीमित पाबंदियां लगाई जा सकती हैं. कंपनी का मकसद ऐसे कंटेंट के सोर्स को ज्यादा क्लीयर तरीके से दिखाना है, ताकि यूजर्स को भी इसके बारे में साफ-साफ पता चल सके.
यूजर को भी मिलेगी पूरी जानकारी
एक्स ने अपने नए कदम के तहत जवाबदेही पर ज्यादा जोर दिया है. कंपनी का कहना है कि किसी कंटेंट पर सिर्फ यूजर्स पर ही यह तय करने की जिम्मेदारी नहीं छोड़ सकता कि किसी पोस्ट को कंपनी के मॉडरेशन नियमों के तहत अथवा सरकार की डिमांड पर हटाया गया है. इसके बजाय कंपनी उस अथॉरिटी की पहचान भी करेगी और संबंधित कंटेंट पर की जाने वाली कार्रवाई का आधार भी यूजर्स को बताएगी. वैसे तो एक्स को पहले भी सरकारों और रेगुलेटर्स के साथ पोस्ट हटाने की मांगों को लेकर विवादों का सामना करना पड़ा है, जिनमें राजनीतिक विरोधियों और स्वतंत्र पत्रकारों से जुड़े आदेश भी शामिल हैं. इससे पता चलता है कि ऐसे प्लेटफॉर्म पर सरकारों का कितना दबाव होता है. सरकारें उन कंपनियों पर जुर्माना लगा सकती हैं या फिर उनका एक्सेस रोक सकती हैं, जो उनके नियमों का पालन नहीं करते हैं.
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प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…
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