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16 साल तक शख्स को ढूंढ़ते रहे पत्नी और बच्चे, एक मैसेज...


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झारखंड के चतरा से अनोखी कहानी सामने आई. जहां 16 पहले परिवार से बिछड़ा शख्स मिल गया. यह सब हुआ एक व्हाट्सएप्प मैसेज की वजह से. जबकि लापता शख्स का बेटा उसी शहर में पिता के आस-पास ही रहकर काम कर रहा था, लेकिन उसे नहीं पता था कि उसके बिछड़े हुए पिता कहीं आस-पास ही हो सकते हैं.

16 साल तक शख्स को ढूंढ़ते रहे पत्नी और बच्चे, एक मैसेज ने किया चमत्कारZoom

सांकेतिक तस्वीर (AI Generated)

चतराः कभी-कभी एक छोटा सा मैसेज भी चमत्कार कर देता है. ठीक ऐसा ही वाक्या झारखंड के चतरा जिले में देखने को मिला. जहां करीब 16 साल पहले घर छोड़कर लापता हुए रमेश गंझू अपने परिवार से मिल गए. इस चमत्कार की वजह बना एक व्हाट्सऐप मैसेज. सालों बाद उनके घर लौटने को लेकर परिवार में खुशी का माहौल है. परिवार ने उनके मिलने की उम्मीद छोड़ दी थी, लेकिन आखिरकार वह मिल गए.

द टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, चतरा जिले के बेंती गांव के रहने वाले रमेश गंझू 16 साल पहले लापता हो गए थे. बताया जाता है कि 45 वर्षीय रमेश गंझू करीब 16 साल पहले पारिवारिक विवाद के बाद घर छोड़कर चले गए थे. पत्नी मुन्ना देवी और उनके दोनों बेटों ने सालों तक उनकी तलाश की, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला. धीरे-धीरे परिवार ने उम्मीद छोड़ दी. इस बीच रमेश मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं और नशे की लत से जूझते हुए अलग-अलग शहरों में भटकते रहे और अंततः चेन्नई की सड़कों पर बेघर जीवन बिताने लगे.

धीरे-धीरे लौटी याददाश्त
16 जून को चेन्नई की सामाजिक संस्था उदवुम करंगल के स्वयंसेवकों ने उन्हें पूनामल्ली इलाके में पाया. पुनर्वास केंद्र ले गए. वहां उनका इलाज शुरू हुआ और धीरे-धीरे उनकी याददाश्त लौटने लगी. इलाज के दौरान स्वयंसेवकों को पता चला कि रमेश झारखंड के रहने वाले हैं. इसके बाद उनकी तस्वीर और जानकारी व्हाट्सऐप ग्रुपों में शेयर की गई. यह संदेश चतरा जिले के एक किराना दुकानदार तक पहुंचा, जिसने रमेश को पहचान लिया और उनके परिवार को सूचना दी.

पत्नी बोली-भगवान ने मेरी सुन ली
कहानी में सबसे बड़ा संयोग तब सामने आया जब पता चला कि रमेश का बड़ा बेटा नागेश्वर भी चेन्नई के बाहरी इलाके में काम करता है. वह अपने पिता से महज कुछ किलोमीटर की दूरी पर रह रहा था. दोनों को इस बात की कोई जानकारी नहीं थी. सूचना मिलने के बाद पिता और बेटे की मुलाकात हुई, जिसने सभी की आंखें नम कर दीं. 21 जून को रमेश अपने गांव लौट आए. पत्नी मुन्ना देवी ने कहा कि- “मेरी प्रार्थनाएं आखिरकार सुन ली गईं.” वहीं नागेश्वर, जो पिता के घर छोड़ने के समय महज पांच साल का था, उसने कहा कि उसे सिर्फ इतनी खुशी है कि उसके पिता वापस घर लौट आए हैं.

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Mahesh Amrawanshi

Journalist with a sharp focus on Bihar and Jharkhand, covering politics, crime, and trending stories with a strong ground-level perspective. Passionate about listening to stories, understanding them deeply, and…और पढ़ें



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