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Singhbhum Earth’s Oldest Landmass: भूवैज्ञानिकों के शोध के अनुसार झारखंड का सिंहभूम क्रेटन पृथ्वी के सबसे प्राचीन भूभागों में से एक है जो अरबों साल पुराना माना जाता है. यहां की पुरानी चट्टानें और समृद्ध खनिज संपदा इसे वैश्विक भूविज्ञान केंद्र बनाती हैं. यहां की खनिज संपदा की वजह से भी यह महत्वपूर्ण औद्योगिक केंद्र माना जाता है.
जमशेदपुर. झारखंड की धरती अपने खनिज संसाधनों और प्राकृतिक संपदा के लिए पूरे देश में प्रसिद्ध है, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि वैज्ञानिकों के अनुसार पृथ्वी पर समुद्र से सबसे पहले उभरने वाली भूमि का एक हिस्सा वर्तमान झारखंड के सिंहभूम क्षेत्र में स्थित है. यह दावा भूवैज्ञानिक शोधों पर आधारित है, जिसमें बताया गया है कि सिंहभूम क्रेटन (Singhbhum Craton) पृथ्वी के सबसे प्राचीन भू-भागों में से एक है. इस खोज ने झारखंड को वैश्विक भू-विज्ञान के मानचित्र पर विशेष पहचान दिलाई है.
पृथ्वी पर सबसे पहले उभरने वाला भूभाग
भूवैज्ञानिकों के अनुसार, लगभग 3.2 अरब वर्ष पहले पृथ्वी का अधिकांश हिस्सा महासागरों से ढका हुआ था. उस समय सिंहभूम क्षेत्र में ज्वालामुखीय गतिविधियों और पृथ्वी की आंतरिक प्रक्रियाओं के कारण विशाल मात्रा में मैग्मा जमा हुआ. धीरे-धीरे यह क्षेत्र ऊपर उठता गया और समुद्र की सतह से बाहर निकल आया.
कुछ भूवैज्ञानिक शोधों के अनुसार, वर्तमान झारखंड के सिंहभूम क्षेत्र का एक हिस्सा पृथ्वी पर समुद्र से सबसे पहले उभरने वाले भू-भागों में शामिल हो सकता है. इसी कारण सिंहभूम को पृथ्वी के प्रारंभिक इतिहास को समझने की एक महत्वपूर्ण प्रयोगशाला माना जाता है.
ऐसे होती है स्टडी
सिंहभूम क्रेटन मुख्य रूप से पूर्वी सिंहभूम, पश्चिमी सिंहभूम और सरायकेला-खरसावां जिलों में फैला हुआ है. यहां मिलने वाली चट्टानें अरबों वर्ष पुरानी हैं. इनमें ग्रेनाइट, ग्रीनस्टोन, क्वार्ट्जाइट, शिस्ट और लौह अयस्क युक्त चट्टानें प्रमुख हैं. इन प्राचीन चट्टानों का अध्ययन कर वैज्ञानिक पृथ्वी के शुरुआती वातावरण, महासागरों और महाद्वीपों के निर्माण की प्रक्रिया को समझने का प्रयास करते हैं.
महत्वपूर्ण औद्योगिक केंद्र
खनिज संपदा की दृष्टि से भी सिंहभूम क्षेत्र बेहद समृद्ध है. यहां लौह अयस्क (Iron Ore), तांबा (Copper), निकल (Nickel), क्रोमाइट (Chromite), मैंगनीज (Manganese), यूरेनियम तथा क्वार्ट्ज जैसे महत्वपूर्ण खनिज और पत्थर पाए जाते हैं. नोआमुंडी, गुआ, किरीबुरू और चिरिया जैसी खदानें देश की प्रमुख लौह अयस्क खदानों में गिनी जाती हैं. यही कारण है कि जमशेदपुर और आसपास का क्षेत्र देश के महत्वपूर्ण औद्योगिक केंद्रों में शामिल है.
खजाने से कम नहीं यह क्षेत्र
वरिष्ठ पत्रकार और स्थानीय इतिहास के जानकार विकास श्रीवास्तव बताते हैं कि सिंहभूम केवल खनिज संपदा का केंद्र नहीं है, बल्कि यह पृथ्वी के अरबों वर्षों पुराने इतिहास का जीवंत प्रमाण भी है. यहां की चट्टानें उस समय की कहानी कहती हैं, जब पृथ्वी पर जीवन का विकास भी प्रारंभिक अवस्था में था. वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं के लिए यह क्षेत्र किसी खजाने से कम नहीं माना जाता.
आज सिंहभूम की यह ऐतिहासिक और वैज्ञानिक पहचान झारखंड के लिए गर्व का विषय है. दुनिया भर के वैज्ञानिक यहां की चट्टानों और भू-संरचनाओं का अध्ययन कर पृथ्वी के शुरुआती इतिहास के रहस्यों को समझने का प्रयास कर रहे हैं. इस प्रकार सिंहभूम केवल झारखंड ही नहीं, बल्कि पूरी मानव सभ्यता के लिए एक अमूल्य प्राकृतिक धरोहर है.
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बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी से मास कम्यूनिकेशन एंड जर्नलिज़्म में मास्टर्स, गोल्ड मेडलिस्ट. पत्रकारिता का सफर दैनिक जागरण से शुरू हुआ, फिर प्रभात खबर और ABP न्यूज़ से होते हुए News18 Hindi तक पहुंचा. करियर और देश की …और पढ़ें