भास्कर न्यूज |गिरिडीह मुहर्रम की सातवीं तारीख पर मंगलवार देर शाम को जिले के विभिन्न इमामबाड़ों में अकीदतमंदों की भीड़ उमड़ी। अकीदतमंदों ने पूरे अदब और एहतराम के साथ हजरत इमाम हुसैन की याद में निशान खड़ा किया तथा फातिहा पढ़कर करबला के शहीदों को खिराज-ए-अकीदत पेश की।इस दौरान इमामबाड़ों में धार्मिक और आध्यात्मिक माहौल देखने को मिला। अकीदतमंदों ने हजरत इमाम हुसैन और उनके साथियों की कुर्बानियों को याद करते हुए उनकी शिक्षाओं पर चलने का संकल्प लिया। लोगों ने अमन, भाईचारे, इंसानियत और देश-दुनिया की खुशहाली के लिए विशेष दुआएं भी मांगीं।मोहर्रम पर वक्ताओं ने कहा कि हजरत इमाम हुसैन का जीवन सत्य, न्याय, साहस और बलिदान का प्रतीक है। करबला की घटना मानवता को अन्याय और अत्याचार के विरुद्ध संघर्ष करने की प्रेरणा देती है। उन्होंने कहा कि मुहर्रम केवल शोक का पर्व नहीं, बल्कि सत्य और इंसाफ के लिए किए गए सर्वोच्च त्याग को याद करने का अवसर भी है। मोहनपुर, बिशनपुर-पचंबा, खरियोडीह, सिकदरडीह, तेलोडीह, बरवाडीह और कोलडीहा समेत विभिन्न इमामबाड़ों में आयोजित धार्मिक कार्यक्रमों में आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में अकीदतमंदों शामिल हुए। कई स्थानों पर लोगों ने सामूहिक रूप से फातिहा पढ़ी और करबला के शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की।पूरे आयोजन के दौरान श्रद्धा, आस्था और भाईचारे का माहौल बना रहा। प्रशासन की ओर से भी शांति एवं सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक प्रबंध किए गए थे। मुहर्रम की सातवीं पर जिले भर में धार्मिक सौहार्द और एकता का संदेश देखने को मिला।
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