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सीआईडी की पूछताछ के अगले ही दिन रिम्स निदेशक का इस्तीफा




डॉ. राजकुमार बोले-लोग चाहते थे मैं चला जाऊं, तो मैंने भी मन बना लिया… रिम्स निदेशक डॉ. राजकुमार ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने गुरुवार शाम ईमेल से अपना इस्तीफा स्वास्थ्य मंत्री सह शासी परिषद के अध्यक्ष डॉ. इरफान अंसारी को भेजा। इसे स्वीकार करने का अनुरोध किया। इस्तीफे का कारण उन्होंने व्यक्तिगत बताया है। देर शाम विभाग ने उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया। उनके स्थान पर डीन एकेडमिक डॉ. डीके सिन्हा को प्रभारी निदेशक बनाया है। दैनिक भास्कर से बातचीत में डॉ. राजकुमार ने कहा-लोग चाहते थे कि मैं चला जाऊं, तो अब मैंने मन बना लिया है। लेकिन इस्तीफे की कोई ठोस वजह नहीं बताया। एडमिशन और टेंडर घोटाले में सीआईडी ने बुधवार को रिम्स में छापेमारी की थी। इस दौरान निदेशक और डीन से कई घंटे तक पूछताछ की थी। इसके अगले ही दिन इस्तीफा देने की खबर फैलते ही स्वास्थ्य विभाग में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया। गौरतलब है कि रिम्स निदेशक और स्वास्थ्य विभाग के बीच लंबे समय से सबकुछ ठीक नहीं चल रहा था। पिछले साल शासी परिषद की बैठक में किसी एजेंडे पर निदेशक व विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह के बीच विवाद हो गया था। इसके बाद उन्हें पद से हटा दिया गया था। हाईकोर्ट के निर्देश के बाद उन्हें फिर बहाल किया गया था। सीआईडी को मिले गड़बड़ी के संकेत, अब एफआईआर दर्ज करने की तैयारी रिम्स में एडमिशन और सफाई टेंडर में अनियमितता की शिकायत मामले में सीआईडी का शिकंजा कसता जा रहा है। छापेमारी में जब्त दस्तावेजों की जांच में वित्तीय और प्रशासनिक गड़बड़ी के संकेत मिले हैं। सीआईडी पुष्टि कर रही है। पुष्टि के बाद एफआईआर दर्ज कर आगे की कार्रवाई करेगी। सीआईडी ने बुधवार को इस मामले में रिम्स निदेशक, डीन व अन्य कर्मचारियों से पूछताछ की थी। उनसे दोनों मामलों से जुड़े प्रशासनिक पहलू, फाइल मूवमेंट और फैसला लेने वाली कमेटी की भूमिका की जानकारी ली थी। अब रिम्स के तत्कालीन निदेशक सहित टेंडर समिति के सदस्यों और नामांकन प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों व कर्मियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। अपात्र कंपनी को टेंडर देने का आरोप डॉ. राजकुमार अक्सर विवादों में घिरे रहे। एक दिन पहले सीआईडी ने रिम्स में छापेमारी कर कई अहम दस्तावेजों को जब्त किया था। उनसे पूछताछ की थी। आरोप था कि अयोग्य होने के बाद भी यूपी की कंपनियों को सफाई टेंडर में पात्र घोषित किया और उन कंपनियों को टेंडर दिया गया। बेटे की नियुक्ति का विवाद बेटे की नियुक्ति को लेकर भी वे विवादों में रहे। उनके बेटे ने रिम्स से मास्टर्स इन हॉस्पिटल एडमिनिस्ट्रेशन कोर्स किया था। आरोप है कि पद न होने के बाद भी एनाटॉमी विभाग से पद छीनकर अपने बेटे की नियुक्ति की। यह मामला हाईकोर्ट पहुंचा। हाईकोर्ट ने यह कहते हुए ​ज्वाइन करने का निर्देश दिया था कि यह संस्थान व विभाग की गलती है। अभ्यर्थी का कोई दोष नहीं है। इस मामले की विभागीय जांच अभी भी जारी है। इससे पहले निदेशक ने अपने बेटे को रिम्स की एक महत्वपूर्ण कमेटी का सदस्य बनाया था। जबकि उस वक्त बेटा खुद रिम्स का स्टूडेंट था।



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