भारतन्यूज़ – टॉप हेडर
News Menu Bar

Sev Laddu: मोतीचूर से नहीं बेसन के बारीक सेव से बनते हैं...


जमशेदपुर. भारत में मिठाइयों का अपना एक अलग ही महत्व है. यहां हर राज्य और हर जिले की अपनी खास मिठाइयां हैं, जो अपने अनोखे स्वाद और बनाने की पारंपरिक विधि के कारण पहचान रखती हैं. झारखंड के सरायकेला-खरसावां जिले की ऐसी ही एक प्रसिद्ध मिठाई है सेव का लड्डू, जो वर्षों से लोगों की पसंद बना हुआ है. यह लड्डू न केवल अपने स्वाद के लिए जाना जाता है, बल्कि इसकी बनाने की प्रक्रिया भी दूसरे लड्डुओं से काफी अलग है.

दस दिन नहीं होता खराब
सरायकेला के प्रसिद्ध हलवाई मंटू मोदक बताते हैं कि यहां का सेव लड्डू दूर-दूर तक प्रसिद्ध है. कई लोग जब सरायकेला आते हैं, तो इस मिठाई को विशेष रूप से खरीदकर अपने साथ ले जाते हैं. इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह लगभग 10 दिनों तक खराब नहीं होता, इसलिए लोग इसे पैक कराकर रिश्तेदारों और दोस्तों के लिए भी ले जाते हैं और गिफ्ट भी करते हैं.

बहुत मेहनत से बनते हैं ये लड्डू
मंटू मोदक के अनुसार, इस खास लड्डू को बनाने की प्रक्रिया काफी मेहनत भरी होती है. सबसे पहले अच्छी गुणवत्ता वाले बेसन को तैयार किया जाता है. इसके बाद बेसन के घोल से बेहद पतली और महीन सेव बनाई जाती है. इन सेवों को शुद्ध तेल या घी में सुनहरा होने तक तला जाता है. तलने के बाद सेव को पूरी तरह ठंडा होने दिया जाता है, ताकि उसका स्वाद और कुरकुरापन बरकरार रहे.

अब आती है चाशनी की बारी
इसके बाद तैयार की जाती है चीनी की चाशनी. चाशनी में इलायची पाउडर, मगज, काजू, किशमिश और शुद्ध देसी घी मिलाया जाता है. जब सभी सामग्री अच्छी तरह मिल जाती हैं, तब उसमें तैयार की गई सेव डाली जाती है. मिश्रण को हल्के हाथों से मिलाकर गोल आकार में लड्डू बनाए जाते हैं. यही पारंपरिक विधि इस मिठाई को एक अलग पहचान देती है.

आसपास के जिलों से खरीदने आते हैं लोग
मंटू मोदक बताते हैं कि सेव लड्डू का स्वाद इतना खास होता है कि एक बार खाने वाला व्यक्ति इसे दोबारा जरूर मांगता है. मिठास, कुरकुरी सेव और सूखे मेवों का संतुलित मेल इसे बेहद स्वादिष्ट बना देता है. यही कारण है कि सरायकेला के अलावा आसपास के जिलों से भी लोग इसे खरीदने पहुंचते हैं.

शादी-विवाह, त्योहार में बढ़ जाती है मांग
गांवों में जब भी कोई शादी, पूजा, मेला या बड़ा पर्व-त्योहार होता है, तब इस लड्डू की मांग कई गुना बढ़ जाती है. हलवाइयों को लगातार इसकी तैयारी करनी पड़ती है. मंटू मोदक हंसते हुए कहते हैं कि ‘हम लोग इसे लगातार बनाते रहते हैं, क्योंकि कब स्टॉक खत्म हो जाए, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल होता है.’

आज भी चाव से खाते हैं लोग
सरायकेला का यह पारंपरिक सेव लड्डू आज भी अपनी पुरानी पहचान और स्वाद को कायम रखे हुए है. आधुनिक मिठाइयों के दौर में भी यह स्थानीय विरासत और पारंपरिक स्वाद का एक बेहतरीन उदाहरण माना जाता है, जिसे लोग आज भी उतने ही चाव से खाते हैं, जितना वर्षों पहले खाया करते थे.



Source link

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top