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PMFME योजना ने बदल दिया पलामू की महिला का जीवन, खड़ा किया...


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पलामू की प्रिंसी शाह ने डेयरी व्यवसाय से मिले अनुभव के आधार पर उन्होंने यह नया कारोबार शुरू किया. इससे स्थानीय किसानों को बेहतर बाजार और लोगों को रोजगार मिल रहा है. उनकी मशीन एक घंटे में 120 किलो सरसों की पेराई कर सकती है. ‘श्री अर्पण’ ब्रांड नाम से शुद्ध सरसों का तेल बाजार में बेचा जा रहा है. प्रिंसी की यह पहल ग्रामीण महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता और उद्यमिता की प्रेरणादायक मिसाल बन गई है.

पलामू: महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार कई योजनाएं चला रही है. इन्हीं में से एक प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम उन्नयन योजना (PMFME) कई लोगों के लिए नई उम्मीद बनकर सामने आई है. इस योजना के तहत लोगों को वित्तीय और तकनीकी सहायता दी जा रही है. इससे युवा और महिलाएं अपना व्यवसाय शुरू कर आत्मनिर्भर बन रही हैं. पलामू जिले के सदर प्रखंड की रहने वाली प्रिंसी शाह इसकी एक सफल मिसाल हैं. उन्होंने सरकारी सहयोग से अपने घर में आधुनिक सरसों तेल मिल स्थापित की है. यह यूनिट न सिर्फ उनके परिवार की आय का नया साधन बनी है, बल्कि स्थानीय किसानों और महिलाओं के लिए भी रोजगार के अवसर पैदा कर रही है.

डेयरी व्यवसाय से मिला नया आइडिया
प्रिंसी शाह ने बताया कि उनके पति पहले से डेयरी फार्म का संचालन करते हैं. डेयरी व्यवसाय के दौरान उनका लगातार किसानों और ग्राहकों से संपर्क बना. इसी दौरान उनके मन में सरसों तेल उत्पादन का विचार आया. उन्होंने सोचा कि यदि किसी समय डेयरी व्यवसाय में मुनाफा कम हो तो तेल उत्पादन का व्यवसाय आय का दूसरा मजबूत विकल्प बन सकता है. साथ ही जिन किसानों से दूध खरीदा जाता है, उन्हीं किसानों से सरसों खरीदकर उन्हें बेहतर बाजार भी उपलब्ध कराया जा सकता है. इससे किसानों की आमदनी बढ़ेगी और गांव में रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे.

21 लाख रुपये के ऋण से पूरा हुआ सपना
प्रिंसी शाह ने बताया कि उन्होंने प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम उन्नयन योजना (PMFME) के तहत उद्योग विभाग की मदद से आवेदन किया. इसके बाद झारखंड ग्रामीण बैंक ने उन्हें 21 लाख रुपये का ऋण उपलब्ध कराया. इसी वित्तीय सहायता से उन्होंने आधुनिक सरसों तेल मिल स्थापित की. उनका कहना है कि यदि सरकार की यह योजना नहीं होती तो इतनी बड़ी मशीन और पूरा प्लांट लगाना उनके लिए संभव नहीं था.

आधुनिक तकनीक से तैयार होता है शुद्ध सरसों तेल
प्रिंसी शाह ने बताया कि उनकी तेल मिल में अत्याधुनिक मशीनें लगी हैं. यह मशीन एक घंटे में लगभग 120 किलोग्राम सरसों की पेराई करने की क्षमता रखती है. प्रतिदिन इस यूनिट में करीब 3 से 4 क्विंटल सरसों से तेल निकाला जाता है. तेल उत्पादन की पूरी प्रक्रिया गुणवत्ता को ध्यान में रखकर की जाती है. सबसे पहले सरसों की अच्छी तरह सफाई की जाती है, फिर उसे धूप में सुखाया जाता है. इसके बाद मॉइस्चर मीटर से नमी की जांच की जाती है. प्रिंसी के अनुसार, सरसों में 7 से 8 प्रतिशत नमी रहने पर ही अच्छी गुणवत्ता का तेल निकलता है. इसके बाद तेल को फिल्टर मशीन से शुद्ध कर पैकिंग की जाती है, ताकि ग्राहकों तक शुद्ध और गुणवत्तापूर्ण सरसों का तेल पहुंचे.

‘श्री अर्पण’ ब्रांड से बनाई पहचान
प्रिंसी शाह अपने सरसों तेल को ‘श्री अर्पण’ ब्रांड नाम से बाजार में बेच रही हैं. उनका दावा है कि उनके उत्पाद में किसी भी प्रकार की मिलावट नहीं की जाती और ग्राहकों को पूरी तरह शुद्ध सरसों का तेल उपलब्ध कराया जाता है. यह तेल 200 से 220 रुपये प्रति लीटर की कीमत पर बेचा जाता है. उन्होंने बताया कि शुरुआत में इस व्यवसाय में लाभ का प्रतिशत बहुत अधिक नहीं है. हालांकि, जैसे-जैसे बिक्री बढ़ती है, मुनाफा भी बढ़ने लगता है. उनका उद्देश्य केवल अपना कारोबार बढ़ाना नहीं है, बल्कि स्थानीय किसानों से सरसों खरीदकर उन्हें बेहतर बाजार उपलब्ध कराना और महिलाओं को रोजगार देकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाना भी है. उनकी पहल आज पलामू की कई महिलाओं और युवाओं के लिए प्रेरणा बन रही है.

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Amita kishor

न्यूज़18इंडिया में कार्यरत हैं. आजतक से रिपोर्टर के तौर पर करियर की शुरुआत फिर सहारा समय, ज़ी मीडिया, न्यूज नेशन और टाइम्स इंटरनेट होते हुए नेटवर्क 18 से जुड़ी. टीवी और डिजिटल न्यूज़ दोनों विधाओं में काम करने क…और पढ़ें



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