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कागजी झंझट से मिलेगी मुक्ति:झारखंड की 1297 पैक्स होंगी डिजिटल, अब कंप्यूटर...




झारखंड सरकार ने राज्य की 1297 पैक्स (प्राथमिक कृषि साख समिति) को पूरी तरह डिजिटल बनाने की तैयारी शुरू कर दी है। सहकारिता विभाग इसके लिए जरूरी कंप्यूटर और हार्डवेयर उपकरण खरीदने की प्रक्रिया में जुट गया है। इसके लिए टेंडर जारी किए जा रहे हैं। इस बड़े कदम का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना और किसानों को मिलने वाली सुविधाओं को पारदर्शी बनाना है। वर्तमान में पैक्स का अधिकांश काम कागजों और रजिस्टरों पर होता है, जिससे लोन, खाद-बीज वितरण और वित्तीय लेनदेन में काफी समय लगता है। पूरी तरह कंप्यूटराइज्ड होने के बाद कामकाज तेज होगा और किसानों को बेहद कम समय में बेहतर सेवाएं मिल सकेंगी। हर पैक्स में लगेंगे आधुनिक हार्डवेयर उपकरण योजना के तहत सभी 1297 पैक्स में आवश्यक आईटी हार्डवेयर उपलब्ध कराए जाएंगे। इनमें डेस्कटॉप कंप्यूटर, मल्टी फंक्शन प्रिंटर, यूपीएस, बायोमेट्रिक स्कैनर, वीपीएन आधारित सुरक्षित नेटवर्किंग उपकरण और अन्य जरूरी डिजिटल संसाधन शामिल होंगे। इन उपकरणों के साथ पांच वर्षों तक वारंटी, रखरखाव और तकनीकी सहायता भी उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि सिस्टम लगातार सुचारू रूप से चलता रहे। नई व्यवस्था से पैक्स के वित्तीय लेनदेन पूरी तरह डिजिटल होंगे। इससे नकदी प्रबंधन, लेखा-जोखा और स्टॉक का रिकॉर्ड ऑनलाइन उपलब्ध रहेगा। अधिकारियों को भी विभिन्न पैक्स की गतिविधियों की निगरानी आसान होगी। डिजिटल रिकॉर्ड होने से अनियमितताओं, फर्जीवाड़े और रिकॉर्ड में हेराफेरी की संभावनाएं काफी कम हो जाएंगी। किसानों को होंगे फायदे….ऋण आवेदन, भुगतान समेत अन्य सेवाओं का रिकॉर्ड डिजिटल होगा कंप्यूटराइजेशन लागू होने के बाद किसानों को सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि उन्हें बार-बार कागजी प्रक्रिया से नहीं गुजरना पड़ेगा। सदस्यता, ऋण आवेदन, खाद-बीज वितरण, भुगतान और अन्य सेवाओं का रिकॉर्ड डिजिटल रूप में उपलब्ध रहेगा। इससे गलतियों की संभावना कम होगी और जानकारी तुरंत उपलब्ध हो सकेगी। डिजिटल रिकॉर्ड होने से किसानों के ऋण और लेनदेन का पूरा इतिहास सुरक्षित रहेगा। भविष्य में सरकारी योजनाओं का लाभ देने, सब्सिडी वितरण और वित्तीय सहायता जैसी प्रक्रियाओं में भी आसानी होगी। साथ ही किसी भी स्तर पर रिकॉर्ड का सत्यापन तेजी से किया जा सकेगा। पैक्स क्या है भारत के ग्रामीण इलाकों में पैक्स (प्राइमरी एग्रीकल्चर क्रेडिट सोसाइटीज) ग्राउंड लेवल पर काम करने वाली सहकारी कर्ज देने वाली समितियां हैं। यह तीन-स्तरीय सहकारी बैंकिंग प्रणाली की सबसे निचली और महत्वपूर्ण कड़ी है।



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