ऑल इंडिया गिग वर्कर्स यूनियन (एआईजीडब्ल्यूयू), झारखंड राज्य कमेटी ने झारखंड गिग वर्कर्स कल्याण बोर्ड की बैठक में अधिनियम की नियमावली बनाने के बजाय संशोधन पर चर्चा करने पर गहरी चिंता जताई है। यूनियन का कहना है कि ‘झारखंड प्लेटफॉर्म आधारित गिग वर्कर्स (पंजीकरण एवं कल्याण) अधिनियम’ पारित हुए लंबा समय बीत चुका है, लेकिन सरकार ने अब तक इसकी नियमावली तैयार नहीं की है। नियमावली के अभाव में इस कानून के प्रावधान जमीन पर लागू नहीं हो पा रहे हैं, जिससे गिग और प्लेटफॉर्म श्रमिक अपने कानूनी अधिकारों से लगातार वंचित हैं। सरकार की प्राथमिकता सबसे पहले नियमावली बनाकर इस अधिनियम को प्रभावी ढंग से लागू करने की होनी चाहिए। एआईजीडब्ल्यूयू ने साफ किया कि यदि केंद्र सरकार के मजदूर विरोधी श्रम संहिताओं के कारण कुछ कानूनी तकनीकी बदलाव जरूरी हैं, तो उन पर विचार किया जा सकता है। लेकिन संशोधन की आड़ में झारखंड अधिनियम के श्रमिक हितैषी प्रावधानों जैसे न्यूनतम कमाई सुनिश्चित करना और शिकायत निवारण तंत्र को कमजोर या समाप्त करने का कोई भी प्रयास बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। एक तरफ श्रमिकों के कल्याण के लिए बने अधिनियम को लागू करने के बजाय उसमें बदलाव की बातें हो रही हैं, वहीं दूसरी तरफ झारखंड में लेबर कोड्स के नियम तय करने के लिए आज तक ट्रेड यूनियनों से कोई सार्थक संवाद नहीं किया गया है।
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