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IIT Faculty Vacancy: डिग्री बड़ी या सैलरी? विदेश भाग रहे PhD होल्डर्स,...


नई दिल्ली (IIT Faculty Vacancy). देश के टॉप इंजीनियरिंग संस्थान यानी IIT को लेकर चौंकाने वाली खबर आई है, जो उच्च शिक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है. आमतौर पर माना जाता है कि जिस जगह एडमिशन पाने के लिए देश के लाखों स्टूडेंट्स दिन-रात एक कर देते हैं, वहां रिसोर्सेस और शिक्षकों की कोई कमी नहीं होगी. लेकिन हकीकत इसके बिल्कुल उलट है. Hindustan Times में छपी रिपोर्ट के अनुसार, देश के सभी 23 आईआईटी में स्वीकृत फैकल्टी पदों में से एक बड़ा हिस्सा खाली पड़ा है.

सरकार और प्रशासन लगातार आईआईटी का विस्तार कर रहे हैं, नए कैंपस खोले जा रहे हैं, स्टूडेंट्स की क्षमता बढ़ाई जा रही है और नए जमाने के अल्ट्रा मॉडर्न कोर्स की शुरुआत हो रही है. नियम के मुताबिक, जब किसी संस्थान का दायरा बढ़ता है तो वहां पढ़ाने वाले योग्य शिक्षकों की संख्या भी बढ़नी चाहिए. मगर जमीनी हकीकत यह है कि हर 5 में से लगभग 2 फैकल्टी पद खाली चल रहे हैं. यह सिर्फ प्रशासनिक आंकड़ा नहीं है, बल्कि देश के सबसे बेहतरीन दिमागों को तराशने वाले सिस्टम के सामने खड़ी गंभीर चुनौती है.

38% वैकेंसी: देश के टॉप इंजीनियरिंग कॉलेजों का हाल बेहाल!

रिपोर्ट में दिए गए डेटा के अनुसार, भारत के 23 आईआईटी में कुल 12,498 स्वीकृत फैकल्टी पद हैं. इनमें से 4,804 पद 30 जनवरी तक खाली थे, जो कुल स्वीकृत पदों का 38.4% है. स्थिति कितनी गंभीर है, इसका अंदाजा इस बात से लगा सकते हैं कि 2 प्रमुख पुराने संस्थानों, आईआईटी पटना (54.6%) और आईआईटी खड़गपुर (51.3%)- में आधे से ज्यादा पद खाली पड़े हैं. इसके अलावा, 12 अन्य आईआईटी में भी एक तिहाई से ज्यादा सीटें भरी नहीं जा सकी हैं.

आईआईटी में इतने पद क्यों खाली हैं?

आईआईटी डायरेक्टर और जानकार खाली पदों के पीछे कई कारण मानते हैं. सबसे बड़ी वजह है रिसर्चर्स के लिए बना ‘ग्लोबल मार्केट’. IITs का मुकाबला सिर्फ देश के दूसरे संस्थानों से नहीं, बल्कि दुनिया की टॉप यूनिवर्सिटीज, मल्टीनेशनल R&D लैब्स और बेहतरीन डीप-टेक स्टार्टअप्स से है. हाई क्वॉलिटी वाले PhD ग्रेजुएट्स इन जगहों पर मिलने वाले भारी-भरकम पैकेज की तरफ आकर्षित होते हैं. इसके अलावा, देश के सबसे बेहतरीन डॉक्टरल ग्रेजुएट्स अब करियर बनाने के लिए विदेशों का रुख कर रहे हैं.

संस्थानों की कोशिशें और चुनौतियां

इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी इस कमी को दूर करने के लिए पूरी ताकत लगा रहे हैं. वे सालभर भर्ती प्रक्रिया चला रहे हैं, ‘मिशन मोड’ में रिक्रूटमेंट हो रहा है और विशेष भर्ती अभियान भी चलाए जा रहे हैं. साथ ही, रिसर्च ग्रांट्स बढ़ाने, लैब सपोर्ट बेहतर करने और स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है, जिससे दुनियाभर के बेहतरीन प्रोफेसर्स यहां आएं.

IIT मद्रास जैसे संस्थान इस चुनौती से निपटने के लिए विजिटिंग फैकल्टी, एडजंक्ट फैकल्टी और ‘प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस’ की मदद ले रहे हैं, जिससे पढ़ाई पर असर न पड़े. वे आगाह भी करते हैं कि एक साथ बहुत ज्यादा नई भर्तियां करने से भविष्य में रिटायरमेंट के समय दिक्कतें आ सकती हैं. कुल मिलाकर, IITs के सामने रिसर्च की क्वॉलिटी बनाए रखने और फैकल्टी की कमी दूर करने की डबल चुनौती है.



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