नई दिल्ली (IIT Faculty Vacancy). देश के टॉप इंजीनियरिंग संस्थान यानी IIT को लेकर चौंकाने वाली खबर आई है, जो उच्च शिक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है. आमतौर पर माना जाता है कि जिस जगह एडमिशन पाने के लिए देश के लाखों स्टूडेंट्स दिन-रात एक कर देते हैं, वहां रिसोर्सेस और शिक्षकों की कोई कमी नहीं होगी. लेकिन हकीकत इसके बिल्कुल उलट है. Hindustan Times में छपी रिपोर्ट के अनुसार, देश के सभी 23 आईआईटी में स्वीकृत फैकल्टी पदों में से एक बड़ा हिस्सा खाली पड़ा है.
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आईआईटी में इतने पद क्यों खाली हैं?
आईआईटी डायरेक्टर और जानकार खाली पदों के पीछे कई कारण मानते हैं. सबसे बड़ी वजह है रिसर्चर्स के लिए बना ‘ग्लोबल मार्केट’. IITs का मुकाबला सिर्फ देश के दूसरे संस्थानों से नहीं, बल्कि दुनिया की टॉप यूनिवर्सिटीज, मल्टीनेशनल R&D लैब्स और बेहतरीन डीप-टेक स्टार्टअप्स से है. हाई क्वॉलिटी वाले PhD ग्रेजुएट्स इन जगहों पर मिलने वाले भारी-भरकम पैकेज की तरफ आकर्षित होते हैं. इसके अलावा, देश के सबसे बेहतरीन डॉक्टरल ग्रेजुएट्स अब करियर बनाने के लिए विदेशों का रुख कर रहे हैं.
संस्थानों की कोशिशें और चुनौतियां
इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी इस कमी को दूर करने के लिए पूरी ताकत लगा रहे हैं. वे सालभर भर्ती प्रक्रिया चला रहे हैं, ‘मिशन मोड’ में रिक्रूटमेंट हो रहा है और विशेष भर्ती अभियान भी चलाए जा रहे हैं. साथ ही, रिसर्च ग्रांट्स बढ़ाने, लैब सपोर्ट बेहतर करने और स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है, जिससे दुनियाभर के बेहतरीन प्रोफेसर्स यहां आएं.
IIT मद्रास जैसे संस्थान इस चुनौती से निपटने के लिए विजिटिंग फैकल्टी, एडजंक्ट फैकल्टी और ‘प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस’ की मदद ले रहे हैं, जिससे पढ़ाई पर असर न पड़े. वे आगाह भी करते हैं कि एक साथ बहुत ज्यादा नई भर्तियां करने से भविष्य में रिटायरमेंट के समय दिक्कतें आ सकती हैं. कुल मिलाकर, IITs के सामने रिसर्च की क्वॉलिटी बनाए रखने और फैकल्टी की कमी दूर करने की डबल चुनौती है.