Last Updated:
लातेहार के पंकज कुमार मिश्रा ने ‘सदाबहार नर्सरी’ से अपनी खास पहचान बनाई है. वे मिया जाकी और चार किलो वाले आम जैसी दुर्लभ किस्में बेचते हैं. उनकी नर्सरी में पौधों की कीमत 100 से 2000 रुपये तक है. इस व्यवसाय से उन्हें हर महीने 30 से 40 हजार रुपये की आय होती है.
लातेहारः बदलते दौर में लोग खेती के अलावा नर्सरी से भी अच्छी कमाई कर रहे है. झारखंड जो कि प्राकृतिक संसाधनों से परिपूर्ण है. वहीं प्रकृति के प्रति प्रेम और हरियाली को बढ़ावा देने की सोच ने लातेहार के पंकज कुमार मिश्रा को एक सफल उद्यमी बना दिया है. वहीं लातेहार जिले के किनामाड़ बिजली ऑफिस के समीप संचालित उनकी सदाबहार नर्सरी आज जिले ही नहीं, बल्कि आसपास के क्षेत्रों के पौधा प्रेमियों के लिए एक प्रमुख केंद्र बन चुकी है. कभी छोटे स्तर से शुरू हुई यह नर्सरी आज सैकड़ों प्रजातियों के फलदार, औषधीय और सजावटी पौधों के लिए प्रसिद्ध है. यहां पौधों की कीमत 100 रुपये से लेकर 2000 रुपये तक है, जबकि कुछ विशेष किस्मों के बड़े पौधे इससे अधिक कीमत में भी उपलब्ध हैं.
पंकज मिश्रा ने बताया की सदाबहार नर्सरी की सबसे बड़ी खासियत यहां मिलने वाली आम की दुर्लभ और अनोखी किस्में हैं. नर्सरी में मियां जाकी, चार किलो तक वजन वाला आम, अल्फांसो और जर्दालू जैसी विशेष प्रजातियों के पौधे उपलब्ध हैं. इसके अलावा अंजीर, एवोकाडो, कीवी, काजू, कटहल, जामुन और अमरूद की आठ अलग-अलग किस्मों के पौधे भी लोगों को आकर्षित कर रहे हैं. यहां मिलने वाला करीब छह फीट ऊंचा आम का पौधा लगाने पर अगले जनवरी महीने से ही फल देना शुरू कर देता है, जिसकी कीमत लगभग 2000 रुपये है.
नर्सरी में औषधीय और सजावटी पौधे भी उपलब्ध
आगे कहा कि यहां फलदार पौधों के साथ-साथ नर्सरी में औषधीय और सजावटी पौधों की भी भरपूर रूप से मौजूद है. जहां लगभग 100 प्रकार के फूलों और शो-प्लांट की किस्में यहां उपलब्ध हैं. इसके अलावा सजावटी पौधों की कीमत 50 रुपये से शुरू होकर 800 रुपये तक है. घर, बगीचे, कार्यालय और संस्थानों की सुंदरता बढ़ाने के लिए लोग बड़ी संख्या में यहां से पौधे खरीदने पहुंचते हैं.
पंकज कुमार मिश्रा ने बताया कि उन्होंने अपने गांव में 13 एकड़ क्षेत्र में विभिन्न फलदार पौधों का बाग विकसित किया है. उसी अनुभव के आधार पर उन्होंने छोटी-सी नर्सरी की शुरुआत की थी. धीरे-धीरे गुणवत्ता, सही मार्गदर्शन और बेहतर पौधों की उपलब्धता के कारण ग्राहकों का विश्वास बढ़ता गया और आज उनकी नर्सरी एक सफल व्यवसाय का रूप ले चुकी है.
आगे कहा कि वर्तमान में सदाबहार नर्सरी से उन्हें प्रतिमाह लगभग 40 से 50 हजार रुपये की आय हो जाती है. उनका मानना है कि यदि मेहनत, धैर्य और प्रकृति के प्रति लगाव हो तो नर्सरी का व्यवसाय कम लागत में भी अच्छी आय का माध्यम बन सकता है. उनकी सफलता आज उन युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो खेती और बागवानी के क्षेत्र में स्वरोजगार की नई संभावनाएं तलाश रहे हैं.
About the Author
मीडिया में 6 साल का अनुभव है. करियर की शुरुआत ETV Bharat (बिहार) से बतौर कंटेंट एडिटर की थी, जहां 3 साल तक काम किया. पिछले 3 सालों से Network 18 के साथ हूं. यहां बिहार और झारखंड से जुड़ी खबरें पब्लिश करता हूं.