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Bokaro Deepak BPSC Success Story: बोकारो के दीपक प्रसाद ने बीपीएससी 70वीं परीक्षा में 138वीं रैंक पायी और एसडीएम पद पर सेलेक्ट हुए. ये उनका चौथा प्रयास था और दीपक भारतीय रेलवे में सीनियर सेक्शन इंजीनियर पद पर रहते हुए तैयारी कर रहे थे. दीपक के पिता किराना की दुकान चलाते हैं और उन्होंने इस सफर में उनका खूब साथ दिया.
बोकारो. बोकारो के दुदींबाग बाजार में किराना दुकान चलाने वाले वीरेंद्र प्रसाद के बेटे दीपक प्रसाद ने बीपीएससी की 70वीं संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा में 138वीं रैंक हासिल कर एसडीएम पद के लिए चयनित होकर जिले का नाम रोशन किया है. खास बात यह है कि दीपक ने भारतीय रेलवे में नौकरी करते हुए यह सफलता अपने चौथे प्रयास में हासिल की है. दीपक वर्तमान में पश्चिम बंगाल के खड़गपुर में भारतीय रेलवे में सीनियर सेक्शन इंजीनियर के पद पर कार्यरत हैं. नौकरी की व्यस्तताओं के बावजूद उन्होंने नियमित पढ़ाई जारी रखी और आखिरकार सालों की मेहनत के बाद सफलता पायी है.
यहां से की पढ़ाई
दीपक ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा बोकारो इस्पात विद्यालय, सेक्टर-1सी से प्राप्त की. इसके बाद उन्होंने बोकारो इस्पात सीनियर सेकेंडरी स्कूल, सेक्टर-2सी से 12वीं की पढ़ाई पूरी की. वहीं, वर्ष 2017 में सागर कॉलेज, भोपाल से बीटेक करने के बाद उन्होंने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी शुरू कर दी. वहीं एमटेक की पढ़ाई के दौरान उनका चयन भारतीय रेलवे में जूनियर इंजीनियर के पद पर हुआ.
जरूर मिलती है सफलता
वहीं, अनुभव साझा करते हुए दीपक ने बताया कि किसी भी परीक्षा की तैयारी शुरू करने से पहले सिलेबस की पूरी जानकारी होना सबसे जरूरी है. इसके बाद अपने लक्ष्य पर पूरा ध्यान देकर मेहनत करते रहना चाहिए. वहीं, एक-दो बार असफलता मिलने से निराश नहीं होना चाहिए. अगर मेहनत और लगन ईमानदारी से की जाए, तो सफलता एक दिन जरूर मिलती है.
दीपक ने अपनी सफलता का श्रेय खड़गपुर में कार्यरत कार्य प्रबंधक सिद्धांत वर्मा को दिया, जिन्हें वह अपना मेंटर मानते हैं. उन्होंने कहा कि सिद्धांत वर्मा के मार्गदर्शन और लगातार प्रोत्साहन से उन्हें कठिन समय में आगे बढ़ने की प्रेरणा मिली. इसके अलावा उनके माता-पिता और पत्नी मुक्ता कुमारी ने काफी सहयोग किया.
परिवार ने दशकों किया संघर्ष
दीपक की सफलता के पीछे उनके परिवार का दशकों पुराना संघर्ष भी जुड़ा है. उनके दादा भगवान लाल साह और पिता वीरेंद्र प्रसाद मूल रूप से बिहार के सिवान जिले के बैदापुर बिशनपुर गांव के निवासी हैं. वर्ष 1981 में बेहतर आजीविका की तलाश में उनके पिता बोकारो आए. यहां दुदींबाग बाजार में एक छोटी किराना दुकान शुरू कर परिवार का पालन-पोषण किया और सीमित संसाधनों के बावजूद अपने तीनों बच्चों को अच्छी शिक्षा दिलाई.
आज उसी संघर्ष का परिणाम है कि परिवार के सभी बच्चे अपने-अपने क्षेत्र में सफल हैं. दीपक की बड़ी बहन ने बीजीएच से नर्सिंग की पढ़ाई की और वर्तमान में टीएमसी, जमशेदपुर में कार्यरत हैं. वहीं, छोटे भाई आशुतोष प्रसाद सीआईएसएफ में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इस तरह तीनों बच्चों ने अपने-अपने क्षेत्र में मुकाम हासिल किया और माता-पिता के संघर्ष को जाया नहीं होने दिया.
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बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी से मास कम्यूनिकेशन एंड जर्नलिज़्म में मास्टर्स, गोल्ड मेडलिस्ट. पत्रकारिता का सफर दैनिक जागरण से शुरू हुआ, फिर प्रभात खबर और ABP न्यूज़ से होते हुए News18 Hindi तक पहुंचा. करियर और देश की …और पढ़ें