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Religious Tourism Rajasthan: राजस्थान में आस्था और लोकविश्वास से जुड़े अनेक धार्मिक स्थल हैं, जिनमें जल की देवी का चमत्कारी दरबार अपनी अनूठी मान्यता के लिए प्रसिद्ध है. स्थानीय लोगों का विश्वास है कि खेत में नया ट्यूबवेल या बोरवेल खुदवाने से पहले यदि यहां श्रद्धापूर्वक पूजा-अर्चना की जाए और देवी से जल की प्रार्थना की जाए, तो पानी मिलने की संभावना बढ़ती है. इसी आस्था के चलते किसान और श्रद्धालु दूर-दूर से यहां पहुंचकर जल की देवी का आशीर्वाद लेते हैं. वर्षों से चली आ रही इस परंपरा ने इस स्थान को धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान दिलाई है. यह मान्यता स्थानीय लोकविश्वास का हिस्सा है और पीढ़ियों से चली आ रही परंपराओं को दर्शाती है.
भीलवाड़ा: भीलवाड़ा और चित्तौड़गढ़ के मध्य स्थित 1400 वर्ष प्राचीन सगरा माता का मंदिर है, जो अपने पानी के चमत्कार को लेकर मशहूर है. इस मंदिर में बड़ी संख्या में किसान और श्रद्धालु अपने खेतों में ट्यूबवेल या बोरिंग खुदवाने से पहले पानी की अच्छी आवक की कामना लेकर पहुंचते हैं. लोगों का विश्वास है कि सच्चे मन से यहां मन्नत मांगने पर जल स्रोत अवश्य मिलता है और खेतों में पानी की कमी दूर होती है. इसी के चलते इस मंदिर को ‘जल की देवी’ के नाम से जाना जाता है.
सगरा माता मंदिर के पुजारी देवीलाल गुर्जर ने बताया कि भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़ के मध्य 6 लाइन हाईवे के निकट 700 फिट ऊची पहाड़ी पर स्थित सगरा माता मंदिर 1400 वर्ष प्राचीन है. यहां पर दो बहनों की प्रतिमा स्थापित की गई है, जिसमें एक मुख्य प्रतिमा सगरा माता, जबकि उनकी बहन नारसी देवी माता विराजमान हैं. सगरा माता को पानी की देवी भी कहा जाता है. यहां पर किसान अपने खेत में पानी की अर्जी लगाने के लिए पहुंचते हैं. किसान अपने खेत की जमीन की मिट्टी लेकर मंदिर आते हैं और माता रानी के दर्शन कर खेत पर कुआं और ट्यूबवेल की खुदाई के दौरान पानी की अर्जी लगाते हैं. जहां माता रानी जगह बता दें, वहां पानी की धारा प्रकट होती है.
भीलवाड़ा जिला मुख्यालय से 45 किलोमीटर दूर
मंदिर पुजारी देवीलाल ने बताया कि सगरा माता मंदिर भीलवाड़ा और चित्तौड़गढ़ 6 लाइन हाईवे के मध्य स्थित 700 फिट ऊची पहाड़ी पर है. भीलवाड़ा जिला मुख्यालय से 45 किलोमीटर दूर, जबकि चित्तौड़गढ़ जिला मुख्यालय से यह 12 किलोमीटर दूर है. यहां पर पहुंचने के लिए दो रास्ते हैं, जिसमें पहला रास्ता 350 सीढ़ियों से चढ़कर आना होता है जबकि दूसरे रास्ते के लिए वाहन से भी पहुंचा जा सकता है.
माता रानी ने उसे दर्शन दिए और बताया कि उसका धन कहां
भक्त माधु लाल ने बताया कि सगरा नाम का एक बंजारा, जो यहां से गुजर रहा था, उसके धन की पोटली कहीं खो गई, जो उसे नहीं मिली थीं. वह उसे ढूंढते हुए इस पहाड़ पर पहुंचा, जहां उसने माता रानी से अरदास लगाई हैं. तब माता रानी ने उसे दर्शन दिए और बताया कि उसका धन कहां है, जिसके बाद बंजारा ने खुश होकर यहां पर मंदिर का निर्माण करवाया. तब से यह मंदिर यहां स्थापित है और बंजारा के नाम से ही जाना जाता है.
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